केवल 3% लोग ही दोनों आंखों का इस्तेमाल करते हैं, अधिकतर लोगों की दायीं आंख बायीं आंख की अपेक्षा अधिक समर्थ होती है हम लोग ‘दायां हत्था’ (Right-Handed) और ‘बायां-हत्या’ (Left-Handed) के अर्थ से तो भलीभांति परिचित हैं, लेकिन हम में से बहुत कम लोग दक्षिण-दृष्टि (Right-Sight) और वाम-दृष्टि (Left-Sight) का अर्थ जानते हैं. अर्थात् हम कभी अपने दोनों नेत्रों का उपयोग समान रूप से नहीं करते. एक आंख दूसरी से ज्यादा सक्रिय या समर्थ होती है. विभिन्न अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ कि मनुष्य देखने में 65 प्रतिशत इस्तेमाल अपनी दायीं आंख का करता है, 32 प्रतिशत बार्थी आंख…
Author: Shailja Dubey
कठफोड़वा (Woodpeckers) पिसिडी (Picidae) परिवार की एक चिड़िया है. ये पेड़ों के तनों की छाल में अपनी लंबी पैनी चोंच से सूराख करते रहते हैं. इसलिए इन पक्षियों को कठफोड़वा अर्थात लकड़ी को फोड़ने या उसमें छेद करने वाला कहते हैं. इसकी चोंच छैनी जैसी पैनी और मजबूत होती है जो कैसे भी मजबूत या पुराने पेड़ के तने में छेद कर सकती है. इसके सिर और गरदन की बनावट ऐसी होती है जिससे यह अपनी चोंच पेड़ के तने की छाल में पूरी ताकत से मार सकता है और उससे पैदा होने वाले धक्के को सहन कर सकता है.…
आमतौर पर लोग नॉर्वे (Norway) को लैंड ऑफ द मिडनाइट सन (Land of the Midnight Sun) के नाम से पुकारते हैं. इसका कारण यह है कि इस देश में मई के मध्य से जुलाई के अंत तक सूरज पूरी तरह नहीं छिपता है. इस अवधि में रात में भी पूरी तरह अंधकार नहीं होता, बल्कि काफी उजाला रहता है. नॉर्वे के उत्तरी हिस्सों में गर्मी के दो महीने तो सूर्य छिपता ही नहीं है, केवल हल्का सा अंधेरा छा जाता है, जैसा कि हमारे यहां शाम को सूर्य छिपने से पहले होता है. जाड़े के दो महीने यहां सूर्य के…
कैसोवरी (Cassowary) संसार की सबसे खतरनाक चिड़िया है. इसके पैरों पैरों के अंगूठों में अंदर की ओर हुरे जैसा एक पंजा होता है, जिससे यह आदमी के पेट को आसानी से चीर सकती है. इस चाकू जैसे पंजे से यह आदमी की कर सकती है. क्या तुम जानते हो कि यह चिड़िया कहां पायी जाती है? यह चिड़िया न्यू गाइना (New Guinea) और उत्तरी के जंगलों में पायी जाती है. यह चिड़िया बहुत ही कम दिखाई देती है, लेकिन इसकी आवाज अक्सर सुनाई देती रहती है. यह उड़ नहीं सकती, क्योंकि इसका आकार बहुत बड़ा होता है, लेकिन यह दौड़ती…
नाइट्रोजन (Nitrogen) सभी जीवित प्राणियों के लिए एक अत्यंत आवश्यक तत्व है. हमारे वायुमंडल में लगभग 78% नाइट्रोजन गैस है. इस नाइट्रोजन की कुछ मात्रा जीवित प्राणियों द्वारा निरंतर इस्तेमाल होती है और लगभग उतनी ही मात्रा वायुमंडल में वापस आती है. इस प्रकार पृथ्वी, जल, वायु और जीवित प्राणियों के बीच नाइट्रोजन के निरंतर आदान-प्रदान को नाइट्रोजन चक्र (nitrogen cycle) के नाम से जाना जाता है. वायुमंडल में नाइट्रोजन की मात्रा स्थिर रहना नाइट्रोजन-चक्र को भली-भांति समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि वायुमंडल से किस प्रकार नाइट्रोजन प्राप्त की जाती है और प्रयोग में लाई हुई यह नाइट्रोजन…
हम कैमरे में टेलीस्कोप लगाकर अधिक तारों की फोटो ले सकते हैं रात्रि के अंधकार में हम असंख्य तारे आकाश रोज ही देखते हैं. इनमें से कुछ तारे छोटे होते हैं, तो कुछ बड़े, कुछ बहुत ही चमकीले होते हैं, तो कुछ मंद रोशनी पैदा करते हैं. तारों को देखकर हमें बड़ा आश्चर्य होता है. हमें ऐसा लगता है कि इन तारों को गिना नहीं जा सकता. इसमें संदेह नहीं कि ये तारे असंख्य हैं और गिनना असंभव है, लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि बिना दूरदर्शी की सहायता के हम इन असंख्य तारों में से केवल 6000…
ब्लैक होल्स के बारे में वैज्ञानिकों का कथन है कि वह तारों के जीवन की अंतिम स्थिति होती है. हमारी आकाश गंगा में लाखों ब्लैक होल्स हैं बीसवाँ सवीं शताब्दी के खगोलशास्त्रियों ने अंतरिक्ष में कुछ काले क्षेत्रों की संभावना व्यक्त की है, जो विशाल तारों के समाप्त जो जाने पर बनते हैं. अंतरिक्ष के इन काले क्षेत्रों को ही ब्लैक होल (Black Hole) के नाम से जाना जाता है. ब्लैक होल के अंदर गुरुत्वाकर्षण बल इतना अधिक होता है कि कोई भी वस्तु जो इसमें अंदर चली जाए बाहर नहीं आ सकती. यहां तक कि प्रकाश भी ब्लैक होल…
ल्यूकेमिया (Leucamia) या ब्लड-कैंसर रक्त-गड़बड़ी होने के कारण होने वाला एक घातक रोग है. यह स्त्री-पुरुषों दोनों में किसी भी उम्र में हो सकता है. ब्लड कैंसर क्यों होता है, इसका कारण अभी तक ज्ञात नहीं हो सका है. क्या आप जानते हैं कि इस घातक बीमारी में क्या होता है? रक्त हमारे शरीर के हर भाग में प्रवाहित होकर जीवन का संचार करता रहता है. रक्त के अवयवों का अपना-अपना विशेष कार्य है. रक्त में सबसे अधिक संख्या लाल रक्त कोशिकाओं की होती है. उसके बाद श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या होती है. लाल रक्त-कोशिकाएं सारे शरीर में स्थित…
टाइफाइड (Typhoid) एक भयानक संक्रामक रोग है, जो एक प्रकार के जीवाणु (Bacteria) से फैलता है. आयुर्विज्ञान की भाषा में इसे बैसिलस सेलमोनेला टायफोसा कहते हैं. यह गंदे भोजन या गंदे पानी के साथ शरीर में प्रवेश कर के खून तक पहुंच जाता है, यह खून को प्रभावित करके पूरी रक्त व्यवस्था को दूषित कर देता है. टाइफाइड का कारण टाइफाइड दूषित पानी, दूध या भोजन से होता है. टाइफाइड के जीवाणु पकने से पहले भोजन सामग्री में भी वाहक द्वारा पहुंच सकते हैं. मक्खियां भी इन जीवाणुओं को इधर से उधर पहुंचाती हैं. टाइफाइड की बीमारी के ठीक हो…
दूध (Milk) एक पौष्टिक पदार्थ है, जिसे माताएं अपने बच्चों को पिलाती हैं. इसमें शारीरिक विकास के लिए आवश्यक सभी तत्व होते हैं. जन्म से कुछ महीनों तक स्तनपायी पशुओं का बच्चा दूध पर ही पलता है. वास्तव में किसी भी जाति के स्तनपायी के शिशु के लिए दूध एक तरह से पूर्ण आहार होता है. यही स्थिति मानव-शिशु के विषय में भी सच है, क्योंकि यह हजम भी बहुत आसानी से होता है, इसलिए बच्चों के लिए इससे अधिक आदर्श भोजन कोई नहीं होता. दूध स्तनपायी की मादा के शरीर में एक विशेष ग्रंथि (Gland) में बनता है, जिसे…
भेंगापन (Squint) एक बीमारी है, जिसमें दोनों आंखें एक ही दिशा में नहीं देख पातीं. इस बीमारी को स्ट्राबिस्मस (Strabismus) या हेटेरोट्रापिया (Heterotropia) भी कहते हैं. भेंगापन तीन प्रकार का होता है. एक में दोनों आंखें एक दूसरे की तरफ देखती हैं, दूसरे में नीचे की तरफ और तीसरे में ऊपर की तरफ, आंखों का किसी भी दिशा में देखने पर यदि भेंगापन स्थायी रहता है, तो उसे ‘कमिटेंट’ भेंगापन कहते हैं. दूसरी तरह के भेंगापन को ‘नानकमिटेंट’ कहते हैं, जिसमें भंग नजर की दिशा के साथ-साथ कम-ज्यादा होता है. भेंगापन स्नायु-नियंत्रण में कुछ गड़बड़ी होने से होता है. वास्तव…
हम जानते हैं कि किन्ही भी दो व्यक्तियों के उंगलियों के निशान एक से नहीं हो सकते, ठीक उसी प्रकार दो व्यक्तियों की आवाज भी एक जैसी नहीं होती. क्या आपको पता है ऐसा क्यों होता है ? बोलने की क्रिया में सैकड़ों पेशियां सेकेंड से भी कम समय में एक सामंजस्य के साथ सक्रिय होती हैं. बोलने यंत्र जिसे लेरिंक्स या ध्वनि-बॉक्स कहते हैं, असंख्य आवाजें पैदा कर सकता है. यह गले का वह भाग है, जिसमें से हवा गुजरती है. जब हम सांस लेते हैं, तो पहले हवा मुंह और नाक में से लेरिंक्स में नीचे की ओर…
जब से चिकित्सा विज्ञान में शल्य चिकित्सा का आरंभ हुआ है, कई तरह की जड़ी-बूटियां, गैस, तेल और दवाइयां दर्द से छुटकारा पाने के लिए प्रयोग होती रही हैं. लेकिन इनमें से कोई भी औषधि पूरी तरह सफल नहीं हुई. इसलिए आपरेशन किसी भी मरीज के लिए बेहद दर्दनाक सिद्ध होता रहा है. कभी-कभी तो इसमें होने वाले दर्द और सदमें से मरीज की मौत तक हो गई है. पर जब से बेहोश करने की औषधियों का आधुनिक विज्ञान ने आविष्कार किया है, इस क्षेत्र में अपूर्व सफलता प्राप्त हुई है. सबसे पहले आपरेशन में बेहोश करने वाली दवा का…
आयरन लंग मशीन (iron lung machine) जीवन-सुरक्षा की एक आधुनिक मशीन है. इस मशीन का आविष्कार सन् 1929 में हारवर्ड (अमेरिका) के फिलिप ड्रिंकर (Philip Drinker) नामक व्यक्ति ने किया था. यह मशीन उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है, जिन्हें छाती के पैरालिसिस या अन्य किसी बीमारी की वजह से, या फिर किसी दुर्घटना के कारण सांस लेने में तकलीफ होती है. इस मशीन में एक वायुरुद्ध-कक्ष होता है, जिसमें रोगी को रखा जाता है. यह मशीन रोगी के आस- विद्यमान वायु के दबाव को बारी-बारी से घटा-बढ़ा कर रोगी को सांस लेने में सहायता पहुंचाती है. जब छाती…
ई.सी.जी. (Electrocardiography- ECG) या विद्युत हृदयलेखन हृदय के धड़कने के कारण पैदा हुए विद्युत-कंपनों का ग्राफ बनाने की एक विधि है. इस ग्राफ को विद्युतहृदयलेख (Electrocardiography) कहते हैं. हृदय की सभी क्रियाएं विद्युत- कंपनों द्वारा ही संचालित होती हैं. हृदय का प्रत्येक भाग जिसमें से रक्त बहता है, अपना स्वतंत्र विद्युत लहरों का पैटर्न बनाता है. इन्हीं कंपनों के अलग- अलग आरेख को मशीन द्वारा रिकार्ड करके इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (Electrocardiogram) बना लिया जाता है. यह ग्राफ हृदय की हालत और गतिविधियों के विषय में अत्यंत उपयोगी सूचनाएं देता है. यह हृदय की बीमारियों का इलाज करने में बहुत काम आता है.…
कोढ़ (Leprosy) एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है जो अधिकतर उमस भरे, उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण मौसम वाले प्रदेशों में होती है. अधिकतर एशिया, दक्षिणी अमेरिका, जापान, कोरिया और प्रशांत महासागर के द्वीपों में मिलते हैं. यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है. यद्यपि यह छूत की बीमारी है, फिर भी यह इतनी आसानी से नहीं फैलती जैसा कि हम पहले सोचते थे. कोढ़ माइकोबैक्टीरियम लेपरी बैसिल्स (Myco- bacterium leprae bacillus) नाम के जीवाणुओं के कारण होता है. ये आदमी की खाल और स्नायु-तंत्र को प्रभावित करते हैं और शरीर पर जगह-जगह सफेद चकत्ते पड़ जाते हैं और गांठें उभर आती हैं. ये…
भारत में लोक-सभा तथा राज्य सभा संसद या केंद्रीय विधान-परिषद के दो सदन हैं. राष्ट्रपति का पद संसदीय लोकतंत्र का एक हिस्सा होते हुए भी कुछ अर्थों में संसद से ऊपर है. उदाहरण के लिए दोनों सभाओं से पास बिल पर राष्ट्रपति की सहमति लेना जरूरी है. उनकी सहमति के बाद ही यह बिल कानून का रूप धारण करता है. संसद के साल में कम से कम दो अधिवेशन जरूरी हैं. दोनों अधिवेशनों के होने के बीच का अंतराल छः महीने से अधिक नहीं होना चाहिए, संसद के निम्न सदन (The Lower House or House of the People) को लोक-सभा…
लिवर (Liver) जिसे हिंदी में जिगर या यकृत भी कहते हैं उदर में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और आवश्यक अंग है. इसे शरीर की रात दिन चलने वाली लेबोरेटरी, प्रयोगशाला या रसायन बनाने का कारखाना कहा जा सकता है. जिगर में सौ से भी अधिक प्रक्रियाएं चलती रहती हैं. मूलरूप से जिगर का कार्य भोजन को मलोत्सर्जन, भोजन-सामग्री का संचयन और भोज्य पदाथों का रूपांतरण, रक्त-निर्माण की प्रक्रिया को बनाए रखना तथा विषैले तत्वों को नष्ट करना आदि है. यदि कसी मनुष्य का जिगर काम करना बंद कर दे तो कुछ ही घंटों में उसकी मृत्यु निश्चित है. एक वयस्क…
कुछ पदार्थों विशेषकर प्रोटीनों के प्रति शरीर की असाधारण संवेदनशीलता को एलर्जी (Allergies) कहते हैं. हे-फीवर (परागज ज्वर), त्वचा पर चकत्ते पड़ना, किसी खास प्रकार के इंजेक्शन की प्रतिक्रिया और कुछ प्रकार के दमा रोग मनुष्य में होने वाली एलर्जी के कुछ उदाहरण हैं. हमारे वातावरण में प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाले अनेक पदार्थों के असंख्य कण मिलते हैं इन पदार्थों को एलर्जी के रूप में जाना जाता है जो अधिकतर लोगों के लिए हानिकारक नही होते. एलर्जी उत्पन्न करने वाले ये पदार्थ पराग या धूल कणों के साथ नाक या आंखों द्वारा शरीर में प्रवेश कर जाते हैं. ये…
अस्पताल (Hospital) वह स्थान और संस्था है। जहां बीमार लोगों की देखभाल और इलाज किया जाता है. क्या आप जानते हो कि अस्पतालों की शुरुआत कब और कैसे हुई? अस्पतालों या औषधालयों ((Hospital) का इतिहास भारत और यूनान देश के बेबीलोनिया से शुरू होता है. शुरू के ये अस्पताल मंदिर थे. मरीजों को बहुत थोड़ी दवायें दी जाती थीं. लंका में ईसा से 437 वर्ष पूर्व भी अस्पताल थे, भारत में इससे भी पहले महात्मा बुद्ध के समय से अस्पतालों की स्थापना होती आ रही है. सम्राट अशोक द्वारा तीसरी ईसवी में 18 अस्पतालों की स्थापना की गई थी और…
एल्बिनिज्म (Albinism) लैटिन शब्द एल्बस (Albus) से बना है, जिसका अर्थ है-सफेद, एल्बिनिज्म या रंजकहीनता या रंगहीनता एक पैतृक रोग है, जो जीन्स (Genes) में परिवर्तन आ जाने से होता है. रंजकहीनता केवल मनुष्यों में ही नहीं, बल्कि जानवरों और पौधों में भी मिलती है. रंजकहीनता आंखों, खाल पर और बालों में से पीले, लाल, भूरे और काले रेशों की अनुपस्थिति से पैदा होती है. इसकी वजह से शरीर में धब्बे पड़ जाते हैं. एल्बिनिज्म छुआछूत का रोग नही है यह एक जेनेटिक रोग है जो ज्यादातर मामलों में बच्चों को माता-पिता से मिलता है और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी…
चिकन पॉक्स (Chicken pox) या छोटी माता बच्चों में होने वाला आम रोग है. यह आमतौर पर दो से छह वर्ष के आयु वर्ग में होता है. वयस्क लोग इस रोग के संक्रमण से कदाचित ही ग्रसित होते हैं. यह रोग आमतौर से महामारी के रूप में फैलता है. चिकन पॉक्स का कारण चिकन पॉक्स एक प्रकार के सूक्ष्म विषाणु द्वारा फैलता है, जिसे विशेष प्रकार के माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है. इस सूक्ष्म विषाणु का नाम वरिसेला जॉस्टर (Vericella Zoster virus) है. हवा में नमी द्वारा इसके विषाणु एक जगह से दूसरी जगह जाकर यह बीमारी तेजी…
आमतौर पर अन्य जीवों की तुलना में स्तनपायी जीवों का मस्तिष्क उनके शरीर के अनुपात से बड़ा होता है. स्तनपायी जीवों में मनुष्य का मस्तिष्क सबसे अधिक विकसित और बड़ा है. यह जीवन भर शरीर के सभी कार्यों और गतियों पर नियंत्रण रखता है. यह हर क्षण सक्रिय रहता है और शरीर के सभी अंगों को उनके कार्यों के बारे में मार्ग निर्देशन देता है. यही कारण है कि मस्तिष्क को शरीर का नियंत्रण केंद्र कहते हैं. क्या आप जानते हो कि हमारा मस्तिष्क किसका बना हुआ है यह अपने भिन्न-भिन्न कार्यों को कैसे करता है? मानव मस्तिष्क (Human Brain)…
मोनेट की एक प्रभाववादी पेंटिंग प्रभाववादी कला की प्रवृत्ति को सुर्योदय के दृश्य में आगे बढ़ाने में योग दिया चित्रकला कला उतनी ही प्राचीन है जितनी मानव सभ्यता इसे कला का सबसे रचनात्मक रूप समझा जाता है. इतिहास के अलग अलग कालों में चित्रकला की भिन्न-भिन्न शैलियों का विकास हुआ. प्रत्येक शैली में अपनी विशेषता रखनेवाले महान चित्रकार हुये. प्रभाववाद (Impressionism) इनमें से एक ऐसी शैली है जिसका सबसे पहले फ्रांस के चित्रकारों ने सन् 1870 आदि में उपयोग किया. इस प्रकार के चित्र या पेंटिंग्स किसी एक चीज का प्रभाव दिखाते हैं, चित्र में दिखाई सभी चीजों का नहीं.…
शरीर की बीमारी के कीटाणुओं (बैक्टीरिया, वायरस, प्रोटोजोआ) के खिलाफ लड़ने और बीमारी के बाद ठीक होने की प्राकृतिक क्षमता को इम्यूनिटी (immunity) या रोधक्षमता कहते हैं. जिस व्यक्ति में किसी बीमारी के प्रति यह रोधक्षमता होती है, उसे वह बीमारी नहीं लगती, जबकि दूसरों को यह बीमारी लग सकती है. माइक्रोब (Microbe) और पैरासाइट (Parasite) आदमियों में कई बीमारियां फैलाते हैं. बीमारी फैलाने वाले कीटाणु एक प्रकार का जीव-विष शरीर में छोड़ते हैं, जो बहुत जहरीला होता है. सामान्य तौर पर माइक्रोबों से बचने की शरीर में प्राकृतिक शक्ति होती है. पहले तो खेल ही इन्हें अंदर घुसने नहीं…

























