Author: Shailja Dubey

"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल लोगों को सही दिशा देने में कर सकें।" इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। अभी मैं दैनिक अपडेट, मनोरंजन, सामान्य ज्ञान और जीवनशैली समेत अन्य विषयों पर काम कर रही हूं।

हम जानते हैं कि प्रत्येक पदार्थ छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना इन कणों को परमाणु कहते हैं. परमाणु अत्यंत सूक्ष्म होते हैं, जिन्हें नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता. बीसवीं शताब्दी के शुरू में वैज्ञानिकों ने यह भी पता लगा लिया कि परमाणु और भी अत्यंत सूक्ष्म कणों से मिलकर बने हैं. ये अत्यंत सूक्ष्म कण हैं: इलेक्ट्रोन, प्रोटोन और न्यूट्रान. इन कणों को हम मूल कण (Elementary Particles) कहते हैं. इन मूल कणों के अतिरिक्त वैज्ञानिकों ने और भी बहुत से मूल कणों का पता लगा लिया है. कौस्मिक किरणों के अध्ययन से पता चला है कि ब्रह्मांड…

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प्रोजेक्टर (projector) एक ऐसा प्रकाशिक यंत्र है, जो पर्दे पर सिनेमा फिल्म या स्लाइडों के आकार में बढ़े हुए चित्र प्रदर्शित करता है. इस यंत्र को प्रोजेक्शन लैंटर्न भी कहते हैं. प्रोजेक्टर पर्दे पर बड़े चित्र कैसे बनाता है? एक साधारण प्रोजेक्टर के निम्नलिखित हिस्से होते हैं: (1) एक प्रकाश स्रोत, (ii) एक अवतल परावर्तक, जो प्रकाश को केंद्रित करता है, (iii) एक कंडेंसर लेंस, तथा (iv) एक प्रोजेक्टर लेंस. किसी स्लाइड के छोटे प्रतिबिंब को आवर्धित करने के लिए (आकार में बढ़ाने के लिए) एक प्रकाश-स्रोत की आवश्यकता होती है. अधिकतर प्रोजेक्टरों में 1000 वाट का टंगस्टन फिलामेंट का…

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मनुष्य प्राचीन काल से ही समय मापने के लिए अलग-अलग तरह की घड़ियों का इस्तेमाल करता आया है प्राचीन काल की घड़ियों में अधिक प्रामाणिकता नहीं थीं, परंतु आज के वैज्ञानिकों ने बहुत हो उच्च स्तर की घड़ियों का विकास कर लिया है, जिनसे छोटी से छोटी समय की गति को मापा जा सकता है. सामान्य तौर पर प्रयोग में आने वाली आधुनिक पड़िया तीन प्रकार की हैं 1. चाबी से चलने वाली पड़ियों, 2 विद्युत से चलने वाली घड़ियां और 3. इलेक्ट्रोनिक पड़ियां चाबी वाली घड़ियां स्प्रिंग से चालती है, विद्युत घड़ि‌यां बेट्री से और इलेक्ट्रोनिक घड़ियों (Quartz) से.…

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Stereo speakers

जिन ध्वनियों को हम रोज सुनते हैं, वे सभी स्टीरिओफोनिक (Stereophonic) होती हैं. हमारे दो कान हैं और दोनों कानों में आने वाली ध्वनियों में थोड़ा-सा अंतर होता है. उनके पहुंचने का समय तथा तीव्रता में कुछ अंतर अवश्य होता है. प्रत्येक कान में ध्वनि के पहुंचने के समय तथा उनकी तीव्रता का अंतर हमारा मस्तिष्क पता कर लेता है. हमारा मस्तिष्क एक सेकेंड के एक हजारवें भाग का अंतर पता लगा सकता है. अब यदि किसी के सामने दो माइक्रोफोन रख दिए जाएं, तो इन तक आने वाली ध्वनियों की तीव्रता और पहुंचने के समय में कुछ न कुछ…

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कुत्ता मनुष्य का बहुत ही वफादार दोस्त माना जाता है. शायद मानव ने इस जानवर को ही सबसे पहले पालना किया था. यह जानवर हमारे लिए बहुत ही उपयोगी है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह के लिए बहुत ही घातक सिद्ध हो सकता है. मनुष्य को काटकर यह कई प्रकार के बैक्टीरिया, वायरस, पैरासाइट तथा फंगस से फैलने वाले रोंगों का निमित्त बना सकता है. कुत्ते के काटने से बहुत से बैक्टीरिया हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिनसे क्षय रोग, स्पलेनिक फोवर, स्कारलेट फीवर, डिप्थीरिया आदि भयंकर रोग पैदा हो सकते हैं. कुत्तों के साथ सैलमोनेला एंटरिटिडिस तथा…

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fly rubbing its leg

घरेलू मक्खी (Domestica) सभी कीड़ों तुलना में सबसे अधिक पाई जाती है. हमारे स्वास्थ्य के लिए शायद यह सबसे अधिक खतरनाक है विशेषकर उन देशों में जहां सफाई संबंधी स्थितियां अच्छी नहीं होतीं. मक्खी का शरीर हल्का भूरा और रोएंदार होता है. इसकी लंबाई लगभग 7 मिमी. होती है. इसकी दो लाल रंग की आंखें होती हैं. यह मुंह से काट नहीं सकती. इसका मुंह दो स्पंजी गद्दियों से बना होता भोजन करने का इसका तरीका बहुत विचित्र होता है. पहले यह लार तथा अन्य पाचक रस भोजन पर टपकाती है. इस रस से जो घोल बनता है, उसे यह…

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Four Penguins

पेंनगुइन (Penguin) स्फेनिस्सिफोर्स (Sphenisciformes) प्रजाति के बहुत विचित्र समुद्री पक्षी हैं. ये अत्यंत ठंडे प्रदेशों में रहते हैं. इनके विषय में सबसे विचित्र बात यह है कि ये आदमी की तरह पैरों पर सीधे खड़े हो सकते हैं. पेंगुइन पक्षी के पाए जाने वाले स्थान कुछ लोगों का मत है कि यह अनोखा पक्षी जहां भी ठंडा मौसम होता है, वहीं पाया जाता है, लेकिन यह धारणा गलत है, ये केवल धरती के दक्षिणी गोलार्ध में मिलते हैं, ये एंटार्कटिक महाद्वीप और टापुओं पर रहते हैं. ये अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, और दक्षिणी अमेरिका के ठंडे दक्षिणी समुद्र तटों पर भी…

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अफ्रीका का शुतुरमुर्ग (Ostrich) सबसे बड़ा पक्षी है. यह अपने विशाल आकार के कारण बिल्कुल भी उड़ नहीं सकता. यह 2.4 मी. ऊंचा तथा वजन में 133 किग्रा. तक होता है. भारी वजन के कारण यह अपना शरीर हवा में उठा नहीं पाता. हम आपको बताते है शीर्ष 7 सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों की सूची के बारे में सबसे अधिक पंखों के विस्तार वाले पक्षियों के दो समूह हैं: एलबेट्रॉस (Albatross) और गिद्ध (Condors) ये दोनों ही उड़ सकते हैं. इन दोनों का वजन लगभग 13.5 किग्रा. होता है. 1. सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों की सूची में एलबेट्रॉस पहले…

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हम यह भली भांति जानते हैं कि धातु के तारों द्वारा विद्युत एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से जा सकती है. प्रकाश भी ठीक उसी प्रकार तारों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है, लेकिन धातु के तारों में से नहीं. प्रकाश को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए कांच के तंतु (Fibres) प्रयोग में लाए जाते हैं. ये तंतु बहुत बारीक होते हैं. विज्ञान की वह शाखा जिस में प्रकाश के द्वारा संचरण का अध्ययन किया जाता है, तंतु प्रकाशको या फाइबर ऑप्टिक (Fibre Optics) कहलाती है. ब्रिटेन…

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मूलरूप से आग का लगना एक रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें ऊष्मा और प्रकाश पैदा होते हैं. आग जलने के लिए तीन चीजों का होना आवश्यक है-ईंधन, आक्सीजन या वायु तथा ऊष्मा, जो ईंधन का तापमान ज्वलनांक तक बढ़ा सके. आग बुझाने के लिए इन तीनों कारणों में से किसी एक या एक से अधिक कारणों को नष्ट करना होता है, अर्थात् आग बुझाने के लिए या तो जलते हुए ईंधन का तापमान कम कर दिया जाए या आक्सीजन या वायु की सप्लाई काट दी जाए या जलने वाले ईंधन को ही समाप्त कर दिया जाए. सभी प्रकार के अग्निशामक इन्हीं…

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पोलारॉयड कैमरा (polaroid camera) एक ऐसा कैमरा है, जो मिनट भर किसी भी वस्तु का फोटो तैयार कर देता है. इससे साथ के साथ ही पोजिटिव प्रिंट तैयार हो जाते हैं. इसका आविष्कार अमेरिका के एडविन एच लैंड ने किया था. पहला कैमरा बाजार में बिकने के लिए सन् 1948 में आया. इस समय इससे केवल श्वेत और काले (Black and White) फोटो ही खींचे जा सकते थे. बाद में ऐसे कैमरे भी विकसित हो गए, जिनसे रंगीन चित्र भी खींचे जा सकते हैं. पोलारॉयड कैमरा की रील यानी फिल्म दोहरी होती है. इसका एक हिस्सा नेगेटिव बनाने का काम…

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Quasars in sky

सन् 1960 में अमेरिका के खगोलशास्त्री ए. आर. ससेनडेगे (A.R. Sandage) ने बाह्य अंतरिक्ष में कुछ नये खगोलीय पिंडों का पता लगाया है, जिन्हें क्वासर (Quasars) या क्वासी स्टैलर सोर्सेज या क्वासी स्टैलर ऑबजेक्ट (QSO) कहते हैं. इन पिंडों के चित्र तारों से मिलते-जुलते हैं, लेकिन वास्तव में ये तारे नहीं हैं. इनकी एक विशेषता यह है कि इनके स्पैक्ट्रम में रेड शिफ्ट देखने को मिलती है. चित्र में ये तारों की भांति इसलिए दिखते हैं, क्योंकि इनके कोणीय व्यास लगभग एक आर्क सेकेंड के बराबर होते हैं. इतने छोटे कोणीय व्यास को हमारे दूरदर्शी रिजौल्व नहीं कर पाते, क्योंकि…

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मास स्पेक्ट्रोग्राफ (Mass Spectrograph) पदाथों के विश्लेषण के लिए काम आने वाला बहुत ही उपयोगी उपकरण है. इससे किसी पदार्थ में उपस्थित विभिन्न प्रकार के अणुओं और परमाणुओं का तो पता चलता ही है, साथ ही उनकी मात्रा का भी पता लग जाता है. विद्युत और चुंबकीय बलों द्वारा इस यंत्र में विभिन्न द्रव्यमानों के आयनों को अलग कर लिया जाता है. पदार्थ विश्लेषण के इस यंत्र का अपना ही महत्व है. मास स्पेक्ट्रोग्राफ किस प्रकार कार्य करता है? सबसे पहला मास स्पेक्ट्रोग्राफ ब्रिटेन के वैज्ञानिक विलियम फ्रांसिस आस्टन ने विकसित किया था. उन्हें इस विकास के लिए सन् 1922…

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माइक्रोफोन (Microphone) एक ऐसा यंत्र है, विद्युत-संकेतों में जो ध्वनि तरंगों को बदल देता है. ये संदेश फिर दूर स्थानों तक संचरित किए जा सकते हैं और दूर स्थान पर फिर इन्हें ध्वनि तरंगों में परिवर्तित किया जा सकता है. रेडियो और टेलीविजन केंद्रों पर संदेश संचरण व्यवस्थाओं में माइक्रोफोनों को प्रयोग किया जाता है. इनके द्वारा ध्वनि-संदेशों को विद्युत धारा में बदलकर दूरस्थ स्थानों तक संचरित किया जाता है. जनता को भाषण देने वाली पद्धतियों तथा सिनेमाघरों में भी माइक्रोफोनों से यही काम लिया जाता है. क्या आप जानते हो की माइक्रोफोन ध्वनि को विद्युत तरंगों में कैसे बदल…

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मनुष्य हजारों वर्षों से साबुन और पानी को धुलाई के लिए इस्तेमाल करता आ रहा है. सबसे पहले साबुन लगभग 5000 वर्ष पहले मध्य-पूर्वी देशों में बनाया गया था. साबुनरहित डिटर्जेंटों का आविष्कार बहुत पुराना नहीं हैं. विश्लेषित डिटर्जेंट का आविष्कार सन् 1916 में हुआ था. तब से साबुनरहित डिटर्जेंटों का निर्माण पेट्रोकेमीकल उद्योग का एक मुख्य अंग बन गया इनके विकास के साथ कपड़े धोने के नये तरीकों के विकास में भी क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं. सूखी धुलाई भी इन तरीकों में से एक है. ड्राइक्लीनिंग (Dry-cleaning) कैसे की जाती है ? ड्राइक्लीनिंग कपड़े धोने का ऐसा तरीका है,…

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माचिस (Matchbox) की तीलियां लकड़ी या कार्डबोर्ड के मोम लगे कागज से बनाई जाती है, टुकड़ों या जिनके एक सिरे पर कुछ ज्वलनशील पदार्थों का मिश्रण लगा होता है. इन्हें आग पैदा करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है. माचिस की तीली के मसाले लगे सिरे को जब किसी खुरदरी सतह या माचिस के रसायन लगे तल से रगड़ा जाता है, तो एकदम आग पैदा होती है, जिससे तीली जल उठती है. क्या आप जानते हो कि माचिस की तीली के सिरे पर कौन से पदार्थ प्रयोग में लाए जाते हैं? माचिस उद्योग में लाल फासफोरस सबसे अधिक प्रयोग…

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Colourful clothes

आज की दुनिया 100 वर्ष तो क्या 50 वर्ष पहले तक की दुनिया से अधिक चमकीली और रंगीन दिखाई देती है. इस रंगीनी का कारण विभिन्न प्रकार के रंगों का विकास है. रंगों के विकास के कारण ही आज हमें अनेक रंगों के कपड़े देखने को मिलते हैं. क्या आप जानते हैं कि ये रंग क्या हैं और कैसे बनाए जाते हैं? पिछली शताब्दी के मध्य तक हमारे उपयोग के लिए कुछ ही रंग उपलब्ध थे. ये रंग पौधों और फूलों से प्राप्त होते थे. उस समय तक नील के पौधे से नीला रंग प्राप्त किया जाता था. मैडर नाम…

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थर्मामीटर (thermometer) तापमान मापने का एक बहुत उपयोगी उपकरण है. डॉक्टर इसके द्वारा शरीर का तापमान मापते हैं. वैज्ञानिक इसकी सहायता से रासायनिक क्रियाओं, ठोस पदार्थों के पिघलने (गलनांक) और द्रवों के उबलने (क्वथनांक) का तापमान ज्ञात करते हैं. इन्हीं के द्वारा वायुमंडल और कमरे का तापमान भी मापा जाता है. क्या तुम जानते हो कि विभिन्न कार्यों में आने वाले ये धर्मामीटर कितने प्रकार के होते हैं? विभिन्न कामों में आने वाले धर्मामीटरों को हम निम्न वर्गों में बांट सकते हैं:-1. द्रवयुक्त कांच के थर्मामीटर2. द्विधातुक पट्टी थर्मामीटर 3. विद्युत थर्मामीटर4. गैस थर्मामीटर 1. द्रवयुक्त कांच के थर्मामीटर: इन…

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रात्रि के अंधकार में आकाश में असंख्य तारों की छटा बड़ी ही मनमोहक लगती है. आकाश के इन तारों की चमक तथा आकार अलग-अलग होता है. ध्यान से देखने पर पता चलता है कि इन तारों का रंग भी अलग अलग है. सूर्य भी एक तारा है.  सूर्य और तारों का तापमान किस प्रकार मापा जाता है? तारों का तापमान ज्ञात करने के कई तरीके हैं. तारों के रंगों के आधार पर उनके तापमान का काफी हद तक सही अनुमान लगाया जा सकता है. सामान्य तौर पर तारों का रंग लाल, संतरी, पीला, सफेद और नीला होता है. लाल रंग…

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वीडियो टेप या रिकार्डर कई तरीके से आम टेप रिकार्डर से मिलता-जुलता है. दोनों में अंतर यह है कि आम टेप-रिकार्डर ध्वनि को आरेखित करता है, तथा पुनः पैदा करता है, जबकि वीडियो टेप रिकार्डर ध्वनि तथा चित्र दोनों का ही लेखा-जोखा करता है. इसे बी.सी.आई. (वीडियो कैसेट रिकार्डर) भी कहते हैं. बाजार में वी. सी. पी. (वीडियो कैसेट प्लेयर) भी मिलता है जिसके द्वारा वीडियो कैसेट की फिल्म को देखा सुना जा सकता है. पर टी. वी. का कोई कार्यक्रम रिकार्ड नहीं किया जा सकता. वी.सी. आर. आमतौर पर टेलीविजन प्रोग्रामों को रिकार्ड करने के लिए प्रयुक्त होता है.…

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Kalidas (कालिदास)

महाकवि कालिदास भारत के महानतम कवि और नाटककार थे. संस्कृत भाषा में इनकी बराबरी करने वाला दूसरा कोई भी कवि अब तक नहीं हुआ है. इनकी तुलना आमतौर पर इंग्लैंड के महान नाटककार और कवि शेक्सपीयर (Shakespeare) से की जाती है. कालिदास की रचनाएं विश्व भर में प्रसिद्ध हैं. कालिदास जीवन परिचय (Kalidas Biography in Hindi) कालिदास के बचपन तथा मां-बाप के विषय में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है. एक मत यह है कि छठी शताब्दी में कुमारदास के राज्यकाल में लंका में इनका देहांत हुआ था. एक किंवदंती के अनुसार कालिदास उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के दरबार के नवरत्नों…

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पेरिस्कोप (Periscope) एक ऐसा दूरवीक्षक यंत्र है जो अपारदर्शी परदों के पीछे छिपी वस्तुओं को देखने के काम आता है. इसका उपयोग जल और थल युद्ध और पनडुब्बियों में है. इसके द्वारा सैनिक समुद्र के अंदर से कवच या बख्तर (बंदगाड़ी) में से धरती पर होते हुए युद्ध का या अपने चारों तरफ के वातावरण को देख सकते हैं. इसके द्वारा पनडुब्बियों में से समुद्री लड़ाई को देखा जा सकता है. युद्ध में यह बहुत ही उपयोगी यंत्र है. पेरिस्कोप किस सिद्धांत के अनुसार काम करता है? यह यंत्र दो समानांतर समतल दर्पणों से प्रकाश के परावर्तन के सिद्धांत पर…

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क्वाईज (Quartz) प्रकृति से सबसे अधिक मात्रा में मिलने वाला खनिज पदार्थ है. अधिकतर चट्टानें इसी से बनी हैं. यह शुद्ध कायांतरित और तलछटी चट्टानों का मुख्य हिस्सा है. यह वास्तव में सिलिकान (Silicon) और आक्सीजन का विशेष यौगिक है. शुद्ध क्वार्ट्ज में सिलिका और सिलिकान डाइआक्साइड होते हैं. क्वार्ट्ज देखने में कांच की तरह पारभासी होता है. यह बिल्कुल कांच जैसा लगता है. और कांच की भांति ही भुरभुरा होता है, लेकिन यह कांच से सख्त होता है और इसके पिघलने का तापमान भी कांच से बहुत अधिक होता है. इसे कांच की तरह पिघलाकर नलिकाएं, चादरें और चौकोर…

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दुनिया का सबसे खतरनाक जानवर जैलीफिश (Jellyfish) है. इसे समुद्री वास्प (Sea Wasp) और चिरोनेक्स फ्लेकरी (Chironex Fleckeri) भी कहते हैं. इसके शरीर से अनेक मोटे धागे जैसे अंग निकले होते हैं. इनके द्वारा ही वह दूसरी वस्तुओं या जीवों को छूता, पकड़ता और खाता है. इन्हें स्पर्श अंग या टेंटेकल्स (Tentacles) कहते हैं. कोई भी व्यक्ति यदि इसके शरीर से निकले टेंटेकल (Tentacles) से रगड़ खा जाए तो पांच मिनट के अंदर-अंदर मर जाता है. इसके टेंटाकलों में हजारों बहुत महीन रोएं होते हैं, जो व्यक्ति के शरीर में चुभकर कोबरा सांप के जहर से भी तेज जहर पहुंचा…

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Hollywood

हॉलीवुड (Hollywood) संसार का वह प्रसिद्ध स्थान है, जहां राज्य अमेरिका के चलचित्र और दूरदर्शन उद्योगों के अधिकतर स्टूडियो और आफिस स्थित यह कैलीफोर्निया राज्य के लॉस एंजेल्स नामक स्थान के उत्तर-पश्चिम में है. फिल्म उद्योग के लिए यह बहुत ही उपयुक्त स्थान है. यहां प्रायः धूप भरे दिन होते हैं जिससे यहां का मौसम बहुत सुहाना और प्राकृतिक दृश्य बहुत हो सुंदर लगते हैं. सन् 1908 में यहां पहली फिल्म ‘दि काउंट ऑफ मोंटे क्रिस्टो’ बनाई गई. इस फिल्म की शूटिंग शिकागो में हुई थी. सन् 1911 तक हॉलीवुड में लगभग 15 फिल्म बनाने वाली कंपनियां बन गई थीं.…

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