मोटरगाड़ी एक अपने आप आगे बढ़ने वाली गाड़ी है. पेट्रोल, डीजल या विद्युत धारा इंजन (Engine) को चलने के लिए बल प्रदान करती है. मोटरगाड़ियों के वे इंजन, जिनमें पेट्रोल या डीजल ईंधन के रूप में प्रयोग होता है, अंतर-दहन इंजन कहलाते हैं. अंतर-दहन इंजन वे इंजन हैं, जिनके सिलेंडर के अंदर ही ईंधन जलता है. विद्युत इंजन में एक मोटर और गीयर बॉक्स होता है. मोटर को शक्ति बैटरी से प्राप्त होती है. अधिकतर मोटरगाड़ियों में शक्ति-स्रोत के रूप में पेट्रोल इंजन प्रयोग में लाया जाता है. कुछ गाड़ियों में डीजल इंजन भी लगा होता है. डीजल इंजन पेट्रोल…
Author: Shailja Dubey
शक्तिशाली विद्युत जेनरेटरों से तांबे और एल्युमिनियम के तारों द्वारा हम अपने घरों, फैक्टरियों, स्कूलों और गोदामों आदि में बिजली पहुंचाते हैं. विद्युत घरों में कोयला जलाकर या ऊंचाई से पानी गिराकर या नाभिकीय क्रियाओं द्वारा बिजली बनाई जाती है. विद्युत-घर आमतौर पर उन स्थानों पर बनाए जाते हैं, जहां बिजली पैदा करना सस्ता पड़ता है. इन विद्युत-घरों से ही तारों द्वारा बिजली हमारे शहरों और गांवों तक भेजी जाती है. आमतौर पर विद्युत-संचरण के लिए दो तारों की आवश्यकता होती है. बिजली तारों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक कैसे जाती है? विद्युत का क्षय रोकने के लिए…
कार, बस या ट्रक का गति (वेग) ज्ञात करने के लिए जो यंत्र प्रयोग होता है, उसे वेगमापी (Speedo-meter) कहते हैं. सभी मोटरगाड़ियों में यह यंत्र चालक के सामने पेनल पर लगा होता है. यह गाड़ी का वेग किलोमीटर प्रति घंटा या मील प्रति घंटा में प्रदर्शित करता है. गाड़ी का गति यंत्र के डायल पर लगे संकेतक द्वारा प्रदर्शित होता है. डायलों पर 0 से 100 तक के अंक लिखे होते हैं. संकेतक जिस अंक तक आता है, वही मोटरगाड़ी का वेग होता है. अधिकतर वेगमापियों में एक ओडोमीटर (Odometer) भी होता है, जो गाड़ी द्वारा तय की गई…
क्रेन (Crane) एक ऐसी मशीन है, जो भारी बोझ उठाने के काम आती है. यह मशीन मुख्यतौर पर भवन और पुल-निर्माण में भारी बोझों को उठाने, ऊंचाई तक पहुंचाने और इधर-उधर खिसकाने के काम आती है. इस मशीन की बनावट लंबी गर्दन वाले सारस (Crane) पक्षी से मिलती है, इसीलिए इसका नाम क्रेन रखा गया. यद्यपि क्रेन का इस्तेमाल प्राचीन काल से ही होता आ रहा है, लेकिन इसका आम इस्तेमाल 19वीं शताब्दी में भाप के इंजन, पेट्रोल-इंजन तथा विद्युत मोटरों के विकास के बाद ही हुआ. मूलरूप से क्रेन दो प्रकार की होती हैं: 1. स्थिर तथा 2. गतिशील.…
सापेक्षिता का सिद्धांत (Theory of Relativity) से वस्तुओं की गति से संबंध रखता है. संक्षेप में यह सिद्धांत निरपेक्ष गति तथा निरपेक्ष त्वरण के अस्तित्व की असंभावना स्थापित करता है. इस सिद्धांत का प्रतिपादन 20वीं सदी के आरंभ में जर्मनी के प्रसिद्ध वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टीन (Albert Einstein) ने किया था. इस के दो पक्ष हैं. पहले पक्ष को विशिष्ट सिद्धांत (Special Theory of Relativity) कहते हैं. यह सन् 1905 में प्रतिपादित किया गया था. दूसरे पक्ष का व्यापक सिद्धांत (General Theory of Relativity) कहते हैं. यह सन् 1915 में प्रतिपादि किया गया था. सापेक्षिता का विशिष्ट सिद्धांत वस्तुओं की गति…
बाइनाकुलर दूर की वस्तुओं को बड़े आकार में दिखाने वाला यंत्र है, इसमें दोनों आंखों से देखा जाता है बाइनाकुलर्स (Binoculars) या दूरबीन एक प्रकार के दूर- बा दर्शियों का जोड़ा होता है, जो एक ही फ्रेम में लगा रहता है. यह दूर की वस्तुओं को नजदीक और आवर्द्धित करके दिखाता है. बाइनाकुलर्स में लगे दोनों दूरदर्शी एक जैसे होते हैं और प्रत्येक दूरदर्शी एक आंख के लिए होता है. प्रत्येक दूरदर्शी एक कीप के आकार की नली जैसा होता है. इसमें एक अभिदृश्यक लेंस और एक नेत्रिका लेंस होता है. अभिदृश्यक लेंस वस्तु की ओर रखा जाता है और…
पेट्रोल ऊर्जा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत होने और बहुत तरह के कार्यों में इस्तेमाल होने के कारण पूरे संसार आज सबसे अधिक आवश्यक वस्तु बन गया है. लेकिन क्या आपको पता है कि पेट्रोल क्या है और इसका उत्पादन कैसे किया जाता है? पेट्रोल, हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbon) का एक पेंचीदा मिश्रण है जो कि भूमि के नीचे से कुंआ खोद कर निकाला जाता है. यह प्रायः द्रव या गैस के रूप में मिलता है. वैज्ञानिकों द्वारा कहा जाता है कि हजारों-लाखों वर्ष पूर्व पृथ्वी के जो पेड़-पौधे और जीवधारी दलदल के नीचे दब गए थे. उन्होंने धरती के दबाव तथा…
अम्ल (Acid) या तेजाब ऐसे पदार्थ हैं, जिनका स्वाद खट्टा होता है, तथा ये नीले लिटमस को लाल कर देते हैं. कुछ धातुओं के साथ क्रिया करके ये हाइड्रोजन गैस बनाते हैं. क्षारों के साथ क्रिया करके ये लवण बनाते हैं. अम्ल मुख्य रूप से दो प्रकार के होते है: अकार्बनिक अम्ल और कार्बनिक अम्ल. कार्बनिक अम्लों में विशेषकर कार्बन होता है और अकार्बनिक अम्लों में कार्बन नहीं होता. कोई भी अम्ल पानी में घुलने पर हाइड्रोजन आयन पैदा करता है. नमक गंधक और शोरे के अम्ल अकार्बनिक अम्लों की श्रेणी में आते हैं. ये बहुत ही तेज अम्ल हैं.…
मिस्र की राजधानी काहिरा (Cairo Capital of Egypt) से लगभग 12 किमी. की दूरी पर, रेगिस्तान में स्फिंक्स (egyptian sphinx) की विशाल मूर्ति विराजमान है. ऐसा लगता है, जैसे यह गीजा के तीन पिरामिडों (3 pyramids of giza) की चौकीदारी कर रही हो. एक समय था, जब यह केवल चट्टान थी और गीजा के पिरामिडों के निर्माण के समय इसे चट्टान के रूप में ही छोड़ दिया गया था. बाद में शिल्पकारों ने इसे शेर की मूर्ति के रूप में तराश कर तैयार किया. इसका सिर आदमी के सिर के समान है. इसकी आंखें अत्यंत रहस्यपूर्ण हैं. यह रेगिस्तान की ओर…
सूर्य के रंगहीन प्रकाश को यदि किसी प्रिज्म में से गुजारा जाए तो यह सात रंगों में विभाजित हो जाता है, ये सात रंग हैं- बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, नारंगी और लाल. सात रंगों की इस पट्टी को वर्णक्रम या स्पैक्ट्रम कहते हैं. प्रकाश की ये किरणें तरंगों के रूप में यात्रा करती हैं. इन तरंगों को विद्युत-चुंबकीय तरंगें कहते हैं. ये तरंगें कंपनों के फलस्वरूप पैदा होती हैं. प्रत्येक रंग की अलग- अलग आवृत्ति (Frequency) होती है. आवृत्ति को हर्ट्ज (Hertz) इकाई में मापा जाता है. यदि कोई वस्तु एक सेकेंड में एक कंपन करती है, तो उसकी आवृत्ति…
पनामा नहर के कारण अमेरिका के एक समुद्र तट से दूसरे तट तक की दूरी में 8,000 नाटिकल मील की कमी हो गई है पनामा और स्वेज नहर संसार के दो प्रसिद्ध कृत्रिम जालमार्ग हैं. इन दोनों में पनामा नहर अधिक महत्वपूर्ण है. यह एक अंतरसागरीय जलमार्ग है, जो अंधमहासागर और प्रशांत महासागर को एक दूसरे से जोड़ता है. पनामा नहर लगभग 82 किमी. (51 मील) लंबी है. यह संयुक्त राज्य अमेरिका के अधिकार में है और इसका संचालन इसी देश के द्वारा होता है. नहर के दोनों सिरों पर छोटे सागरीय स्तर के दो भाग हैं, जहाजों को समुद्री…
कन्फ्यूशियस (551-479 ईसा पूर्व) प्राचीन चीन का एक महान विचारक और नैतिक गुरु थे आज से ढाई हजार वर्ष पूर्व जब महात्मा बुद्ध और जैन तीर्थंकर महावीर अपने-अपने धर्मसूत्रों का प्रचार भारत में कर रहे थे, लगभग उसी काल में, संत कन्फ्यूशियस चीन में धर्म की पुनर्स्थापना करने का प्रयास कर रहे थे. इसे एक विडंबना ही माना जाएगा कि जहां जैन और बौद्ध धर्म को भारत में तत्काल मान्यता प्राप्त हुई, कन्फ्यूशियस के धर्म को मान्यता लगभग 500 वर्ष बाद मिली. कन्फ्यूशियस अपने समय के महान नैतिकवादी विचारक और समाज-सुधारक थे. विश्व के चोटी के दार्शनिकों में उनकी गणना…
चंद्रगुप्त मौर्य और मौर्य साम्राज्य के बारे में जानें, जो भारत का पहला शक्तिशाली साम्राज्य था। आचार्य चाणक्य और अशोक महान जैसे महान व्यक्तियों के योगदान के बारे में भी जानें।
आज कल बाजार में मिलने वाले मसलों का शुद्ध होने पर विश्वास करना बडा मुुश्किल है हम आपको कुछ ऐसे घरेलू तरीके बता रहे हैं जिससे आप खुद से मसलों की शुद्धता की जांच कर सकते हैं: हल्दी पाउडर शुद्ध हल्दी हल्के पीले रंग की होती है। अगर हल्दी पाउडर को पानी में डालने पर उसका रंग जल्दी गायब हो जाए, तो वह मिलावटी हो सकती है। धनिया पाउडर अगर धनिया पाउडर से खुशबू नहीं निकलती, तो इसमें मिलावट हो सकती है। असली धनिया की महक काफी तेज होती है। लाल मिर्च पाउडर लाल मिर्च पाउडर में अगर डाई कलर,…
मध्य प्रदेश अपनी ऐतिहासिक संस्कृति व ऐतिहासिक खजानों में भी भारत के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक है। मध्य प्रदेश में भारतीय ऐतिहासिक संस्कृति के अनेक अवशेष, जिनमें पाषाण चित्र और पत्थर व धातु के औजार शामिल हैं, नदियों, घाटियों और अन्य इलाकों में मिले हैं। वर्तमान मध्य प्रदेश का सबसे प्रारम्भिक अस्तित्वमान राज्य अवंति था, जिसकी राजधानी उज्जैन थी। इसी तरह भारत का इतिहास, मध्य प्रदेश से बहुत मजबूती से जुड़ा हुआ है। चलिए आज हम मध्य प्रदेश के उन्हीं इतिहास से जुड़े किलों की समृद्धि की झलक देखते हैं, जिनकी वजह से भारत का इतिहास पूरी दुनिया…
18 वीं शताब्दी में भारत का स्वतंत्र राज्य 1818 से 1947 तक भारत की रियासत 1949 से 1956 तक भारतीय राज्य घने जगलों 1956 में मप्र की राजधानी 1972 में सीहोर से अलग हो स्वतंत्र जिला बना। भोपाल, लंबे समय तक महाकौतार का हिस्सा था, जो घने जगलों और पहाड़ियों से घिरा था। जो नर्मदा द्वारा उत्तर, दक्षिण से उत्तर से अलग करते हुए रेखांकित है। यहां दसवीं शताब्दी में राजा भोज, उनके बाद गौरी, गौंड और भोपाल के नवाबों के कब्जे में रहा। 18 वीं शताब्दी में अंग्रेजों से समझौते के बाद इसका अलग संविधान बना। आजादी के दो…
मध्य प्रदेश संस्कृति, साहित्य, शौर्य, वीरता व भक्ति से समृद्ध है। प्रदेश की मिट्टी में कई महान राजाओं, साहित्यकारों व विद्वानों ने जन्म लिया और मध्य प्रदेश का नाम विश्व पटल में रोशन किया है। मध्य प्रदेश में साहित्य अति प्राचीन काल से फलता फूलता रहा है। यहां के साहित्य ने न केवल रचना काल बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को जीवन जीने की राह दिखाई है। प्राचीन काल के अलावा भी मध्य प्रदेश में कई श्रेष्ठ कवियों का जन्म हुआ, जिन्होंने अपनी रचनाओं से जनमानस को दिशा दिखाई। इन कवियों की रचनाओं में प्रदेश की संस्कृति, कला, वीरता और भक्ति…
पूर्व-उत्तर भारत की सात बहनों की पड़ोसन सिक्किम कुदरत की एक अनोखी देन है। ऊंची-ऊंची पर्वत श्रृंखला, नदियों में दूर-दूर तक दिल्ली स्फटिक की तरह झक सफेद बर्फ की चादर, आवारा घूमते बादल, पेड़ और हरीतिमा की चादर ओढ़े पर्वत, पहाड़ की ऊंचाई से झर-झर झरता झरना, किसी नागिन-सी बलखाती नदी की टेढ़ी-मेढ़ी धारा सिक्किम को वह प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करता है जो दिलो-दिमाग को सुकून पहुंचा दे। प्रकृति ने सिक्किम को ऐसा रूप दिया है कि इसे ‘पृथ्वी का स्वर्ग कहा जाता है। सिक्किम की राजधानी गंगटोक के निकटतम हवाई अड्डा बागडोगरा से सड़क मार्ग द्वारा गंगटोक जाने की…
आर्यों का मूल निवास स्थान आर्यों के भारत आगमन के साथ भारतीय इतिहास में नया मोड़ आया। ऋग्वेद में ‘दक्षिणापथ’ और ‘रेवांतर’ शब्दों का प्रयोग किया गया।इतिहासकार डैवर के मत से आयाँ को नर्मदा और उसके प्रदेश की जानकारी थी। आर्य पंचनद प्रदेश (पंजाब) से अन्य प्रदेश में गए। महर्षि अगस्त (Maharishi Agastya Muni) के नेतृत्व में यादवों का एक कबीला इस क्षेत्र में आकर बस गया। इस तरह इस क्षेत्र का आयीकरण प्रारंभ हुआ। शतपथ ब्राहम्ण के अनुसार विश्वामित्र के 50 शापित पुत्र यहां आकर बसे। कालांतर में अत्रि, पाराशर, भारद्वाज, भार्गव आदि भी आए। लोकमान्य तिलक तथा स्वामी दयानंद ने…
गुजरात की भौगोलिक स्थिति गुजरात राज्य 21°1′ उत्तरी अक्षांश से 24°7′ उत्तरी अक्षांश एवं 68°4′ पूर्वी देशांतर से 74°4′ पूर्वी देशांतरों के बीच स्थित है। यह राज्य भारत के पश्चिमी समुद्र तट के उत्तरी सिरे पर स्थित है। इसमें तीन भौगोलिक क्षेत्र हैं- 1. सौराष्ट्र प्रायद्वीप- यह मुख्यतः पहाड़ी क्षेत्र है। इसमें बीच-बीच में मध्यम दर्जे के पर्वत हैं। 2. कच्छ के पूर्वोत्तर में उजाड़ एवं चट्टानी क्षेत्र हैं। कच्छ का प्रसिद्ध रण इसी क्षेत्र में है। 3. मुख्य भूमि क्षेत्र जो कच्छ और अरावली की पहाड़ियों से लेकर दमन गंगा तक फैला है। राज्य में साबरमती, माही, नर्मदा, ताप्ती,…
उत्तरी मैदान में नदी मार्गों ने जलोढ़ राशि को तोड़कर अपने लिए पार्श्व में वप्र जिन्हें स्थानीय निवासियों की भाषा में धाया कहते हैं। शिवालिक की पहाड़ियों में बड़ी संख्या में खड्डे मिलते हैं। इन खड्डों को वहां के लोग ‘चो’ कहते हैं। गंगा का मैदान गंगा का मैदान उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिमी बंगाल तक विस्तृत है। इसका डेल्टाई विश्व में सबसे बड़ा डेल्टा है। गंगा तथा इसकी सहायक नदियों की निपेक्ष क्रिया द्वारा यह मैदान बना है। दक्षिण पठार से निकलने वाली नदियों (चम्बल, बेतवा, केन तथा सोन) ने भी इस मैदान के निर्माण में अपना योगदान दिया…





















