MP Teacher Transfer News: मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की ट्रांसफर पॉलिसी जारी कर दी है और 8 जून से पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के बीच एक बार फिर अतिशेष शिक्षकों की समस्या चर्चा में आ गई है। विभागीय ट्रांसफर नीति में ऐसे शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर किसी स्पष्ट नियम का उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में अतिशेष शिक्षकों के ट्रांसफर अटकने की आशंका जताई जा रही है।
क्या होते हैं अतिशेष शिक्षक?
अतिशेष शिक्षक वे होते हैं, जो किसी सरकारी स्कूल में स्वीकृत पदों या निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात की तुलना में आवश्यकता से अधिक संख्या में पदस्थ हो जाते हैं। यह स्थिति विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में देखने को मिलती है।
शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ कई शिक्षक विभिन्न माध्यमों से अपना तबादला शहरी क्षेत्रों में कराने में सफल हो जाते हैं। इससे शहरों के स्कूलों में शिक्षकों की संख्या बढ़ जाती है, जबकि ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की कमी की समस्या बनी रहती है।
ट्रांसफर पॉलिसी में नहीं मिला स्पष्ट प्रावधान
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अतिशेष शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी होने के बाद किया जाएगा। हालांकि, पिछले वर्ष भी इसी तरह का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उसके बाद युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस बार भी अतिशेष शिक्षक स्थानांतरण से वंचित रह जाएंगे।
ट्रांसफर प्रक्रिया में अधिकारियों की भूमिका अब भी स्पष्ट नहीं
शिक्षकों के तबादलों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और संयुक्त संचालक शिक्षा की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, अभी तक यह तय नहीं किया गया है कि स्थानांतरण संबंधी निर्णय जिला स्तर पर होंगे या आवेदन के बाद पूरी प्रक्रिया सीधे भोपाल स्तर से संचालित की जाएगी। इससे शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
ये शिक्षक नहीं कर पाएंगे ट्रांसफर के लिए आवेदन
शिक्षा विभाग की ट्रांसफर पॉलिसी के तहत कुछ श्रेणियों के शिक्षकों को आवेदन की पात्रता से बाहर रखा गया है। इनमें शामिल हैं—
- ऐसे शिक्षक जिनकी ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत से कम है।
- जिन शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाई गई है, उनके तबादले नहीं किए जाएंगे।
इन प्रावधानों को देखते हुए माना जा रहा है कि इस बार सीमित संख्या में ही शिक्षकों के ट्रांसफर हो पाएंगे।
पसंदीदा स्थान पर तबादले के लिए बढ़ी सक्रियता
ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही कई शिक्षक अपनी पसंद के स्थान पर पदस्थापना सुनिश्चित करने के प्रयासों में जुट गए हैं। विभागीय कार्यालयों से लेकर भोपाल स्तर तक संपर्क साधे जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ शिक्षक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, जबकि कुछ प्रभारी मंत्रियों और अन्य जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी अनुशंसा कराने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या है सबसे बड़ी चुनौती?
शिक्षा व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है। यदि अतिशेष शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से नहीं होती, तो एक ओर शहरों के स्कूलों में आवश्यकता से अधिक शिक्षक बने रहेंगे, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।
