Thursday, 11 June

भोपाल। मध्य प्रदेश में तबादला सीजन के बीच पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृहग्राम या ससुराल की ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। इसके अलावा यदि किसी पंचायत में सचिव का रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच निर्वाचित हो जाता है, तो संबंधित सचिव का वहां से स्थानांतरण अनिवार्य रूप से किया जाएगा।

विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार यह निर्णय प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने और हितों के टकराव (Conflict of Interest) की संभावनाओं को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। इस संबंध में सभी जिलों के कलेक्टरों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) को आवश्यक दिशा-निर्देश भेज दिए गए हैं।

15 जून तक पूरी होगी तबादला प्रक्रिया

9 जून को जारी आदेश के अनुसार जिले के भीतर पंचायत सचिवों के स्थानांतरण 15 जून तक किए जा सकेंगे। विभागीय निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि स्थानांतरण प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अनुशंसा और जिले के प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद ही जारी किए जाएंगे।

हालांकि यह पूरी प्रक्रिया 1 जून से प्रभावी मानी जाएगी। पंचायत सचिवों के तबादले से संबंधित अंतिम आदेश जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी किए जाएंगे।

किन परिस्थितियों में होगा अनिवार्य तबादला?

नई गाइडलाइन में कुछ ऐसी स्थितियों का उल्लेख किया गया है, जिनमें पंचायत सचिवों का स्थानांतरण अनिवार्य रूप से किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • यदि किसी ग्राम पंचायत में सचिव का कोई रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच निर्वाचित हो जाता है।
  • पंचायत सचिव को उसके पैतृक गांव की ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं रखा जाएगा।
  • सचिव को उसकी ससुराल स्थित ग्राम पंचायत में भी पदस्थापना नहीं दी जाएगी।
  • जो पंचायत सचिव एक ही ग्राम पंचायत में लगातार 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किया जाएगा।
  • यदि 10 वर्ष या उससे अधिक समय से पदस्थ सचिवों की संख्या निर्धारित तबादला सीमा से अधिक होती है, तो सबसे अधिक अवधि से उसी पंचायत में कार्यरत सचिव का पहले स्थानांतरण किया जाएगा।

जिला और अंतरजिला तबादलों की भी तय हुई प्रक्रिया

विभाग ने नई गाइडलाइन में जिला स्तर के साथ-साथ अंतरजिला स्थानांतरण की प्रक्रिया भी स्पष्ट कर दी है। इससे तबादलों में एकरूपता आने और प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी मामलों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि स्थानांतरण प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो।

प्रदेश में 23 हजार से अधिक पंचायत सचिव

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में वर्तमान में 23 हजार से अधिक पंचायत सचिव कार्यरत हैं। नई गाइडलाइन का प्रभाव बड़ी संख्या में ऐसे सचिवों पर पड़ सकता है, जो लंबे समय से एक ही पंचायत में पदस्थ हैं या जिनकी पदस्थापना गृहग्राम अथवा ससुराल क्षेत्र में है।

विभागीय स्तर पर माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से पंचायतों में प्रशासनिक निष्पक्षता को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर संभावित पक्षपात से जुड़े मामलों पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।

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