मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्वदेशी और शुद्धता के दावों के बीच पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को बड़ा कानूनी झटका लगा है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत हुई कार्रवाई में एडीएम कोर्ट ने पतंजलि के पैकेटबंद दलिया के एक नमूने को ‘मिसब्रांडेड’ मानते हुए कंपनी, उसके नामित अधिकारी, सप्लायर, स्थानीय वितरक और रिटेलर समेत पूरी सप्लाई चेन पर कुल 3.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। मामला नवंबर 2022 में लिए गए सैंपल और उसके बाद हुई प्रयोगशाला जांच से जुड़ा है, जिसमें पैकेट पर अनिवार्य पोषण संबंधी जानकारी नहीं मिलने की पुष्टि हुई।
साढ़े तीन साल पुरानी जांच का आया फैसला
मामले की शुरुआत 17 नवंबर 2022 को हुई थी, जब छतरपुर के सागर रोड स्थित बगौता तिराहा क्षेत्र में एक किराना दुकान पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान टाटा टी अग्नि और पतंजलि दलिया (500 ग्राम पैक) के नमूने लेकर राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजे गए।
जांच रिपोर्ट में टाटा टी का नमूना मानकों के अनुरूप पाया गया, जबकि पतंजलि दलिया को “मिसब्रांडेड” घोषित किया गया। इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया, जिसकी सुनवाई के बाद अब फैसला आया है।
आखिर दलिया का सैंपल फेल क्यों हुआ?
प्रयोगशाला रिपोर्ट के अनुसार, दलिया के पैकेट पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेबलिंग एवं डिस्प्ले) विनियम, 2020 के तहत आवश्यक पोषण संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं की गई थी।
खाद्य उत्पादों पर न्यूट्रिशन संबंधी जानकारी केवल औपचारिकता नहीं मानी जाती, बल्कि यह उपभोक्ता के अधिकारों से जुड़ा विषय है। इससे ग्राहक यह समझ पाता है कि उत्पाद में कैलोरी, प्रोटीन, वसा और अन्य पोषक तत्व कितनी मात्रा में मौजूद हैं। अदालत ने माना कि ऐसी जानकारी का अभाव नियमों का उल्लंघन है और इससे उपभोक्ता को आवश्यक जानकारी से वंचित किया जाता है।
अदालत ने क्यों खारिज की कंपनी की दलील?
सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से कहा गया कि 6 जनवरी 2023 से गेहूं के टूटे स्वरूप यानी दलिया को न्यूट्रिशन लेबलिंग की अनिवार्यता से छूट दी जा चुकी है, इसलिए कार्रवाई उचित नहीं है।
हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि जिस समय नमूना लिया गया था, उस समय यह छूट लागू नहीं थी। इसलिए मामले का मूल्यांकन उसी समय प्रभावी नियमों के आधार पर किया जाएगा। अदालत के अनुसार बाद में नियमों में हुए बदलाव पहले से हुए उल्लंघन को समाप्त नहीं कर सकते।
किस पर कितना जुर्माना लगा?
न्यायालय ने मामले में शामिल सभी पक्षों की जिम्मेदारी तय करते हुए अलग-अलग राशि का अर्थदंड लगाया है:
- पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड (विनिर्माता) – ₹1,00,000
- कंपनी के नामित अधिकारी एस. परणीत राजन – ₹1,00,000
- सप्लायर रविकांत दुबे (स्वदेशी ट्रेड लिंक, झांसी) – ₹50,000
- स्थानीय कारोबारी संजय कुमार अग्रवाल – ₹50,000
- किराना व्यवसायी संदीप विश्वकर्मा – ₹20,000
- किराना व्यवसायी कृष्ण कुमार विश्वकर्मा – ₹20,000
कुल अर्थदंड की राशि 3 लाख 40 हजार रुपये निर्धारित की गई है।
इस फैसले से बड़ा संदेश
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत ने केवल निर्माता कंपनी को ही जिम्मेदार नहीं माना, बल्कि उत्पाद के बाजार तक पहुंचने वाली पूरी सप्लाई चेन की जवाबदेही तय की। खाद्य सुरक्षा मामलों में यह दृष्टिकोण उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, खाद्य उत्पादों में गुणवत्ता के साथ-साथ सही लेबलिंग भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि पैकेट पर दी गई जानकारी अधूरी या भ्रामक है तो उसे भी खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में रखा जा सकता है।
पहले भी विवादों में रही है पतंजलि
पिछले कुछ वर्षों में पतंजलि और उससे जुड़े उत्पाद विभिन्न नियामकीय और न्यायिक जांचों का सामना करते रहे हैं। अलग-अलग मामलों में भ्रामक विज्ञापन, लेबलिंग और उत्पाद संबंधी दावों को लेकर अदालतों और नियामक संस्थाओं ने कार्रवाई की है।
