भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद शुक्रवार को भारतीय मुद्रा में उल्लेखनीय मजबूती दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 81 पैसे चढ़कर 94.93 पर बंद हुआ। RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखते हुए विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए कई कदमों की घोषणा की। बाजार ने इन संकेतों को सकारात्मक माना, जिसके चलते दिनभर रुपये में खरीदारी देखने को मिली।
रेपो रेट में बदलाव नहीं, लेकिन संदेश बड़ा
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए बताया कि छह सदस्यीय समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का फैसला किया है। साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपना नीतिगत रुख “न्यूट्रल” बनाए रखा है। यह लगातार तीसरा मौका है जब RBI ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
केंद्रीय बैंक का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक सप्लाई चेन पर बढ़ता दबाव आने वाले महीनों में महंगाई और आर्थिक वृद्धि दोनों को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से RBI ने फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है।
कारोबार के दौरान 94.89 तक पहुंचा रुपया
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.72 के स्तर पर खुला और कारोबार के दौरान 94.89 तक मजबूत हुआ। अंततः यह 94.93 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे एक दिन पहले रुपया 95.74 पर बंद हुआ था।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक RBI और केंद्र सरकार द्वारा विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों ने बाजार का भरोसा बढ़ाया है। निवेशकों को संकेत मिला है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों का सामना करने की स्थिति में है।
2013 के बाद डॉलर आकर्षित करने की सबसे बड़ी कवायद
वित्तीय बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और RBI मिलकर विदेशी डॉलर प्रवाह बढ़ाने के लिए व्यापक रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसमें लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड्स को विदेशी निवेशकों के लिए अधिक सुलभ बनाना, निवेश संबंधी कुछ प्रतिबंधों में ढील देना और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए विशेष विदेशी मुद्रा सुविधाएं शामिल हैं।
यही वजह है कि रुपये में अचानक आई मजबूती को केवल एक दिन की तकनीकी तेजी नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पूंजी प्रवाह आधारित समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
विदेशी मुद्रा भंडार ने बढ़ाया भरोसा
RBI के अनुसार 29 मई 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 682.3 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह भंडार लगभग 11 महीने के आयात खर्च को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
आर्थिक जानकारों के मुताबिक मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार ही वह कारण है जिसके चलते RBI फिलहाल ब्याज दरें बढ़ाने के बजाय अन्य उपायों से रुपये को सहारा देने की रणनीति अपना रहा है।
महंगाई बढ़ने की आशंका, विकास दर का अनुमान घटा
जहां रुपये को समर्थन देने के लिए कदम उठाए गए हैं, वहीं RBI ने अर्थव्यवस्था के लिए कुछ चेतावनी संकेत भी दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया है। दूसरी ओर GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है।
इस बदलाव से साफ है कि RBI को आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है, जबकि वैश्विक परिस्थितियां आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं और विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ता है, तो रुपया आने वाले हफ्तों में 94 से 94.50 प्रति डॉलर के दायरे तक मजबूत हो सकता है। हालांकि इससे आगे की मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि RBI की नई नीतियों से भारत में वास्तव में कितना विदेशी पूंजी निवेश आता है।

