नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा हाल ही में प्रदर्शित एथेनॉल आधारित कुकिंग स्टोव (Ethanol Stove) चर्चा का विषय बन गया है। भारत में बढ़ती ऊर्जा मांग, रसोई गैस पर निर्भरता कम करने की कोशिशों और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की नीति के बीच यह मॉडल सामने आया है। गडकरी ने दावा किया कि एथेनॉल आधारित चूल्हा घरेलू उपयोग के लिए एक वैकल्पिक और पर्यावरण-अनुकूल समाधान बन सकता है। इस प्रस्तुति के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या भविष्य में यह तकनीक LPG सिलेंडर का विकल्प बन पाएगी।
आखिर क्या है Ethanol Stove?
एथेनॉल स्टोव ऐसा खाना पकाने का उपकरण है जो पेट्रोलियम गैस की बजाय एथेनॉल ईंधन का उपयोग करता है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसे जैव ईंधन (Biofuel) की श्रेणी में रखा जाता है।
सरकार पिछले कुछ वर्षों से वाहनों में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है। अब इसी ईंधन के घरेलू उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा तेज हुई है।
नितिन गडकरी ने क्या कहा?
एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने एथेनॉल आधारित कुकिंग स्टोव का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि भारत के किसान ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से कृषि अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिल सकता है।
गडकरी का कहना है कि वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने से आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटेगी और देश के ऊर्जा खर्च पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
भारत दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ता देशों में शामिल है। घरेलू रसोई गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार लंबे समय से वैकल्पिक और स्वदेशी ईंधन विकल्पों की तलाश में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एथेनॉल आधारित कुकिंग तकनीक व्यावसायिक स्तर पर सफल होती है तो इससे तीन बड़े क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है:
- ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था
- स्वच्छ ऊर्जा अभियान
- आयातित ईंधन पर निर्भरता
हालांकि फिलहाल यह तकनीक शुरुआती चरण में है और इसके बड़े पैमाने पर उपयोग को लेकर कई व्यावहारिक सवाल बने हुए हैं।
क्या यह LPG की जगह ले सकता है?
फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है कि एथेनॉल स्टोव LPG सिलेंडर को पूरी तरह प्रतिस्थापित करेगा। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए ईंधन मॉडल की सफलता उसकी उपलब्धता, लागत, सुरक्षा मानकों और वितरण नेटवर्क पर निर्भर करती है।
यानी मौजूदा समय में इसे LPG के तत्काल विकल्प के रूप में नहीं देखा जा सकता, लेकिन भविष्य में यह पूरक ईंधन व्यवस्था का हिस्सा बन सकता है।
किसानों को कैसे हो सकता है फायदा?
भारत सरकार लंबे समय से एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। यदि घरेलू ऊर्जा क्षेत्र में भी एथेनॉल की मांग बढ़ती है तो गन्ना, मक्का और अन्य फीडस्टॉक फसलों की मांग में वृद्धि हो सकती है। इससे किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार होने की संभावना बन सकती है।
आगे क्या?
एथेनॉल स्टोव को लेकर अभी बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रोलआउट, मूल्य निर्धारण या राष्ट्रीय वितरण योजना की घोषणा नहीं हुई है। आने वाले महीनों में सरकार और संबंधित एजेंसियों की ओर से इस तकनीक की व्यवहारिकता, सुरक्षा और आर्थिक प्रभावों पर अधिक जानकारी सामने आ सकती है।
फिलहाल इतना तय है कि एथेनॉल आधारित कुकिंग स्टोव ने भारत में स्वच्छ ऊर्जा, वैकल्पिक ईंधन और घरेलू रसोई के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

