भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय (Barkatullah University) का नाम बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (Executive Council) ने 3 जून को आयोजित बैठक में संस्थान का नाम बदलकर “वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” (Vagdevi Bhojpal University) करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब यह प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति के लिए राज्यपाल एवं कुलाधिपति के पास भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद नाम परिवर्तन से जुड़ी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं शुरू होंगी।
क्या है पूरा मामला?
भोपाल की पहचान रखने वाला बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों में गिना जाता है। कार्यपरिषद की बैठक में विश्वविद्यालय के नाम को बदलकर “वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” करने का प्रस्ताव पारित किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार प्रस्ताव को आवश्यक अनुमोदन के लिए आगे भेज दिया गया है।
यदि राज्यपाल की मंजूरी मिलती है तो विश्वविद्यालय को अपने प्रमाणपत्रों, आधिकारिक दस्तावेजों, वेबसाइट, नामपट्टिकाओं और अन्य प्रशासनिक अभिलेखों में नया नाम लागू करना होगा।
‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ नाम का क्या अर्थ है?
नाम परिवर्तन के प्रस्ताव में दो ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संदर्भ जोड़े गए हैं।
- देवी सरस्वती को वाग्देवी कहा जाता है और इन्हें ज्ञान और विद्या की देवी माना जाता है।
- भोजपाल शब्द भोपाल के ऐतिहासिक नाम से जुड़ा माना जाता है, जिसका संबंध परमार वंश के प्रसिद्ध शासक राजा भोज से बताया जाता है।
यही वजह है कि नए नाम को शिक्षा, ज्ञान और क्षेत्रीय इतिहास से जोड़कर देखा जा रहा है।
बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम कब पड़ा था?
विश्वविद्यालय की स्थापना 1970 के दशक में हुई थी। बाद में वर्ष 1988 में इसका नाम स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी नेता मौलाना बरकतउल्लाह भोपाली के सम्मान में बदलकर बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय रखा गया था। मौलाना बरकतउल्लाह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे थे और विदेश में गठित भारत की अस्थायी सरकार से भी उनका जुड़ाव रहा था।
प्रस्ताव पर शुरू हुई चर्चा
नाम परिवर्तन का प्रस्ताव सामने आने के बाद इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा भी शुरू हो गई है। कुछ पक्ष इसे भोपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि मौलाना बरकतउल्लाह जैसे स्वतंत्रता सेनानी के नाम को बनाए रखा जाना चाहिए।
हालांकि फिलहाल यह केवल कार्यपरिषद द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव है और अंतिम निर्णय राज्यपाल की मंजूरी के बाद ही प्रभावी होगा।
भोपाल और छात्रों पर क्या होगा असर?
नाम परिवर्तन को मंजूरी मिलने पर सबसे अधिक प्रभाव विश्वविद्यालय से जुड़े प्रशासनिक दस्तावेजों और भविष्य में जारी होने वाली डिग्रियों पर पड़ सकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि किसी भी बदलाव को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि विद्यार्थियों और शोधार्थियों को असुविधा न हो।
आगे क्या?
अब सभी की नजर राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्णय पर है। स्वीकृति मिलने के बाद राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन औपचारिक अधिसूचना जारी कर सकते हैं। इसके बाद ही “Barkatullah University New Name” आधिकारिक रूप से लागू माना जाएगा।
प्रमुख बातें एक नजर में
- कार्यपरिषद ने नाम परिवर्तन प्रस्ताव पारित किया।
- नया प्रस्तावित नाम: वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय।
- अंतिम मंजूरी राज्यपाल एवं कुलाधिपति से मिलना बाकी।
- 1988 में विश्वविद्यालय का नाम मौलाना बरकतउल्लाह के नाम पर रखा गया था।
- मंजूरी मिलने पर दस्तावेजों, डिग्रियों और प्रशासनिक रिकॉर्ड में बदलाव होगा।

