Author: Shailja Dubey

"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल लोगों को सही दिशा देने में कर सकें।" इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। अभी मैं दैनिक अपडेट, मनोरंजन, सामान्य ज्ञान और जीवनशैली समेत अन्य विषयों पर काम कर रही हूं।

औद्योगिक क्रांति के कारण विज्ञान और तकनालॉजी में ही नहीं वरन् अन्य क्षेत्रों में भी बड़े-बड़े परिवर्तन हुए. इन परिवर्तनों के कारण बहुत सी सामाजिक बुराइयों और समस्याओं का भी जन्म हुआ यद्यपि लाखों वर्षों से धरती पर मानव का अस्तित्व रहा है, किन्तु उसके जीवन में अत्यंत महत्त्वपूर्ण परिवर्तन पिछले दो सौ वर्षों से ही हुए हैं. ये परिवर्तन मुख्य रूप से मशीनों के आविष्कार और विकास के परिणामस्वरूप हुए है, मानव इतिहास के इन दो सौ वर्षों के काल को औद्योगिक क्रांति का युग कहा जाता है. इंग्लैंड के औद्योगिक क्रांति की शुरुआत सन् 1750 के आसपास हुई…

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प्राचीनकाल में मनुष्य नदियों का उपयोग सामान और सवारियों को एक स्थान से दूसरे स्थानों को ले जाने लिए करता रहा है. लेकिन नदियों द्वारा केवल उन जगहों तक जाया जा सकता है जहां से वे बहती हुई जाती हैं. मनुष्य नदियों से वहां नहीं जा सकता जहां से वे बहती नहीं हैं, इसलिए मनुष्य ने एक नदी को दूसरी नदी, झील या समुद्र से जोड़ने के लिए नहरें बनाई. नहरें बनाने के अन्य महत्वपूर्ण कारण भी हैं जैसे सिंचाई की व्यवस्था करना, मछलियां पकड़ना, किसी स्थान पर एकत्रित हुए पानी को बाहर निकालना, उन पर नौका विहार का आनन्द…

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चीनी (Sugar) प्रकृति से प्राप्त मिठास पैदा करने वाला ऐसा पदार्थ है, जिसे हम रोज ही प्रयोग करते हैं. यह गन्ने से प्राप्त की जाती है. मानव इसका इस्तेमाल प्राचीन काल से ही करता आ रहा है. गन्ने के अतिरिक्त चीनी हमें ताड़, चुकंदर और मैपिल के रस से भी प्राप्त होती है. दूसरा प्रकृति प्रदत्त मिठास पैदा करने वाला पदार्थ फ्रक्टोज है, जिसमें चीनी से आधी मिठास होती है. यह हमें फलों और शहद से प्राप्त होता है. ग्लूकोज, माल्टोज, लैक्टोज आदि कुछ दूसरे मिठास पैदा करने वाले पदार्थ है, जो हमें प्रकृति से मिलते हैं. ये सभी चीनी…

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अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) ने शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए पुरुषों और महिलाओं के लिए दैनिक  एडेड शुगर या चीनी (Added Sugar) की मात्रा निर्धारित की है। पुरुषों को प्रतिदिन 37.5 ग्राम या 9 चम्मच से अधिक एडेड शुगर (जिसमें 150 कैलोरी होती है) का सेवन नहीं करना चाहिए। महिलाओं को प्रतिदिन 25 ग्राम या 6 चम्मच से अधिक एडेड शुगर (जिसमें 100 कैलोरी होती है) का सेवन नहीं करना चाहिए। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह केवल एडेड शुगर के लिए अनुशंसित मात्रा है। इसमें प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाली शर्करा (शुगर), जैसे कि फलों,…

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विटिलिगो (Vitiligo): त्वचा का रंग छीनने वाली बीमारीविटिलिगो एक त्वचा रोग है जो शरीर के विभिन्न भागों में मेलेनिन (Melanin) के नष्ट होने के कारण सफेद धब्बे बना देता है। यह किसी भी उम्र, लिंग या जाति के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन यह 20 वर्ष से कम आयु के लोगों में सबसे आम है। यह एक गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन यह निश्चित रूप से सामाजिक और भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है। यदि आपको लगता है कि आपको विटिलिगो हो सकता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है। विटिलिगो के लक्षण विटिलिगो के कारण…

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लगभग 600 किस्म के समुद्री जीव ऐसे हैं, जिनके शरीर से प्रकाश पैदा होता है. इनसे पैदा होने वाले प्रकाश को जैविक-संदीप्ति (Bio- Luminescence) कहते हैं. संदीप्ति पैदा करने वाले समुद्री जीवों में मुख्यतः प्रोटोजोआ कोइलेट्रेट्स, पोलीकेक्ट्स, मौलस्क्स, क्रुस्टासींस तथा मछलियों के समूह आते हैं. समुद्रों में पाए जाने वाले बहुत से बैक्टीरिया, जैली फिश (Jelly Fish) स्पोजेंज (Sponges), मक्खियां और केंचुए भी प्रकाश पैदा करते हैं.  विभिन्न समुद्री जीव प्रकाश कैसे पैदा करते हैं? मछलियों तथा दूसरे समुद्री जीवों के गहन अध्ययन से पता चला है कि इन जंतुओं में प्रकाश का उत्सर्जन जटिल रासायनिक क्रियाओं के फलस्वरूप होता…

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जब झीलों या तालाबों की ऊपरी सतह बर्फ के रूप में जम जाती है तब भी निचली सतहों पर पानी नहीं जमता और इसीलिए उसके नीचे जीव जीवित अवस्था में बने रहते हैं ठंडे प्रदेशों में जब वातावरण का तापमान 0° सैल्सियस से कम हो जाता है, तो वहां के तालाबों, झीलों और नदियों का पानी जम जाता है. इस जमे हुए पानी में रहने वाले जीव-जंतु मरते नहीं हैं, इन्हें देखकर हमें आश्चर्य होता है कि ये बर्फ में जिन्दा कैसे रहते हैं. वास्तविकता तो यह है कि इन प्रदेशों में झीलों, तालाबों आदि में पानी की केवल ऊपरी…

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सैप्रोफाइट ऑरकिडस अपना भोजन मृत जीव-जंतुओं के शवों से प्राप्त करते हैं समस्त जंतु वर्ग अपने भोजन के लिए दूसरे जंतुओं पर या पौधों पर निर्भर रहता है. अधिकांश पौधे अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) क्रिया से स्वयं ही बनाते हैं. परंतु बहुत से पौधे ऐसे भी हैं, जो क्लोरोफिल के अभाव में अपना भोजन स्वयं नहीं बना पाते, इसलिए वे अपना भोजन दूसरे पौधों से या मरे हुए जीव-जंतुओं से प्राप्त करते हैं. जो पौधे मृत पशुओं से भोजन प्राप्त करते हैं, सैप्रोफाइट (Saprophytes) कहलाते हैं और वे जो दूसरे पौधों से भोजन लेते हैं, पैरासाइट (Parasites) कहलाते हैं.…

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हम सभी उड़ने वाले कीट-पतंगों को प्रकाश की ओर आकर्षित होती हुए देखते हैं, लेकिन हम में से अधिकतर लोग यह नहीं जानते कि कीड़े प्रकाश की ओर आकर्षित क्यों होते हैं? कीट-पतंगों के प्रकाश की ओर आकर्षित होने में एक आश्चर्यजनक तथ्य यह भी है कि केवल नर कीड़े ही प्रकाश की ओर खिंचते हैं. कीट-पतंगे सभी प्रकाश स्रोतों की ओर समान रूप से आकर्षित नहीं होते. क्या तुम इन सभी प्रश्नों का उत्तर जानते हो? कीट-पतंगों का प्रकाश की ओर आकर्षित होना अरस्तू के समय से ही अध्ययन का विषय रहा है. 19वीं सदी के अंत में पेनसिलवानिया…

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कुछ पौधों की जड़ें भोज्य पदार्थ के एकत्रित हो जाने फूल जाती हैं. तब ये सब्जियों की तरह खाई जा सकती हैं. वे पौधे जिनकी जड़ें इस तरह की होती हैं कंद-मूल की उपज कहलाते हैं. कंद-मूल लंबे अरसे से भोज्य पदार्थों के रूप में पैदा किए जाते रहे हैं. ये पौधे विभिन्न पदार्थ धरती से खींच लेते हैं. इसलिए ये उपज के चक्र को सुव्यवस्थित करने में भी उपयोगी सिद्ध होते हैं. चुकंदर एक ऐसी ही जड़ है, जिसे मुख्य रूप से पकाकर खाया जाता है. यह मुख्य भोजन के साथ या सूप के रूप में परोसा जाता है,…

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रानी दीमक 15 वर्ष तक जीवित रहती है कीड़े-मकोड़े का जीवन-काल धरती पर रहने वाले दूसरे जीव-जंतुओं की तुलना में बहुत ही कम होता है. क्या आप जानते हो कि कौन से कीड़े दीर्घजीवी होते हैं? सबसे दीर्घजीवी कीड़े बुप्रेस्तिडेई (Buprestidae) परिवार के बीटल्स (Beetles) नाम के कीड़े हैं, जो लार्वा के रूप में 30 साल तक जिंदा रहते हैं. आइसोप्टेरा (Isoptera) परिवार की रानी दीमक (Queen Termite) के विषय मे पहले माना जाता था कि यह 50 वर्ष तक जीवित रहती है, लेकिन बाद में प्रयोगों से पता चला है कि यह केवल 15 वर्ष ही जिंदा रहती है.…

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बहुत से बीजों में पर्याप्त मात्रा में पर्याप्त मात्रा में तेल होता है. इनसे तेल निकालना व्यापारिक दृष्टि से से काफी लाभदायक होता है. विश्व में जिन बीजों से सबसे ज्यादा तेल निकाला जाता है वह है सोयाबीन, मूंगफली, पाम, बिनौला, जैतून और नारियल। खाने के तेल सरसों, तिल, तोरी के बीज, अलसी और सूरजमुखी से भी प्राप्त होते हैं. विभिन्न तेल वाले बीजों की खेती मुख्य रूप से खाने के लिए तेल प्राप्त करने या कृत्रिम मक्खन या अन्य खाने की चीजें उत्पादित करने के लिए ही की जाती हैं. सभी बीजों से तेल निकालने का मूल तरीका लगभग…

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धरती पर हजारों किस्म के कीड़े-मकोड़े हैं. इनमें से कुछ हमारे मित्र हैं, तो कुछ शत्रु हैं. अब तक वैज्ञानिक कीड़ों की 800,000 से भी अधिक किस्मों का अध्ययन कर चुके हैं. क्या तुम जानते हो कि कीड़ों में प्रजनन तथा विकास कैसे होता है?अधिकतर कीड़ों (Insects) में लैंगिक प्रजनन होता है. इस क्रिया में नर कीड़ा मादा के शरीर में शुक्राणु (Sperm) प्रवेश कराता है. कीड़े अपने अंडों की देखभाल और सुरक्षा नहीं करते, बल्कि पोषण के सुरक्षित स्थान पर इनमें से स्वयं ही बच्चे निकल आते हैं. कुछ कीड़ों में निषेचन की क्रिया बाहर होती है अर्थात् मादा…

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दमा (Asthma) फेफड़ों का जीवन भर चलने वाला ऐसा भयंकर रोग है, जिसमें सांस फूलती है और खांसी के दौरे पड़ते हैं. दमे के तेज और अचानक पड़ने वाले दौरे में रोगी को काफी काफी देर तक सांस नहीं आती. यह सभी मानव जातियों और स्त्री- पुरुष दोनों को ही हो सकता है. दमा फेफड़ों में श्वसनी नलिकाओं (Bronchial Tubes) की असामान्यताओं के कारण होता है. यह असामान्यताएं श्वसनी पेशिओं के सिकुड़ने, इन पेशियों के चारों तरफ फैले तंतुओं के सूज जाने या छाती में बलगम जम जाने के कारण होती हैं. दमे के मरीज के फेफड़े सिकुड़ जाते हैं.…

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सबसे ज्यादा प्रोटीन मांस, मछली, सोयाबीन, पनीर, दाल, अंडे, सेम और कड़े छिलके वाले फालों में प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है.. प्रत्येक जीवित प्राणी के कोशिकाओं में प्रोटीन (Protein) होते हैं. वास्तविकता तो यह है कि सभी जीवधारियों के जीवित रहने के लिए प्रोटीन अत्यंत आवश्यक हैं. प्रोटीन शब्द की उत्पति ग्रीक भाषा से हुई है, जिसका अर्थ है ‘प्रथम’ इसका अर्थ है कि प्रोटीन हर जीवित प्राणी के लिए सबसे अधिक जरूरी है. Protein की खोज सबसे पहले एक डच रसायनज्ञ रार्डस जोहान्स मुल्डर (Rardus Johannes Mulder) द्वारा सन 1837 में की गयी थी जबकि प्रोटीन नाम…

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धरती के ऊपर बहती हुई नदियों को तो हम सभी जानते हैं लेकिन जमीन के अंदर नदियों के बहने की बात कुछ विचित्र-सी लगती है. वास्तविकता यह है कि कुछ नदियां जमीन के अंदर भी बहती है. क्या आप जानते हो कि जमीन के अंदर नदियां कैसे बन जाती हैं? जमीन के अंदर नदियां बनने के कई कारण होते है. कहीं-कहीं धरती की ऊपरी सतह ऐसी होती है, जिसमें बरसात का पानी धीरे-धीरे प्रवेश कर सकता है. यह पानी जमीन के नीचे सख्त चट्टानों पर जाकर ठहर जाता है. ऊपरी पानी के दबाव के कारण यह नदी के रूप में…

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हम सभी जानते है कि मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है. पक्षियों में मोर सबसे सुंदर पक्षी है। मोर का नाचना शायद प्रकृति का सबसे मनोरम दृश्य है. क्या तुम जानते हो कि नाचते समय मोर अपने पंखों का प्रदर्शन क्यों करता है? मोर के पास पंखों की एक श्रृंखला होती है, जिसका प्रदर्शन वह सहवास के मौसम में करता है. वह अपने नाच से बहुत-सी मोरनियों को आकर्षित कर लेता है, पर विचित्र बात यह है कि जब भी कोई मोरनी उसके पास पहुंचती है, तो वह पीठ फेर लेता है. इस अनोखे व्यवहार का कारण अभी तक कोई…

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आमतौर पर यह देखा गया है कि बच्चे पैदा होने के कुछ महीनों तक बहुत रोते हैं. लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है, उसके रोने की अवधि कम होती जाती है और दो वर्ष के बच्चे में यह आदत प्रायः समाप्त हो जाती है. क्या आप जानते हैं कि बच्चे अधिक क्यों रोते हैं? वास्तविकता तो यह है कि धरती पर पैदा होकर बच्चे का पहला ध्वनि-संदेश रोने से ही शुरू होता है. बच्चे का रोना लगभग पशुओं की संवाद-प्रेषण जैसी वृत्ति है. बच्चा अपनी इच्छाओं और आवश्यकताओं को शब्दों में तो व्यक्त कर सकता, अतः वह रोकर ही…

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दिल के लगातार सिकुड़ने से पैदा हुई धमनियों की धड़कन को ही हम नब्ज का चलना कहते हैं. हृदय के सिकुड़ने की क्रिया के बीच एक अंतराल होता है. इस अंतराल के समय महाधमनी (Aorta) की दीवारें सिकुड़ती है. इस सिकुड़ने के दबाव से अतिरिक्त रक्त धमनियों में चला जाता है. सिकुड़ने और फैलने की यह प्रक्रिया धमनियों में एक धड़कन पैदा करती है. यही धड़कन जो शरीर के कई हिस्सों पर महसूस की जा सकती है, नब्ज कहलाती है.नब्ज कलाई में अंगूठे के ऊपर की धमनी (Artery) पर उंगलियां रखकर महससू की जा सकती है. इसे कनपटी पर हाथ…

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हाथी के बाद गैंडा धरती का दूसरा सबसे विशाल जीव है. गैंडे को अंग्रेजी में राइनोसेरॉस (Rhinoceros) कहते हैं. इस नाम की उत्पत्ति ग्रीक भाषा से हुई है. ‘रिहनों’ का अर्थ ग्रीक में होता है नाक और सींग, अर्थात् सींगयुक्त. इस जानवर की लंबी नाक पर एक या दों सींग होते हैं. ये सींग उम्र भर बढ़ते रहते हैं. गैंडा अंगुलेट्स के ऑडटोड (oddtoed) समूह का सदस्य है. गैंडे का शरीर बहुत भारी होता है, पर टांगें छोटी, लेकिन मजबूत होती हैं. इसके हर पैर में तीन उंगलियां होती हैं और हर उंगली का अलग खुर होता है. आगे के…

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कृत्रिम तरीकों से सिर की सुरक्षा प्राचीन काल से ही बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती रही है. युद्ध में सिपाही सिर की सुरक्षा के लिए विशेष हैलमेट (Helmet) का प्रयोग करते हैं. स्कूटर चलाते हुए भी सवार संभावित चोट से बचने के लिए हैलमेट पहनते अनेक शहरों में सरकार ने हैलमेट पहनने के नियम को कानून बना दिया है. क्या तुम जानते हो कि सिर की सुरक्षा इतनी आवश्यक क्यों है? मस्तिष्क शरीर का सबसे महत्वपूर्ण भाग है, जो हड्डियों के एक खोल में सिर में सुरक्षित रहता है. मानव मस्तिष्क तीन भागों में बंटा होता है-1. प्रमस्तिष्क (Cerebrum) 2. अनुमस्तिष्क…

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हृदय शरीर का एक बहुत हो महत्वपूर्ण अंग है. यह पूरे शरीर में खून पहुंचाता है. जब इसका बायां निलय (Ventricle) सिकुड़ता है, तो रक्त इससे धमनियों में जाना शुरू करता है. रक्त के दबाव के कारण धमनियां फैल जाती हैं. इन धमनियों के आंतरिक आवरण में पेशियां होती हैं, जो इस दबाव को रोकती हैं. इस तरह रक्त इनमें से दबकर छोटी नाड़ियों में जाता है. रक्त द्वारा धमनियों की दीवारों पर डाले गए दबाव को ही रक्त-चाप या ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) कहते हैं. रक्त-दाब की मात्रा हृदय की शक्ति, प्रणाली में रक्त की मात्रा और धमनियों की…

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अन्य मशीनों की तरह शरीर को भी काम करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है. यह ऊर्जा उपापचय (Metabolism) के माध्यम से भोज्य पदार्थों द्वारा प्राप्त होती है. उदाहरण के लिए, यदि हम एक टुकड़ा रोटी का, या आलू का अथवा किसी अन्य भोजन का खाते हैं, तो इसके अंदर विद्यमान स्टार्च शर्करा (Sugar) में बदलकर रक्त मिल जाता है. सांस द्वारा ली गई वायु में मिश्रित रक्त में पहुंचकर इसके साथ जलती है जिससे ऊर्जा पैदा होती है, इससे हमारे शरीर को शक्ति प्राप्त होती है. इसी तरह की अन्य रासायनिक क्रियाएं हमारे शरीर में ये रूपांतरण करती…

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शरीर विज्ञान चिकित्सा द्वारा ऐसे अनेक रोगों को दूर करने में सफलता मिली है जो दवाओं या ऑपोशन से ठीक नहीं हो सके थे शरीर विज्ञान चिकित्सा (physiology) आयुर्विज्ञान की वह शाखा है, जो किसी बीमारी या चोट को ठीक करने के लिए किसी प्राकृतिक उपकरण या व्यायाम का उपयोग करती है. इसे फिजिकल थैरेपी या फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) भी कहते हैं. एक तरह से इस पद्धति में शरीर की कमी को पूरा किया जाता है. इस चिकित्सा पद्धति को फिजियाट्रिक्स (Physiatrics) कहते हैं. इस पद्धति के अनुसार इलाज करने वाले डॉक्टर को फिजिकल धेरैपिस्ट (Phyisical Therapist) या फिजियोथेरेपिस्ट (Physiotherapist) कहते…

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शरीर के अंगों का वह समूह जो रक्त-संचार को व्यवस्थित करता है, रक्त संचार संस्थान कहलाता है. शरीर के प्रत्येक हिस्से तक भोजन और आक्सीजन पहुंचाने और फालतू पदार्थों को हटाने के लिए रक्त का पहुंचना बहुत आवश्यक है. मनुष्य में रक्त-संचार- व्यवस्था के संचालन के लिए मांसपेशी से बना एक पंप होता है, जिसे हृदय कहते हैं. यह कुछ नलिकाओं द्वारा समस्त शरीर में रक्त पहुंचाता है. ये नलिकाएं शरीर के प्रत्येक कोष्ठक तक रक्त को पहुंचा देती हैं.रक्त-संचार प्रणाली में पांच प्रकार की नलिकाएं होती हैं. धमनी (Artery), धमनिका (Areterioles), केशिका (Capillary), शिरा (Venule) और महाशिरा (Vena cava).…

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