आवनमंडल (lonosphere) हमारे वायुमंडल का वह ऊपरी हिस्सा है, जिसमें इलेक्ट्रोन और आयन कण भारी संख्या में उपस्थित हैं. आयनमंडल धरती की सतह से 50 किमी. की ऊंचाई से लेकर 500 किमी. की ऊंचाई तक फैला हुआ है. जब 30 मैगाहर्ट्ज से कम आवृत्ति की रेडियो तरंग आयनमंडल से टकराती है, तो यह इसके द्वारा परावर्तित हो जाती है. यह परार्वतन ठीक उसी प्रकार का होता है, जैसे प्रकाश की किरण का दर्पण द्वारा होता है. इस परावर्तित तरंग को पृथ्वी पर रेडियो द्वारा पुनः प्राप्त किया जा सकता है. वास्तविकता तो यह है कि समस्त धरती पर शॉर्ट वेव…
Author: Shailja Dubey
प्राचीन काल से ही मनुष्य समुद्र की तलहटी के विषय में जानने सेका इच्छुक रहा है. हजारों साल तक वह थोड़े समय के लिए गोता लगाकर यह जानने का प्रयत्न करता रहा कि समुद्रों, झीलों और नदियों की तलहटी कैसी है और वहां क्या मिलता है? इन गहराइयों में वह अधिक देर तक नहीं रुक पाता था, क्योंकि उसके पास पानी के अंदर सांस लेने का कोई साधन नहीं था. लेकिन आज ऐसे तरीके विकसित कर लिए गए हैं, जिनको प्रयोग में लाकर वह पानी के अंदर सांस ले सकता है और अधिक देर तक ठहर कर समुद्र तल के…
ऊनी कपड़े, कंबल और गलीचे भोज्य पदार्थ तो नहीं ॐ है, लेकिन आश्चर्य की बात। है कि कुछ ऐसे कोड़े हैं, जो अपने भोजन के लिए इन कपड़ों पर ही निर्भर रहते हैं. इन्हें कपड़े खाने वाले कोड़े कहा जाता है. इनकी कई किस्में होती हैं. अंग्रेजी में इन्हें क्लॉथ मॉच, टेपेस्ट्री मॉथ, केस मेकिंग मॉथ तथा फर माँथ कहते हैं. सामान्य कपड़े खाने वाले कीड़े का नाम टिनोला बिसेलीला (Tincola Bisselliella) है. कपड़ों में सूराख करने का काम कीड़ा (Moth) नहीं करता, बल्कि इस कीड़े के लार्वा ऊनी कपड़ों को भोजन के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जिससे कपड़ों…
द्वितीय महायुद्ध के बाद संसार में शांति स्थापित करने और युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गई थी. इसका यह उद्देश्य भी था कि आपसी झगड़ों का निबटारा युद्ध से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग द्वारा किया जाना चाहिए, संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणा पत्र पर, 51 राष्ट्रों के प्रतिनिधियों ने सैन फ्रांसिस्को में हुई एक गोष्ठी में 26 जून सन् 1945 को दस्तखत किए थे. यह घोषणा-पत्र भारत, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, रूस, अमेरिका तथा दूसरे देशों को सरकारों का समर्थन प्राप्त करके 24 अक्तूबर सन् 1945 को लागू किया गया. इस संघ का नाम…
हम में से अधिकतर लोगों ने अजंता (Ajanta Caves) और एलोरा (Ellora Caves) की गुफाओं के बारे में सुना ही होगा. ये गुफाएं चट्टानों में से काटे गए अपने मंदिरों के लिए प्रसिद्ध हैं. अजंता की गुफाएं अजंता गांव के पास हैं, जो महाराष्ट्र राज्य में औरंगाबाद नामक स्थान के उत्तर में लगभग 102 किमी. की दूरी पर हैं. इसी प्रकार एलोरा को गुफाएं एलोरा गांव के पास हैं, जो औरंगाबाद के उत्तर-पूर्व में लगभग 29 किमी. की दूरी पर स्थित हैं. अजंता के पास का रेलवे स्टेशन जलगांव है. औरंगाबाद का स्टेशन भी बहुत अधिक दूर नहीं है. दर्शकों…
हम सभी ने नेपोलियन बोनापार्ट (Napoleon Bonaparte) का नाम सुना है. इतिहास में कुछ ही लोग इतने शक्तिशाली और प्रभावशाली हुए हैं, जितना कि नेपोलियन था. वह एक ऐसा उदार तानाशाह था. जिसने अपनी शक्ति को लोगों के हित के लिए ही प्रयोग किया, केवल अपने स्वार्थों के लिए नहीं. नेपोलियन बोनापार्ट का जन्म कोर्सिका टापू के अजासिओ (Ajaccio) नामक स्थान पर 15 अगस्त सन् 1769 में हुआ था. जब वह छोटा ही था, तभी अपनी तुलना वह इतिहास के महान वीरों से किया करता था. नेपोलियन की शिक्षा फ्रांस में हुई. 16 साल की उम्र में ही उसने पेरिस…
ईसा से 800 वर्ष पहले एशिया माइनर के मैगनीसिया नामक स्थान पर काले रंग का एक पत्थर मिला जिसमें लोहे को अपनी ओर आकर्षित करने का गुण था. इस पत्थर को लोडस्टोन (Loadstone) कहा जाता है. चूंकि यह सबसे पहले मैगनोसिया में मिला था, इसलिए इसे मैगनेट (Magnet) के नाम से पुकारा जाने लगा. वास्तव में यह पत्थर लोहे का एक अयस्क (Ore) था, जिसे आज मैगनेटाइट कहते हैं. प्रयोगों से पता चला कि इस पत्थर को लोहे के बुरादे में रखने पर लोहे का बुरादा इससे चिपक जाता था. लोहे का बुरादा कहीं अधिक मात्रा में चिपकता था. तो…
रात्रि में जब हम आकाश की ओर देखते हैं, तो लाखों-करोडों मील की दूरी पर स्थित सूर्य, चांद और तारे हमें स्पष्ट दिखाई देते हैं, लेकिन धरती की सतह पर हम कुछ किलोमीटर से अधिक दूर की वस्तुओं को नहीं देख पाते. क्या तुम जानते हो कि इसका क्या कारण है? यह हम सभी को भली-भांति पता है कि हमारी धरती की बनावट नारंगी जैसी है, अर्थात् गोलाकार है. यद्यपि धरती दोनों ध्रुवों पर काफी समतल है, लेकिन बाकी के स्थानों पर इसकी बनावट वक्राकार है. पृथ्वी की गोलाकार बनावट के कारण ही हम इसकी सतह पर अधिक दूर तक…
जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर (Jalaluddin Muhammad Akbar) ने, जो मुगलों के सबसे बड़े बादशाह थे, सन् 1582 में एक नया धर्म चलाया, जो दीने-इलाही के नाम से जाना जाता है. इस धर्म में हिंदू और धर्म की सभी उत्तम बातें सम्मिलित की गई थीं. वास्तव में दीन-ए-इलाही हिंदू और इस्लाम धर्म की अच्छाइयों का मिला-जुला रूप था. इस धर्म को स्थापित करने में अकबर का उद्देश्य एक ऐसे धर्म को लाना था, जिसे हिंदू और मुसलमान दोनों ही आदर भाव से मानें और एक ही पूजा-स्थल में श्रद्धाभाव से एक ही ईश्वर की पूजा अर्चना कर सकें. लेकिन इस धर्म ने लोगों…
पक्षी वैज्ञानिकों का मत है कि पक्षियों की सुनने की क्षमता लगभग मनुष्यों समान होती है. लेकिन इनकी सुनने की शक्ति कुछ कमजोर होती है. क्या आप जानते हो कि पक्षी किस तरह सुनते हैं? सुनने के लिए पक्षियों के पास भी कान होते हैं. ये कान कई बातों में रेंगने वाले जंतुओं के समान होते हैं. कान के बाहरी हिस्से में एक पतली नाली होती है, जो कनपटी के पंखों में छुपी रहती है. अधिकांश पक्षियों की इस नाली के चारों तरफ की खाल में एक मांसपेशी ऐसी होती है, जो इस नाली के मुंह को पूरी तरह या…
समुद्र की गहराइयों को छोड़कर कीड़े लगभग दुनिया में हर जगह पाए जाते हैं. जीवाश्मों के अध्ययनों से पता चलता है कि कीड़ों का जन्म धरती पर आज से लगभग 40 करोड़ वर्ष पहले हुआ था. तब से ये बराबर मौसम और वातावरण के परिवर्तनों के अनुरूप बेहद शीघ्रता और सफाई से अपने आपको ढालते रहे हैं. सरसरी निगाह से देखने पर यह विश्वास नहीं होता कि इनके छोटे से शरीर में रक्त संचार प्रणाली और खून भी सकता है, लेकिन आश्चर्य की बात है कि कोड़ों के शरीर में खून और दिल ही नहीं होता, बल्कि अन्य सभी आवश्यक…
गर्मी के दिनों में कागज के टुकड़े या दूसरी वस्तुएं धूप में रख दी जाएं तो वे थोड़ी ही देर में गर्म हो जाती हैं. यदि कोई धातु का टुकड़ा कुछ देर के लिए धूप में छोड़ दिया जाए तो वह इतना गर्म हो जाता है कि उसे छूना भी मुश्किल हो जाता है. लेकिन आश्चर्य की बात है पेड़ों की पत्तियां सारे दिन धूप में रहने पर भी गर्म नहीं होतीं. वे सदा ही हरी तरोताजा, और ठंडी रहती हैं. ऐसा लगता है जैसे धूप उन पर पड़ी ही न हो. क्या आप जानते हो कि धूप में पेड़ों…
बोलना या लना या आवाज का निकलना एक बहुत ही जटिल क्रिया है. हमारे गले में एक अंग है, जिसे लैरिक्स (Larynx) या ध्वनि बॉक्स (Voice Box) कहते हैं. इसमें दोनों ओर दो वोकल कॉर्ड (Vocal Cord) होते हैं. इन वोकल काडों के कंपन करने से ही ध्वनि पैदा होती है. बोलने की क्रिया में सैकड़ों मांसपेशियों का योगदान होता है. आवाज के ठीक प्रकार से पैदा होने के लिए लैरिक्स, गाल, जीभ, तथा होंठों का आश्चर्यजनक समन्वय होना अति आवश्यक है. सामान्य जीवन में बोलचाल के दौरान इन अंगों में होने वाले जटिल समन्वयन (Coordination) की ओर हमारा ध्यान…
संसार में अनेक वस्तुएं हैं, जिन्हें हम किसी न किसी नाम से पुकारते हैं. इन सभी वस्तुओं के नामों का आरंभ अलग-अलग कारणों से हुआ है. ठीक इसी प्रकार विभिन्न देशों के नामों का आरंभ भी किसी एक प्रकार से नहीं हुआ है, बल्कि इन नामों की उत्पत्ति के अनेक स्रोत रहे हैं. क्या आप जानते हो कि ये नाम किस प्रकार पड़े ?वर्ष 2024 तक दुनिया में 195 देश हैं। इनमे से 193 देश संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश हैं और 2 देश गैर-सदस्य पर्यवेक्षक देश हैं: होली सी और फिलिस्तीन राज्य। अधिकतर देशों के नाम उन व्यक्तियों के…
सैक्सटेंट एक ऐसा यंत्र है, जो धरती के किसी स्थान और सूरज या तारों जैसे खगोलीय पिंडों के बीच बनने वाले कोणों को मापने के काम आता है. यह बहुत ही उपयोगी यंत्र है और समुद्री जहाजों के नाविकों द्वारा अक्षांश ज्ञात करने के लिए प्रयोग किया जाता है. इसकी सहायता से ऊंची इमारतों और खंभों की ऊंचाई भी मापी जाती है. सैक्सटेंट शब्द की उत्पति लैटिन भाषा के ‘सैक्सटस’ (Sextus) शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है: ‘छठवां हिस्सा’. वास्तव में इस यंत्र में धातु से बना एक वृत्तखंड होता है, जो एक वृत्त के छठे भाग यानी 60°…
सेल्यूट करने की प्रथा हमारे इतिहास और संस्कृति में सदा से ही रही है, लेकिन समय-समय पर सेल्यूट करने के तरीकों में परिवर्तन होते रहे हैं. पहले कुछ तरीकों में झुककर या जमीन पर घुटनों के बल माथा टेककर सेल्यूट किया जाता था. इन तरीकों में हाथ को एक विशेष भंगिमा में उठाना होता था. सैनिकों द्वारा सेल्यूट करने में सीधे हाथ को माथे तक या सिर पर रखो टोपी के किनारे तक लाना होता था. सेल्यूट करने का यह तरीका बहुत पुराना नहीं है. अठारवीं शताब्दी के अंत तक कनिष्ठ अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों को टोप उतारकर सेल्यूट करते थे.…
सांची स्तूप के ऊपर पत्थरों पर भगवान बुद्ध के जीवन की घटनाएं चित्रों के रूप में खुदी हुई हैं सांची के स्तूप बौद्धकालीन शिल्प कला के बेहतरीन नमूने हैं. सांची मध्य प्रदेश में बेतवा नदी के पश्चिम में भोपाल से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर रायसेन जिले का एक विश्व धरोहर स्थल नगर है. यह 90 मीटर ऊंची एक बलुआ चट्टान पर स्थित है. बौद्ध धर्म के ये धर्म-प्रतीक चिह्न एक लंबे समय से इस नगर की गरिमा और महत्व बढ़ा रहे हैं. यह नगर मीलों से दूर दिखाई देता है. सांची के तीन प्रमुख स्तूप हैं. इन्हें स्तूप-1,…
उत्प्रेरक (Catalyst) वे रासायनिक पदार्थ हैं, जो स्वयं बिना परिवर्तित हुए केवल अपनी उपस्थिति से रासायनिक क्रियाओं को प्रभावित करते हैं. जिन रासायनिक क्रियाओं में उत्प्रेरक प्रयोग होते हैं. उन्हें उत्प्रेरण प्रक्रम कहते हैं.उत्प्रेरक कई प्रकार के होते हैं, पर मुख्यतः उन्हें दो वर्गों में बांटा जाता है: धनात्मक उत्प्रेरक तथा ऋणात्मक उत्प्रेरक, घनात्मक उत्प्रेरक वे पदार्थ हैं, जो रासायनिक क्रिया की गति तेज करते हैं तथा ऋणात्मक उत्प्रेरक वे पदार्थ हैं, जो क्रिया को गति को मंद करते हैं. उदाहरण के लिए जब पोटाशियम क्लोरेट को 400 सैल्सियस तक गर्म करते हैं, तो ऑक्सीजन निकलनी शुरू हो जाती है,…
उड़ते हुए वायुयान का वेग मापने के यंत्र को ऊंचाई मापक (Altimeter) कहते हैं. मुख्य रूप से ऊंचाई मापक पांच प्रकार के होते हैं. पहले प्रकार का ऊंचाई मापक एक प्रकार का वायुदाब मापी है. यह बढ़ती हुई ऊंचाई के साथ घटने वाले दाब को मापता है. दूसरे प्रकार के यंत्र को रेडियो ऊंचाई मापक कहते हैं. इस यंत्र से एक रेडियो स्पंद को वायुयान से धरती तक आने और वापस जाने में लगे समय को मापा जाता है, इस अवधि को रेडियो स्पंद के वेग से गुणा करने पर हवाई जहाज की दुगुनी ऊंचाई प्राप्त हो जाती है. तीसरे…
20 जुलाई 1969 को मानव इतिहास में एक ऐतिहासिक पल आया जब नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन अपोलो मिशन में (Apollo mission) चांद पर कदम रखने वाले पहले इंसान बन गए। चांद पर अमेरिकी ध्वज फहराते हुए उनकी तस्वीरें आज भी प्रेरणादायी हैं। लेकिन एक सवाल जो अक्सर लोगों के मन में उठता है, वह यह है कि चांद पर हवा न होने के बावजूद झंडा कैसे लहरा रहा था? वास्तव में, चांद पर अमेरिकी झंडा हवा में लहरा रहा था ऐसा नहीं था। यह एक ऑप्टिकल इल्यूजन था। नासा के इंजीनियरों ने इस समस्या को पहले ही दूर कर…
धनवान व्यक्तियों के मृत शरीरों को उन पर रसायनों का लेप करके और बाद में उन्हें लिनेन के कपड़े में लपेट कर सुरक्षित रखा जाता था ममी (Mummy) उस मृतक शरीर को कहते हैं, जिसे दफनाने से पहले सुरक्षित रखने के लिए विशेष रसायनों के साथ क्रिया कराई जाती है. ममी शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के ममियाह (Mummiyah) शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है मोम या टार (Tar) द्वारा शरीर को सुरक्षित रखना. प्राचीन मिस्र (Egypt) में ममियों को सुरक्षित रखना एक अत्यंत लोकप्रिय तरीका था. चलिए जानते हैं कि मिस्र के लोग मृतक शरीरों को सुरक्षित क्यों…
जलयान का वेग नॉट (Knot) इकाई में मापा जाता है. नॉट एक नाटीकल मील (Nautical Mile) प्रति घंटे का संक्षिप्त रूप है. एक नॉटीकल मील 6076.12 फुट या 1852 मीटर के बराबर होता है. यह दूरी प्रचलित मोल (5280 फुट) से अधिक है. जलयानों के वेग मापने की इस इकाई का आरंभ कैसे हुआ? प्राचीन काल में नाविकों के पास पानी के जहाजों का वेग मापने का कोई साधन था. इस काम के लिए वे लकड़ी का एक लट्ट्ठा प्रयोग में लाते थे. लकड़ी के इस लट्टे के एक सिरे पर भारी वजन बांध दिया जाता था और दूसरे सिरे…
हम सभी जानते हैं हैं कि गर्मी के दिनों में मिट्टी में रखा पानी कुछ ही घंटों में ठंडा हो जाता है. क्या आप जानते हो कि ऐसा क्यों होता है? घड़े में पानी के ठंडे होने की क्रिया भौतिकी के एक जाने-माने सिद्धांत के आधार पर समझी जा सकती है. इस सिद्धांत के अनुसार वाष्पीकरण की क्रिया से ठंडक पैदा होती है. जब किसी तरल पदार्थ का वाष्पीकरण होता है, तो इसका तापमान गिर जाता है, क्योंकि वाष्पीकरण के लिए आवश्यक ऊष्मा स्वयं तरल पदार्थ से ही प्राप्त होती है. इस ऊष्मा क्षति के कारण ही तरल पदार्थ का…
उल्लू का बोलना या बिल्ली के द्वारा रास्ता काट जाना, अंधविश्वास के कारण मौत का पूर्व संकेत और अशुभ समझा जाता है मानव सभ्यता के आरंभ से ही अंधविश्वासों ने समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आज भी ऐसे अनेक लोग हैं, जो विभिन्न घटनाओं के विषय में अंधविश्वासी हैं. वे किसी न किसी कारण से उन अंधविश्वासों से चिपके हुए हैं. वे इन्हें छोड़ना ही नहीं चाहते. क्या आप जानते हो कि इन अनेक अंधविश्वासों का आरंभ कैसे हुआ? प्राचीन काल में मानव का ज्ञान बहुत ही सीमित था और प्रकृति में होने वाली अनेक घटनाओं जैसे बादलों…
विद्युत फ्यूज ऐसी धातु के तार का छोटा सा टुकड़ा होता है जो आवश्यकता से अधिक विद्युत धारा होने पर आसानी से पिघल जाता है इलैक्ट्रिक फ्यूज (Electric Fuse) एक ऐसा सुरक्षा साधन है। जो विद्युत-धारा पर विद्युत परिपथ (Circuit) को काट देता है. किसी विद्युत परिपथ में अधिक विद्युत धारा बहने के दो मुख्य कारण हैं. जब विद्युत परिपथ कहीं पर शार्ट (Short) हो जाता है, तो बहुत अधिक विद्युत धारा बहने लगती है. दूसरा जब एक ही लाइन पर बहुत विद्युत-यंत्र चलाए जाते हैं, तो परिपथ में धारा की मात्रा अधिक हो जाती है. अधिक विद्युत धारा के…
