भोपाल/इंदौर। मध्य प्रदेश सरकार ने मालवा क्षेत्र के दीर्घकालिक आर्थिक, औद्योगिक और शहरी विकास के लिए यूनिफाइड इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (UIMR) का विस्तृत खाका तैयार किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी योजना का दायरा बढ़ाकर 16 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक किया गया है, जिससे इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, रतलाम और शाजापुर सहित छह जिलों के लाखों लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। योजना के तहत 38 तहसीलों और 2,781 गांवों को एकीकृत विकास मॉडल से जोड़ा गया है।
इंदौर बनेगा ग्रोथ इंजन, आसपास के जिलों को मिलेगा फायदा
राज्य सरकार का कहना है कि UIMR केवल शहरी विस्तार की परियोजना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य इंदौर की आर्थिक ताकत को पूरे मालवा क्षेत्र तक पहुंचाना है। प्रस्तावित मॉडल में उद्योग, परिवहन, निवेश, पर्यटन, कृषि और शहरी अवसंरचना को एक साझा विकास ढांचे में शामिल किया गया है, ताकि क्षेत्रीय असंतुलन कम हो और छोटे शहरों व ग्रामीण इलाकों को भी विकास का लाभ मिल सके।
उज्जैन की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए विभिन्न मार्गों का निर्माण भी किया जा रहा है। शहर की आंतरिक सड़कों का निर्माण एवं चौड़ीकरण कार्य भी जारी है। सिंहस्थ के लिए 5 रेलवे ओवरब्रिज और 17 नदी पुलों का निर्माण किया जा रहा है।
सिंहस्थ के दौरान रियल टाइम निगरानी, भीड़ प्रबंधन, यातायात… pic.twitter.com/rKp0lHkwQx
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 19, 2026
14 नए औद्योगिक पार्क, 5 लाख रोजगार का अनुमान
योजना के तहत 13,500 हेक्टेयर से अधिक भूमि का औद्योगिक उपयोग के लिए विकास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य 14 नए औद्योगिक पार्क स्थापित करना है, जिनके माध्यम से लगभग 5 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने का अनुमान है।
औद्योगिक विकास के लिए प्रमुख शहरों को विशेष पहचान देने की रणनीति बनाई गई है—
- पीथमपुर को इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
- उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी को औद्योगिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।
- रतलाम को लॉजिस्टिक्स और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
’60 मिनट एक्सेस’ मॉडल पर जोर
सरकार ने पूरे क्षेत्र को तेज परिवहन नेटवर्क से जोड़ने के लिए ’60 मिनट एक्सेस’ मॉडल प्रस्तावित किया है। इसके तहत ऐसी सड़क और कनेक्टिविटी व्यवस्था विकसित की जाएगी जिससे क्षेत्र के प्रमुख आर्थिक केंद्रों तक एक घंटे के भीतर पहुंच संभव हो सके। इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, इंदौर-भोपाल एक्सप्रेसवे, मेट्रो विस्तार और औद्योगिक संपर्क मार्ग इस रणनीति का हिस्सा हैं।
इसके अलावा क्षेत्र को सीधे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) और अन्य राष्ट्रीय परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, जिससे उद्योगों की लॉजिस्टिक्स लागत कम होने और निवेश आकर्षित होने की संभावना है।
किसानों के लिए लैंड पूलिंग मॉडल
इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए सरकार ने लैंड पूलिंग मॉडल अपनाया है। इस व्यवस्था के तहत विकास कार्य पूरा होने के बाद किसानों को उनकी लगभग 60 प्रतिशत भूमि विकसित स्वरूप में वापस देने का प्रावधान किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे किसान केवल भूमि देने वाले पक्ष नहीं रहेंगे, बल्कि विकास प्रक्रिया के साझेदार बनेंगे।
पर्यावरण संरक्षण पर भी फोकस
UIMR को ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट नीति के आधार पर विकसित करने की बात कही गई है। प्राकृतिक जल स्रोतों और वन क्षेत्रों के आसपास अनियंत्रित निर्माण पर रोक, उद्योगों के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज जैसी व्यवस्थाएं और कार्बन न्यूट्रल औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य इस नीति का हिस्सा हैं।
पर्यटन अर्थव्यवस्था को भी मिलेगी गति
सरकार मालवा की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को आर्थिक विकास से जोड़ना चाहती है। इसके लिए उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू और महेश्वर को जोड़ते हुए एक व्यापक आध्यात्मिक एवं हेरिटेज पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना है। इसके साथ नर्मदा आधारित पर्यटन और ग्रामीण पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की रणनीति बनाई गई है।
हाई-टेक मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी करेगी निगरानी
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत क्षेत्रीय विकास की निगरानी और दीर्घकालिक योजना निर्माण के लिए एक विशेष मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी गठित करने का प्रावधान किया गया है। यह संस्था भविष्य की आबादी, यातायात, आवास और बुनियादी ढांचे की जरूरतों का डेटा आधारित विश्लेषण कर विकास योजनाओं को लागू करेगी।
क्या है परियोजना का महत्व?
यदि योजना निर्धारित समयसीमा और निवेश लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ती है, तो UIMR मध्य प्रदेश के सबसे बड़े क्षेत्रीय विकास मॉडल के रूप में उभर सकता है। सरकार का मानना है कि इससे मालवा क्षेत्र को औद्योगिक, लॉजिस्टिक, पर्यटन और शहरी विकास के नए अवसर मिलेंगे, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि सफलता का वास्तविक आकलन परियोजनाओं के क्रियान्वयन, निवेश प्रवाह और रोजगार सृजन के आधार पर ही किया जा सकेगा।