Saturday, 20 June

कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले से शिक्षा विभाग के ऑनलाइन पोर्टल से जुड़ी एक चौंकाने वाली गड़बड़ी सामने आई है। ढीमरखेड़ा विकासखंड के संकुल केंद्र शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उमरियापान अंतर्गत प्राथमिक शाला मंगेली में करीब 15 वर्ष पहले दिवंगत हो चुके एक शिक्षक का नाम शिक्षा विभाग के पोर्टल पर पदस्थ शिक्षक के रूप में दर्ज हो गया है। इस त्रुटि के कारण वर्तमान में कार्यरत शिक्षक को अतिशेष (सरप्लस) शिक्षकों की सूची में शामिल कर दिया गया है।

विद्यालय की स्थिति और पोर्टल पर सामने आई विसंगति

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्राथमिक शाला मंगेली की स्थापना वर्ष 2011 में हुई थी। वर्तमान में विद्यालय में 28 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और यहां दो शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। दिसंबर 2025 में पदस्थ शिक्षक बाला प्रसाद पटेल के चिकित्सा अवकाश पर चले जाने के बाद विद्यालय एकल शिक्षक व्यवस्था में संचालित होने लगा था। इस स्थिति को देखते हुए विद्यालय के लिए अल्पकालिक अतिथि शिक्षक पद की भी स्वीकृति दी गई थी।

इसी दौरान अप्रैल 2026 में शिक्षा विभाग के एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर विद्यालय की पदस्थापना सूची में महिपाल सिंह ठाकुर का नाम शिक्षक के रूप में प्रदर्शित होने लगा। बताया जा रहा है कि महिपाल सिंह ठाकुर का निधन लगभग 15 वर्ष पहले हो चुका है।

आपत्ति दर्ज, लेकिन कार्रवाई का इंतजार

मामले की जानकारी सामने आने के बाद विद्यालय प्रभारी द्वारा पोर्टल पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई गई। हालांकि आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद अब तक संबंधित अधिकारियों द्वारा इस त्रुटि के सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि विभागीय रिकॉर्ड और ऑनलाइन डेटा के सत्यापन की प्रक्रिया में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।

जीवित शिक्षक को अतिशेष सूची में शामिल किया गया

पोर्टल में मृत शिक्षक का नाम दर्ज होने का सीधा असर वर्तमान में कार्यरत शिक्षक सूर्यकांत त्रिपाठी पर पड़ा है। पोर्टल के रिकॉर्ड में अतिरिक्त शिक्षक दर्शाए जाने के कारण उनका नाम अतिशेष शिक्षकों की सूची में शामिल हो गया है, जिससे उनकी पदस्थापना प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है।

इस संबंध में सूर्यकांत त्रिपाठी ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर मृत शिक्षक का नाम तत्काल पोर्टल से हटाने और उनका नाम अतिशेष सूची से विलोपित करने की मांग की है।

जांच की मांग

शिक्षक की ओर से यह मांग भी की गई है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि वर्षों पहले दिवंगत हो चुके शिक्षक का नाम एजुकेशन पोर्टल 3.0 में किस आधार पर दर्ज किया गया। उनका कहना है कि जिम्मेदारी तय किए बिना ऐसी त्रुटियों की पुनरावृत्ति रोकना मुश्किल होगा।

फिलहाल मामला शिक्षा विभाग के प्रशासनिक रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा प्रबंधन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि विभाग इस गड़बड़ी को कब तक सुधारता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

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