भोपाल। मध्य प्रदेश में कैंसर मरीजों के इलाज का खर्च बढ़ने जा रहा है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर उपचार में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली दो प्रमुख कीमोथेरेपी दवाओं सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) की कीमतों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार इन दवाओं की सीलिंग प्राइस में एकमुश्त 50 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है, जिससे मरीजों की प्रत्येक कीमो साइकिल का खर्च हजारों रुपये तक बढ़ सकता है।
एक कीमो साइकिल पर 2 से 3 हजार रुपये तक अतिरिक्त खर्च
ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन का उपयोग ओवरी, फेफड़े, स्तन, सर्वाइकल, सिर-गर्दन, अंडकोष और गॉलब्लैडर सहित कई प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जाता है। अधिकांश मरीजों को 4 से 6 या उससे अधिक कीमोथेरेपी साइकिल की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में दवाओं की कीमत बढ़ने से पूरे इलाज पर हजारों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
दवा संकट के बीच बढ़ी कीमतें
देशभर में पिछले कई सप्ताह से प्लैटिनम-आधारित कीमोथेरेपी दवाओं की कमी की शिकायतें सामने आ रही थीं। अस्पतालों और कैंसर केंद्रों को सिस्प्लैटिन तथा कार्बोप्लैटिन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पा रही थी। दवा निर्माताओं का कहना है कि प्लैटिनम की वैश्विक कीमतों में तेज वृद्धि, आयात लागत बढ़ने और सप्लाई चेन बाधित होने से उत्पादन आर्थिक रूप से मुश्किल हो गया था।
क्यों बढ़ानी पड़ी कीमत?
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक हित के प्रावधानों के तहत NPPA को इन दवाओं की कीमतों में संशोधन की अनुमति दी। इसके बाद 11 जून 2026 को हुई बैठक के आधार पर नई सीलिंग प्राइस अधिसूचित की गई। रिपोर्टों के अनुसार सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमतों में 10 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि का आधार कच्चे माल की लागत में भारी बढ़ोतरी और उत्पादन की व्यवहार्यता को बनाए रखना रहा।
भोपाल के अस्पतालों में भी असर
राजधानी भोपाल के कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि इन दवाओं की कमी का असर सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों पर पड़ा है। कई जगह मरीजों को दवा उपलब्ध होने का इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कुछ मामलों में डॉक्टरों को उपचार की रणनीति में बदलाव करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार कंपनियों ने उत्पादन फिर से शुरू कर दिया है, लेकिन मांग के अनुरूप सप्लाई सामान्य होने में अभी कुछ सप्ताह का समय लग सकता है।
70% तक कीमोथेरेपी रेजिमेंस में इस्तेमाल
गांधी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. ओ.पी. सिंह के अनुसार सिस्प्लैटिन कई कैंसर उपचार प्रोटोकॉल की आधारभूत दवा मानी जाती है और करीब 70 प्रतिशत तक कीमोथेरेपी रेजिमेंस में किसी न किसी रूप में इसका उपयोग होता है। इसलिए इसकी उपलब्धता और कीमत में बदलाव का असर बड़ी संख्या में मरीजों पर पड़ सकता है।
सस्ती और प्रभावी मानी जाती है सिस्प्लैटिन
ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. टी.पी. साहू के अनुसार सिस्प्लैटिन पिछले दो से तीन दशकों से रेडियोथेरेपी के साथ उपयोग होने वाली सबसे भरोसेमंद और अपेक्षाकृत किफायती दवाओं में शामिल रही है। कई मामलों में इसका विकल्प इम्यूनोथेरेपी या अन्य आधुनिक उपचार होते हैं, जिनकी लागत लाखों रुपये तक पहुंच सकती है। ऐसे में मध्यम और निम्न आय वर्ग के मरीजों के लिए यह दवा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या है सरकार का तर्क?
सरकार का तर्क है कि यदि उत्पादन लागत के अनुरूप कीमतों में सीमित बढ़ोतरी नहीं की जाती तो दवा कंपनियां उत्पादन कम या बंद कर सकती थीं, जिससे देश में दवा संकट और गंभीर हो सकता था। नई कीमतों का उद्देश्य उपलब्धता सुनिश्चित करना और सप्लाई को सामान्य बनाना है।