मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि किसी रिसॉर्ट में हुई एक दुर्घटना मात्र के आधार पर पूरे परिसर को सील करना कानूनसम्मत नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन किसी प्रतिष्ठान को पूरी तरह सील करता है तो उसके पीछे ठोस, वैधानिक और रिकॉर्ड पर दर्ज कारण होना आवश्यक है।
न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि किसी घटना के बाद सुरक्षा संबंधी चुनौती उत्पन्न होती है तो उसका समाधान प्रशासनिक स्तर पर किया जाना चाहिए, न कि बिना पर्याप्त कारण किसी निजी प्रतिष्ठान को पूरी तरह बंद करके।
आदेश में पर्याप्त कारणों का अभाव
अदालत ने पाया कि संबंधित सीलिंग आदेश में ऐसे कोई स्पष्ट कारण दर्ज नहीं हैं, जिनसे यह साबित हो सके कि पूरे रिसॉर्ट को सील करना आवश्यक था। इसी आधार पर कोर्ट ने निसर्ग रिसॉर्ट को तत्काल डी-सील करने के निर्देश दिए।
राज्य सरकार ने क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कहा गया कि रिसॉर्ट के स्विमिंग पूल में एक व्यक्ति की मौत के बाद क्षेत्र में कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी थी। इसी स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने रिसॉर्ट को सील करने का निर्णय लिया।
हालांकि, अदालत ने इस तर्क से सहमति नहीं जताई। कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासनिक तंत्र का दायित्व है और इसका भार किसी निजी संस्थान पर नहीं डाला जा सकता।
जांच और सीलिंग को अलग-अलग माना
एकलपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि स्विमिंग पूल में हुई मौत के मामले में जांच, आपराधिक कार्रवाई या सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है तो वह अलग प्रक्रिया का विषय है। लेकिन केवल उसी घटना के आधार पर पूरे रिसॉर्ट का संचालन बंद कर देना न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।
चार सप्ताह में मांगा जवाब
मामले में हाई कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही याचिका की अगली सुनवाई भी चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
