Saturday, 4 July

मध्य प्रदेश के सागर जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने एक चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए 60 वर्षीय बुजुर्ग मरीज के मूत्राशय (ब्लैडर) से कुल 33 पथरियां निकालकर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। लंबे समय से पेशाब में दिक्कत और लगातार पेट दर्द से परेशान मरीज का ऑपरेशन करीब एक घंटे तक चला।

जानकारी के अनुसार, सीहोरा निवासी मरीज पिछले लगभग एक वर्ष से पेट में दर्द और मूत्र संबंधी समस्याओं का सामना कर रहा था। उसकी पहले भी पथरी की सर्जरी हो चुकी थी, लेकिन दोबारा तकलीफ बढ़ने पर वह इलाज के लिए सागर जिला अस्पताल पहुंचा। जांच के दौरान चिकित्सकों ने मूत्राशय में बड़ी संख्या में पथरियों की मौजूदगी की पुष्टि की, जिसके बाद तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।

सर्जरी के लिए डॉक्टरों ने ओपन सिस्टोलिथोटामी तकनीक का इस्तेमाल किया। ऑपरेशन के दौरान जैसे-जैसे मूत्राशय से पथरियां निकाली गईं, उनकी संख्या लगातार बढ़ती गई। अंततः कुल 33 पथरियां बाहर निकाली गईं। चिकित्सकों के अनुसार इतनी अधिक संख्या में पथरियां एक साथ मिलना असामान्य मामला था। ऑपरेशन के दौरान पथरियों को रखने के लिए रखी गई प्लेट भी पूरी तरह भर गई।

यह ऑपरेशन यूरोलॉजिस्ट डॉ. संदीप गौतम और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया। डॉ. गौतम ने बताया कि मरीज लंबे समय से बढ़े हुए प्रोस्टेट (एनलार्ज्ड प्रोस्टेट) की समस्या से भी पीड़ित है। इस कारण मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हो पा रहा था और कुछ मात्रा में पेशाब लगातार अंदर जमा रहता था।

उन्होंने बताया कि मूत्र के लंबे समय तक मूत्राशय में रुकने से उसमें मौजूद खनिज तत्व धीरे-धीरे जमा होते गए, जिससे समय के साथ बड़ी संख्या में पथरियां बन गईं। हालांकि पथरी बनने के सटीक कारणों की पुष्टि के लिए आगे भी चिकित्सकीय जांच और अध्ययन किया जाएगा।

चिकित्सकों के मुताबिक, ओपन सिस्टोलिथोटामी ऐसी शल्य प्रक्रिया है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब पथरी का आकार बड़ा हो या एंडोस्कोपिक तकनीक से उसे निकालना संभव न हो। इस प्रक्रिया में पेट के निचले हिस्से में चीरा लगाकर मूत्राशय तक पहुंचा जाता है और पथरियों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला जाता है। यह सर्जरी सामान्यतः जनरल या स्पाइनल एनेस्थीसिया के तहत की जाती है।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर है और उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। सफल सर्जरी के बाद मरीज और उसके परिजनों ने चिकित्सा दल का आभार व्यक्त किया।

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