शुक्रवार, 3 जुलाई

खंडवा जिले के सामान्य वन मंडल के गुड़ी वन परिक्षेत्र में लंबे समय से वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने व्यापक अभियान चलाते हुए सैकड़ों एकड़ जमीन को कब्जे से मुक्त करा लिया है। संयुक्त कार्रवाई में वन विभाग और पुलिस की टीम ने क्षेत्र को खाली कराकर अवैध खेती पर रोक लगाई।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिस इलाके में कुछ वर्ष पहले तक घना जंगल था, वहां कथित अतिक्रमणकारियों ने पेड़ों की कटाई कर खेती शुरू कर दी थी। बताया गया कि इस भूमि पर हर साल बड़ी मात्रा में मक्का की फसल उगाई जा रही थी। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान कलेक्टर ऋषव गुप्ता, पुलिस अधीक्षक अगम जैन और डीएफओ राकेश कुमार डामोर के समन्वय से संचालित किया गया।

कार्रवाई के बाद वन विभाग ने वर्ष 2018 और 2025 की सैटेलाइट (गूगल मैप) तस्वीरें भी सार्वजनिक की हैं। विभाग का दावा है कि इन तस्वीरों में अमाखुजरी बीट क्रमांक 748 के भू-भाग में समय के साथ हुए बदलाव स्पष्ट दिखाई देते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2018 में यहां घना वन क्षेत्र मौजूद था, जबकि बाद के वर्षों में पेड़ों की कटाई के बाद भूमि को कृषि उपयोग में बदल दिया गया।

वन विभाग का आरोप है कि अमाखुजरी क्षेत्र में एक परिवार ने बड़े पैमाने पर वन भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा था। विभाग के अनुसार, यह परिवार हर सीजन हजारों क्विंटल मक्का का उत्पादन और बिक्री करता था। साथ ही, कब्जाई गई जमीन के कुछ हिस्से अन्य लोगों को खेती के लिए देकर अवैध वसूली किए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

अधिकारियों के अनुसार, अतिक्रमण हटाने के प्रयास पहले भी कई बार किए गए, लेकिन टीम को विरोध का सामना करना पड़ा। वन विभाग का कहना है कि कार्रवाई के दौरान महिलाओं और बच्चों को आगे कर विरोध प्रदर्शन कराया जाता था, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो जाती थी और अभियान बीच में रोकना पड़ता था।

विभाग ने बताया कि वर्ष 2024 में भी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों के साथ अतिक्रमण हटाने की कोशिश की गई थी। उस दौरान कथित रूप से पथराव हुआ, जिसमें कई कर्मचारी घायल हो गए और टीम को बिना कार्रवाई पूरी किए लौटना पड़ा। इसके बाद प्रशासन ने नई रणनीति तैयार कर सुरक्षा व्यवस्था के बीच ताजा अभियान चलाया।

डीएफओ राकेश कुमार डामोर ने कहा कि अतिक्रमण हटाए गए क्षेत्र की नियमित निगरानी की जाएगी ताकि दोबारा कब्जा न हो सके। इसके लिए लगातार गश्त, सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य क्षतिग्रस्त वन क्षेत्र का पुनर्वास कर उसे फिर से हरित स्वरूप देना है।

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