Saturday, 4 July

मध्य प्रदेश के नीमच से महाराष्ट्र के नंदुरबार तक प्रस्तावित नई रेलवे लाइन परियोजना पश्चिम भारत की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। करीब 380 किलोमीटर लंबी इस प्रस्तावित रेल लाइन के जरिए मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के कई जिलों को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। विशेष रूप से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए यह परियोजना परिवहन, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति दे सकती है।

रेल मंत्रालय से परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को स्वीकृति मिल चुकी है। फिलहाल फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) और डिटेल इंजीनियरिंग से जुड़े तकनीकी कार्य किए जा रहे हैं। अंतिम रूट, स्टेशन और निर्माण संबंधी फैसले सर्वे पूरा होने के बाद लिए जाएंगे।

प्रस्तावित रेल मार्ग किन-किन राज्यों से होकर गुजरेगा?

योजना के अनुसार रेल लाइन की शुरुआत मध्य प्रदेश के नीमच रेलवे जंक्शन से होगी। इसके बाद यह मंदसौर क्षेत्र से गुजरते हुए राजस्थान के प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा पहुंचेगी। आगे यह मार्ग गुजरात के झालोद और दाहोद से होते हुए महाराष्ट्र के शहादा और अंत में नंदुरबार रेलवे जंक्शन तक पहुंचेगा।

सर्वे पूरा होने के बाद मार्ग में बनने वाले नए रेलवे स्टेशनों और उनके अंतिम स्थान का निर्धारण किया जाएगा।

परियोजना की अनुमानित लागत कितनी है?

प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक इस रेल परियोजना पर लगभग 7,000 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। हालांकि अंतिम लागत तकनीकी सर्वे, विस्तृत इंजीनियरिंग और परियोजना के अंतिम स्वरूप के बाद तय होगी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार वर्तमान चरण में सर्वे और तकनीकी मूल्यांकन पर काम जारी है। इसके बाद भूमि अधिग्रहण, स्टेशन निर्माण और अन्य अधोसंरचना संबंधी प्रक्रियाएं आगे बढ़ेंगी।

क्षेत्र को क्या होंगे संभावित लाभ?

यदि यह परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार पूरी होती है, तो चार राज्यों के कई ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों को पहली बार व्यापक रेल नेटवर्क से सीधा जुड़ाव मिल सकता है।

संभावित लाभों में शामिल हैं—

  • किसानों को कृषि उत्पादों के परिवहन के बेहतर विकल्प मिलेंगे।
  • व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।
  • बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, दाहोद और शहादा जैसे क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।
  • निर्माण कार्य और रेलवे संचालन के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
  • लंबी दूरी की यात्रा के लिए सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होने की संभावना है।

दिल्ली-मुंबई रेल नेटवर्क के लिए भी बन सकता है विकल्प

रेल विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह रेल लाइन दिल्ली-मुंबई रेल नेटवर्क के लिए एक वैकल्पिक और अपेक्षाकृत छोटा मार्ग उपलब्ध करा सकती है। इससे कुछ रूटों पर रेल यातायात का दबाव कम करने और मालगाड़ियों के संचालन को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव परियोजना के अंतिम स्वरूप और भविष्य की परिचालन योजना पर निर्भर करेगा।

अभी किस चरण में है परियोजना?

फिलहाल परियोजना सर्वे और तकनीकी अध्ययन के चरण में है। रेलवे की ओर से फाइनल लोकेशन सर्वे तथा डिटेल इंजीनियरिंग का कार्य जारी है। विस्तृत सर्वे पूरा होने के बाद ही अंतिम रूट, स्टेशनों की संख्या, भूमि अधिग्रहण और निर्माण की समयसीमा तय की जाएगी।

पूर्व विधायक ने क्या कहा?

कांग्रेस के पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू का कहना है कि परियोजना के लिए फाइनल सर्वे का कार्य जारी है। उनके अनुसार यदि यह योजना तय समय में पूरी होती है तो नीमच से नंदुरबार तक का पूरा क्षेत्र रेल कनेक्टिविटी के लिहाज से नई पहचान बना सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सर्वे के बाद आवश्यकता के अनुसार नए रेलवे स्टेशन भी प्रस्तावित किए जा सकते हैं।

प्रमुख बातें

  • प्रस्तावित रेल लाइन की लंबाई लगभग 380 किलोमीटर।
  • मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र को जोड़ने की योजना।
  • अनुमानित लागत करीब 7,000 करोड़ रुपये।
  • डीपीआर को स्वीकृति, फाइनल लोकेशन सर्वे और डिटेल इंजीनियरिंग जारी।
  • आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क मिलने की संभावना।
  • कृषि, व्यापार, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद।
  • भविष्य में दिल्ली-मुंबई रेल नेटवर्क के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित होने की संभावना।
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