शुक्रवार, 3 जुलाई

ग्वालियर के पूर्व सिंधिया राजघराने की बहुचर्चित संपत्ति विवाद को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई अब समाप्ति की ओर पहुंच गई है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं उषा राजे, वसुंधरा राजे तथा यशोधरा राजे के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर आपसी सहमति बन गई है। इसके साथ ही करीब 16 वर्षों से अदालत में लंबित विवाद के समाधान का रास्ता साफ हो गया है।

समझौते से जुड़े दस्तावेज जिला न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। अब 8 जुलाई को दोनों पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष अपनी सहमति दर्ज कराएंगे। इसके बाद न्यायालय समझौते की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करेगा।

कैसे शुरू हुआ था विवाद?

यह मामला वर्ष 2010 में उस समय शुरू हुआ था, जब उषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे ने जिला न्यायालय में दावा दायर कर अपने पिता की संपत्ति में बेटियों के समान अधिकार की मांग की थी। उनका कहना था कि उन्हें भी कानून के अनुसार पैतृक संपत्ति में हिस्सा मिलना चाहिए। दूसरी ओर, ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से भी अलग वाद दायर किया गया था। दोनों मामले लंबे समय से जिला न्यायालय में विचाराधीन थे। अब पारिवारिक सहमति बनने के बाद विवाद समाप्त होने की दिशा में बढ़ गया है।

करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों का मामला

पूर्व सिंधिया राजघराने की संपत्तियां देश के कई हिस्सों में फैली हुई हैं। इनमें ग्वालियर का ऐतिहासिक जयविलास पैलेस, शिवपुरी स्थित माधव विलास, हैप्पी विलास और जॉर्ज कैसल, उज्जैन का कालियादेह महल तथा दिल्ली का ग्वालियर हाउस प्रमुख हैं। इसके अलावा पुणे, वाराणसी और गोवा में भी राजपरिवार की संपत्तियां बताई जाती हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इन संपत्तियों का अनुमानित मूल्य लगभग 40 हजार करोड़ रुपये आंका जाता है, हालांकि इसका कोई आधिकारिक सरकारी मूल्यांकन सार्वजनिक नहीं है।

प्रमुख बातें

  • 16 वर्ष पुराना संपत्ति विवाद आपसी सहमति से सुलझा।
  • ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं के बीच समझौता।
  • समझौता जिला न्यायालय में दाखिल।
  • 8 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में औपचारिक पुष्टि होगी।
  • समझौते के बाद सिंधिया राजघराने की संपत्तियों के विधिवत बंटवारे का रास्ता साफ हुआ।

किन संपत्तियों पर था विवाद?

विवाद में शामिल प्रमुख संपत्तियों में ग्वालियर का जयविलास पैलेस सबसे अहम माना जाता है। इसके अलावा कालियादेह पैलेस (उज्जैन), माधव विलास, हैप्पी विलास और जॉर्ज कैसल (शिवपुरी), दिल्ली का ग्वालियर हाउस और सिंधिया विला, पुणे का पद्म विलास पैलेस, वाराणसी का सिंधिया घाट तथा गोवा स्थित विठोबा मंदिर समेत अन्य संपत्तियां भी शामिल बताई जाती हैं। स्वतंत्रता के समय सिंधिया राजपरिवार के पास अनेक कंपनियों में हिस्सेदारी भी थी। अब आपसी समझौते के बाद इन संपत्तियों के बंटवारे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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