भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि यदि देश में पेंशन फंड का प्रभावी और जिम्मेदार तरीके से प्रबंधन किया जाए, तो यह भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनके अनुसार, मजबूत पेंशन पूल केवल सेवानिवृत्त लोगों की वित्तीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि देश के दीर्घकालिक विकास से जुड़े निवेशों को भी स्थिर आधार प्रदान करता है।
उन्होंने यह बात पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के एक कार्यक्रम में कही, जहां उन्होंने भविष्य की पेंशन व्यवस्था, निवेश के बदलते स्वरूप और बुजुर्ग आबादी की वित्तीय सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी।
केवल आर्थिक आंकड़े नहीं, बुजुर्गों की सुरक्षा भी विकास का पैमाना
वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि किसी देश को विकसित केवल उसकी राष्ट्रीय आय या आर्थिक उत्पादन के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि किसी समाज में बुजुर्ग आर्थिक और मानसिक रूप से असुरक्षित महसूस करते हैं, तो उसे पूर्ण रूप से विकसित नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने कहा कि वास्तविक विकास वही है जहां हर नागरिक को वृद्धावस्था में सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और स्थिर आय का भरोसा मिले। इसलिए पेंशन व्यवस्था को केवल वित्तीय उत्पाद नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में देखा जाना चाहिए।
शॉर्ट-टर्म निवेश की बढ़ती प्रवृत्ति पर जताई चिंता
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने वित्तीय बाजारों में तेजी से बढ़ रहे अल्पकालिक निवेश रुझान पर भी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार, पहले जहां कई संस्थागत निवेशक लंबी अवधि का दृष्टिकोण अपनाते थे, वहीं अब अधिक रिटर्न की तलाश में निवेश अवधि लगातार घटती जा रही है।
उन्होंने कहा कि पेंशन फंड का उद्देश्य स्थिर और दीर्घकालिक सुरक्षा देना होता है। ऐसे में केवल अधिक मुनाफे के लिए अत्यधिक जोखिम लेना भविष्य के पेंशनधारकों के हितों को प्रभावित कर सकता है।
वैश्विक अनुभव से सीखने की जरूरत
नागेश्वरन ने कहा कि कई विकसित देशों के पेंशन फंड लंबे समय से वित्तीय दबाव का सामना कर रहे हैं। कम ब्याज दरों के दौर में बेहतर रिटर्न पाने के लिए कई फंडों ने अपेक्षाकृत जोखिम वाले निवेश विकल्प चुने, जिससे उनकी दीर्घकालिक स्थिरता पर असर पड़ा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे देश में निवेश रणनीति बनाते समय व्यापक आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है। उदाहरण के तौर पर, यदि घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा सोने जैसी परिसंपत्तियों में चला जाता है, तो इसका प्रभाव देश के भुगतान संतुलन और वित्तीय संसाधनों पर पड़ सकता है। इसलिए दीर्घकालिक देनदारियों वाले पेंशन फंडों के लिए संतुलित निवेश रणनीति जरूरी है।
बढ़ती बुजुर्ग आबादी के लिए अभी से करनी होगी तैयारी
मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या लगातार बढ़ेगी। इसे देखते हुए अभी से ऐसी पेंशन व्यवस्था तैयार करनी होगी जो भविष्य की जरूरतों को पूरा कर सके।
उन्होंने इस दिशा में तीन प्रमुख प्राथमिकताओं पर जोर दिया:
- सरल पेंशन उत्पाद: खासकर असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए योजनाओं को समझने और अपनाने में आसान बनाया जाए।
- डिजिटल और पारदर्शी सेवाएं: पेंशन से जुड़ी सभी सेवाओं को तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाया जाए।
- जनता का भरोसा: पेंशन प्रणाली में लोगों का दीर्घकालिक विश्वास बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
NPS के बाद अब अगली चुनौती क्या है?
कार्यक्रम में PFRDA के चेयरमैन एस. रमन ने कहा कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) ने रिटायरमेंट बचत के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया है। अब अगला महत्वपूर्ण चरण रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि के बेहतर प्रबंधन का है, जिसे ‘डिक्युमुलेशन फेज’ कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि PFRDA और इंस्टीट्यूट ऑफ एक्चुअरीज ऑफ इंडिया (IAI) मिलकर ऐसे शोध-आधारित और लचीले वित्तीय समाधान विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिनसे सेवानिवृत्त लोगों को नियमित और सुरक्षित आय उपलब्ध कराने में मदद मिल सके।
