गुरूवार, 2 जुलाई

Ujjain-Jaora Greenfield Highway: सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत प्रस्तावित उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गई है। किसानों के विरोध के बीच अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने परियोजना से जुड़े विवादित भूमि अधिग्रहण पर अंतरिम रोक (स्टेटस-को) लगाने का आदेश दिया है। न्यायालय ने संबंधित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं और मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की है।

किन गांवों के किसानों को मिली राहत?

यह अंतरिम राहत मंगरोला, सोडंग और झिरनिया (उन्हेल क्षेत्र) के किसानों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ‘उचित मुआवजा एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013’ के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना आगे बढ़ाई गई।

याचिका में यह भी कहा गया कि किसानों ने वैकल्पिक मार्ग, सरकारी भूमि के उपयोग और इंटरचेंज डिज़ाइन में बदलाव जैसे सुझाव प्रशासन के सामने रखे थे, लेकिन उन पर नियमानुसार विचार नहीं किया गया।

हाईकोर्ट में किसानों की ओर से क्या दलील दी गई?

किसानों की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि आपत्तियों की सुनवाई सक्षम प्राधिकारी के बजाय दूसरे अधिकारी द्वारा की गई, जो स्थापित कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक निर्देशों के अनुरूप नहीं है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि प्रभावित किसानों को अब तक घोषित मुआवजा भी पूरी तरह प्राप्त नहीं हुआ है।

प्रारंभिक सुनवाई के दौरान न्यायालय ने माना कि मामले में कई महत्वपूर्ण वैधानिक प्रश्न विचारणीय हैं। इसी आधार पर अदालत ने फिलहाल विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश पारित किया।

चार गुना मुआवजे का वादा, लेकिन किसानों की शिकायत बरकरार

ग्रीनफील्ड हाईवे को लेकर किसानों के विरोध के बाद राज्य सरकार ने पहले परियोजना में बदलाव करते हुए सामान्य हाईवे विकसित करने और प्रभावित किसानों को चार गुना मुआवजा देने की घोषणा की थी। हालांकि कई किसानों का दावा है कि उन्हें अभी तक घोषित दर के अनुसार भुगतान नहीं मिला है।

नागदा-खाचरौद क्षेत्र के कुछ किसानों का आरोप है कि उन्हें चार गुना के बजाय केवल दोगुने मुआवजे का भुगतान किया गया, जबकि कई प्रभावित परिवार अब भी मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इन दावों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अन्य किसानों पर भी पड़ सकता है असर

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस अंतरिम आदेश के बाद परियोजना से प्रभावित अन्य किसान भी, यदि उन्हें मुआवजा या भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर आपत्ति है, तो अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। हालांकि प्रत्येक मामले का फैसला उसकी अपनी परिस्थितियों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगा।

सिंहस्थ-2028 के लिए अहम है परियोजना

उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे को सिंहस्थ-2028 से पहले क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत करने वाली प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल किया गया है। पिछले कुछ महीनों में इस परियोजना को लेकर मुआवजा, भूमि अधिग्रहण और किसानों के विरोध के मुद्दे लगातार सामने आते रहे हैं।

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