गुरूवार, 2 जुलाई

मानसून के दौरान सड़कें धंसने, पुलों में तकनीकी खामियां आने और सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं अक्सर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाती हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) ने एक नई डिजिटल व्यवस्था तैयार की है। विभाग ने गुजरात के भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना संस्थान (BISAG-N) की तकनीकी सहायता से Incident Report System विकसित कराया है, जिसे 15 जुलाई से पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है।

इस नई व्यवस्था का उद्देश्य किसी भी सड़क, पुल या अन्य सार्वजनिक निर्माण से जुड़ी घटना की सूचना को बिना देरी सीधे जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाना है, ताकि राहत और मरम्मत कार्य समय पर शुरू हो सके।

फोटो अपलोड करते ही अपने आप जुड़ जाएगी लोकेशन

Incident Report System एक मोबाइल आधारित इंटरनल एप्लिकेशन है। इसमें यदि कोई अधिकारी या अधिकृत कर्मचारी सड़क धंसने, पुल क्षतिग्रस्त होने, सड़क दुर्घटना या अन्य तकनीकी समस्या का फोटो अपलोड करता है, तो घटना की लोकेशन स्वतः दर्ज हो जाएगी।

इसके साथ संबंधित तकनीकी रिपोर्ट भी उसी प्लेटफॉर्म पर अपलोड की जाएगी। इसके बाद जिस अधिकारी के स्तर पर कार्रवाई आवश्यक होगी, उसके पास तुरंत सूचना पहुंच जाएगी।

रियल टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ेगी जवाबदेही

नई प्रणाली के जरिए विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और विभागीय मंत्री भी रियल टाइम मॉनिटरिंग कर सकेंगे। इससे यह देखा जा सकेगा कि किस स्थान पर क्या समस्या आई, किस अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई और समाधान की प्रक्रिया किस चरण में है।

डिजिटल ट्रैकिंग के कारण फाइलों के अलग-अलग स्तर पर लंबित रहने की संभावना भी कम होगी और कार्यवाही की निगरानी आसान हो जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट पर निर्भरता होगी कम

लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह के अनुसार, कई बार सड़क धंसने, पुल में खराबी या अन्य तकनीकी समस्याओं की जानकारी समय पर उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती थी। कई मामलों में विभाग को घटनाओं की सूचना मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से मिलती थी।

नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य सूचना के प्रवाह को तेज बनाना है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत, मरम्मत और आवश्यक तकनीकी कार्रवाई बिना अनावश्यक देरी के शुरू की जा सके।

Incident Report System क्या है?

Incident Report System ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसमें किसी भी घटना का पूरा विवरण दर्ज किया जाता है। इसमें सामान्यतः निम्न प्रकार की घटनाएं शामिल की जा सकती हैं—

  • सड़क दुर्घटना या सुरक्षा संबंधी घटना
  • सड़क धंसना या पुल में तकनीकी खराबी
  • सरकारी संपत्ति को नुकसान
  • संभावित खतरे या “Near Miss” जैसी घटनाएं
  • सुरक्षा संबंधी अवलोकन

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद संबंधित अधिकारी को स्वतः सूचना मिलती है और आवश्यकता के अनुसार जांच, सुधारात्मक कार्रवाई, जोखिम विश्लेषण तथा समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

मानसून में मिलेगी तेज प्रतिक्रिया

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान सड़क और पुलों से जुड़ी समस्याओं में समय पर सूचना मिलना सबसे महत्वपूर्ण होता है। डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम के माध्यम से घटनाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, प्रतिक्रिया का समय कम होगा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी बेहतर तरीके से तय की जा सकेगी।

यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो सड़क अवसंरचना से जुड़ी समस्याओं के समाधान की गति बढ़ने के साथ भविष्य में होने वाली समान घटनाओं की रोकथाम के लिए भी उपयोगी डेटा उपलब्ध हो सकेगा.

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