गुरूवार, 2 जुलाई

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच बेहतर सड़क संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से बनाई जा रही कबराई-सागर फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना छतरपुर जिले में अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही है। परियोजना का बड़ा हिस्सा इसी जिले से होकर गुजरता है, लेकिन निर्माण कार्य प्रशासनिक बाधाओं और अधिकारियों की कमी के कारण लगातार प्रभावित हो रहा है। इससे स्थानीय लोगों और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े लोगों में भी चिंता बढ़ रही है।

दो वर्षों से प्रशासनिक अस्थिरता का असर

परियोजना की निगरानी कर रहे एनएचएआई कार्यालय में पिछले करीब दो वर्षों से स्थिर प्रशासनिक व्यवस्था नहीं बन सकी है। प्रोजेक्ट मैनेजर स्तर पर लगातार बदलाव और लंबे समय से पद खाली रहने का सीधा असर निर्माण कार्य की निगरानी और निर्णय प्रक्रिया पर पड़ा है।

परियोजना को उस समय बड़ा झटका लगा था, जब तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनेजर पी.के. चौधरी को कथित रिश्वत मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी का भी तबादला हो गया। तब से प्रोजेक्ट मैनेजर का पद खाली बताया जा रहा है, जिससे निर्माण कार्य की गति प्रभावित हुई है।

223.7 किलोमीटर लंबी परियोजना का बड़ा हिस्सा छतरपुर में

करीब 223.7 किलोमीटर लंबी इस फोरलेन परियोजना की अनुमानित लागत 2,653 करोड़ रुपये है। यह मार्ग कबराई, बंड़ा, दलपतपुर, शाहगढ़, हीरापुर, बड़ा मलहरा, गुलगंज, छतरपुर, गढ़ी मलहरा, उजरा और महोबा जैसे क्षेत्रों को जोड़ता है।

परियोजना को कई चरणों में विकसित किया जा रहा है। छतरपुर जिले में आने वाले फेज-3 और फेज-4 में निर्माण कार्य सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है, जबकि अन्य हिस्सों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रगति देखने को मिली है।

सागर जिले में तेज प्रगति, छतरपुर में धीमी चाल

परियोजना से जुड़े स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सागर जिले के हिस्से में निर्माण कार्य काफी आगे बढ़ चुका है और वहां कई हिस्सों में यातायात भी शुरू हो गया है। इसके विपरीत छतरपुर जिले में काम अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पाया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण की धीमी गति के कारण रोजाना आवाजाही करने वाले यात्रियों, व्यापारियों और परिवहन से जुड़े लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

2026 का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल

परियोजना के लिए अप्रैल 2023 में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी दी गई थी। निर्माण पूरा करने का लक्ष्य वर्ष 2026 निर्धारित किया गया था। हालांकि, प्रशासनिक देरी, अधिकारियों की कमी और प्रक्रियागत बाधाओं के चलते परियोजना तय समयसीमा से पीछे चल रही है।

स्थानीय स्तर पर अब निर्माण कार्य पूरा होने में पहले से अधिक समय लगने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि इस संबंध में संबंधित विभाग की ओर से नई आधिकारिक समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है।

सड़क बनने से पहले बढ़ीं व्यावसायिक गतिविधियां

फोरलेन परियोजना की घोषणा के बाद हाईवे के आसपास कई स्थानों पर होटल, रेस्टोरेंट, दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का विकास शुरू हो गया है। कई इलाकों में जमीन की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई है।

हालांकि, स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि सड़क निर्माण समय पर पूरा नहीं हुआ तो क्षेत्र में निवेश और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।

लोगों की नजर अब एनएचएआई के अगले कदम पर

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की अपेक्षा है कि एनएचएआई जल्द स्थायी प्रोजेक्ट मैनेजर की नियुक्ति कर परियोजना की निगरानी मजबूत करेगा, ताकि लंबे समय से प्रतीक्षित फोरलेन निर्माण कार्य में तेजी लाई जा सके।

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