भोपाल। राजधानी भोपाल में रिहायशी उपयोग के लिए स्वीकृत भवनों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी है। अभियान की शुरुआत अरेरा कॉलोनी और रोहित नगर से की गई है, जहां निरीक्षण के दौरान व्यावसायिक उपयोग पाए जाने पर कई संपत्ति मालिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि आगामी दिनों में कोलार सहित शहर के अन्य क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम की यह कार्रवाई नगरीय विकास एवं आवास विभाग के निर्देशों के तहत शुरू हुई है। इसके लिए सभी जोनों में विशेष सर्वे दल गठित किए गए हैं, जो रिहायशी भवनों के वास्तविक उपयोग का भौतिक सत्यापन कर रहे हैं। पहले चरण में अरेरा कॉलोनी से लेकर रोहित नगर तक सर्वे कर दस्तावेजों सहित स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।
नोटिस में मांगा गया जवाब
नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा ने मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम-2012 और नगर पालिक निगम अधिनियम-1956 का हवाला देते हुए संबंधित भवन स्वामियों से जवाब मांगा है। नोटिस उन संपत्तियों को दिए जा रहे हैं जहां निरीक्षण के दौरान व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती मिली हैं। निगम ने निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं मिलने पर एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
चार साल पुराने सर्वे में मिले थे 150 से अधिक मामले
नगर निगम के लगभग चार वर्ष पुराने सर्वे में अरेरा कॉलोनी में 83 और रोहित नगर में 67 सहित 150 से अधिक ऐसे मामले सामने आए थे, जहां आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवनों में अस्पताल, नर्सिंग होम, बैंक, होटल, शोरूम, दुकानें, कार्यालय और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित पाए गए थे।
अधिकारियों के अनुसार पिछले चार वर्षों में ऐसे मामलों की संख्या में और वृद्धि हुई है। इसी कारण इस बार केवल पुराने रिकॉर्ड की समीक्षा करने के बजाय नए सिरे से मौके पर जाकर सत्यापन कराया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद तेज हुई कार्रवाई
20 मई को Supreme Court of India ने अनधिकृत निर्माण, भूमि उपयोग परिवर्तन और स्वीकृत उपयोग के विपरीत भवनों के इस्तेमाल को लेकर सख्त रुख अपनाया था। न्यायालय ने राज्यों से इस संबंध में कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। बताया जा रहा है कि 4 अगस्त को प्रस्तावित सुनवाई से पहले इसी क्रम में भोपाल में यह विशेष अभियान शुरू किया गया है।
25 हजार संपत्तियों पर भी नजर
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार भोपाल में करीब 25 हजार ऐसी संपत्तियां हैं जो दस्तावेजों में अब भी रिहायशी श्रेणी में दर्ज हैं, जबकि उनसे व्यावसायिक दरों पर संपत्ति कर वसूला जा रहा है। ऐसे मामलों की भी जांच की जा रही है ताकि भूमि उपयोग और भवन उपयोग से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
क्या हो सकता है आगे
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि सर्वे और नोटिस प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अभियान को चरणबद्ध तरीके से पूरे शहर में चलाने की तैयारी की जा रही है, जिससे रिहायशी क्षेत्रों में अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
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