Saturday, 20 June

पन्ना: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में विशेष अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए गुनौर में पदस्थ रहे पूर्व नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला और चौकीदार देवीदयाल दहायत को दोषी करार दिया है। विशेष न्यायालय ने दोनों आरोपियों को भ्रष्टाचार के मामले में 5-5 साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

क्या है पूरा मामला?

मामला वर्ष 2020 का है। जानकारी के अनुसार गुनौर तहसील क्षेत्र के सिली गांव निवासी ब्रजबिहारी प्रजापति अपने खेत से ईंट निर्माण के लिए मिट्टी ट्रैक्टर में भरकर ले जा रहे थे। इसी दौरान तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार रविशंकर शुक्ला ने ट्रैक्टर को रोककर जब्त कर लिया और उसे थाने में खड़ा करवा दिया।

आरोप है कि ट्रैक्टर को छोड़ने के बदले रविशंकर शुक्ला ने ब्रजबिहारी प्रजापति से 35 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी।

लोकायुक्त से की शिकायत

पीड़ित ब्रजबिहारी प्रजापति ने रिश्वत देने के बजाय मामले की शिकायत सागर लोकायुक्त पुलिस से की। शिकायत की जांच के बाद लोकायुक्त टीम ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई।

बताया गया कि 35 हजार रुपये की मांग में से 10 हजार रुपये पहले ही दिए जा चुके थे। इसके बाद शेष 25 हजार रुपये देने के लिए पीड़ित को भेजा गया। जब वह नायब तहसीलदार के सरकारी आवास पहुंचा तो रविशंकर शुक्ला ने राशि अपने पास मौजूद चौकीदार देवीदयाल दहायत को देने के लिए कहा।

रंगे हाथों पकड़े गए थे आरोपी

जैसे ही रिश्वत की रकम चौकीदार को सौंपी गई, पहले से तैनात लोकायुक्त पुलिस की टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ लिया। टीम ने मौके से रिश्वत की रकम भी जब्त कर ली थी।

इसके बाद दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया गया।

अदालत ने सुनाई सजा

मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश सुरेंद्र मेश्राम की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों को अदालत ने पर्याप्त माना।

अदालत ने पूर्व नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत 3 वर्ष और 5 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उन पर कुल 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

वहीं चौकीदार देवीदयाल दहायत को रिश्वत लेने की प्रक्रिया में सहयोगी पाए जाने पर 3 वर्ष और 5 वर्ष के कारावास की सजा तथा 25 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया।

भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त संदेश

विशेष अदालत के इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सरकारी अधिकारियों द्वारा पद का दुरुपयोग कर रिश्वत मांगने के मामलों में न्यायालय के ऐसे फैसले प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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