Sunday, 21 June

भोपाल। ‘एमपी के मन में मोदी, मोदी के मन में एमपी’…। इन्हीं लाइनों के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बार के विधान सभा चुनाव में अपना पूरा चुनावी प्रचार केंद्रित किया है. इसके साथ ही बीजेपी के चुनाव अभियान से धीरे-धीरे मामा शिवराज को ओझल करने का प्रयास केंद्रीय नेतृत्व ने किया, लेकिन मामा ने धमाकेदार वापसी की और इस विधानसभा चुनाव को मोदी बनाम शिवराज बना दिया। देखा जाए तो जंग मोदी और शिवराज के बीच ही थी, कांग्रेस तो किनारे किनारे चलती नजर आई। उसे मुद्दों के बजाय एंटी इनकंबेंसी का सहारा जायदा मिलने की उम्मीद है। 

 असल में शिवराज के बढ़ते कद से परेशान मोदी।ने एक साल पहले ही mp में परिवर्तन का फार्मूला बनाया था, लेकिन वो लगी।नही हो सका। सही बात तो ये है कि कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद जब शिवराज को सीएम बनाया गया, तभी कहा गया था कि मोदी शाह ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है। लेकिन बीजेपी में अनुशासन का हौवा था, सो सब चुप हो गए। 

चुनाव के पहले तक न तो शिवराज को हटाया जा सका और न ही संगठन को निचले स्तर तक पहुंचने के जिम्मेदार माने जाने वाले vd शर्मा को बदला जा सका। 

मोदी और शाह ने फिर फार्मूला बनाया की शिवराज को हाशिए पर रख कर चुनाव लड़ा जाए। शिवराज के प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले सभी नेताओं को विधानसभा के टिकट दे दिए गए। लेकिन ये शिवराज के बजाय उन नेताओं को ही निपटने का कदम साबित हो रहा है। 

बीजेपी के अंदरखाने के सूत्रों की मानें तो टिकट वितरण के दौरान ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आलाकमान से दो टूक सवाल कर लिया था कि उन्हें हटाया जाना है तो अभी बता दिया जाए। इस दौरान उन्होंने जनता के बीच कई भावुक भाषण भी दिए जैसे “मैं चला जाऊंगा तो याद आऊंगा कि नहीं”, “सही बताओ मैं सगा भाई लगता हूं या नहीं” वगैरह वगैरह. लेकिन ज्यों-ज्यों चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे बीजेपी का चुनाव प्रचार अभियान मोदी मय होता चला गया। 

लेकिन दूसरी तरफ शिवराज अपनी रणनीति पर अमल करते हुए अभियान चलाते रहे। सभाओं में का l कर ये कहना कि क्या मामा को फिर सीएम बनना चाहिए या नहीं? ये मोदी को खुली चुनौती ही तो थी। शिवराज खिल कर खेले और उनके निशाने पर देखा जाए तो मोदी ही थे। 

सभा और रोड शो में छाए रहे मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्यप्रदेश में हुई सभी आमसभा में छाए रहे. ऐसा नहीं है कि उन्होंने सीएम शिवराज सिंह का नाम नहीं लिया या उनकी योजनाओं का जिक्र नहीं किया, लेकिन वे अपनी केंद्र की योजनाओं के बखान और कांग्रेस पर निशाना साधने के बीच शिवराज सिंह चौहान को उतनी जगह नहीं दी जितनी प्रदेश के मुख्यमंत्री को मिलनी चाहिए।

संकल्प पत्र में लाडली बहना

लाडली बहना मामले में बीजेपी नेतृत्व बड़ी चूक कर गया। शिवराज ने आज तीन हजार रुपए प्रति माह करने का ऐलान किया था। बड़े बड़े होर्डिंग भी लगाए गए थे। पर संकल्प पत्र में ये लाइन गायब हो गई। आज के विज्ञापन में अचानक मोदी के साथ ही नीचे शिवराज का फोटो भी था और उसमें लाडली बहनों को दिए जाने वाली नकदी तीन हजार तक करने की बात भी कही गई। ये भूल सुधार मानी गई। 

इंदौर में वीडी शर्मा छाए

मोदी का जो इंदौर में रोड शो हुआ उसमे शिवराज नही थे, vd शर्मा की मोदी ने जमकर तारीफ की। इससे फिर चर्चाओं का दौर चल निकला। लेकिन प्रशासन के अंदर से एक आवाज आना शुरू हो गई, चुनाव पूरी निष्पक्षता से कराना है। इसके मायने लोग अपनी अपनी तरह से निकाल रहे हैं। A

Share.
Exit mobile version