मंगलवार, 30 जून

मध्य प्रदेश सरकार ने लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। इसके तहत विभिन्न विभागों में पदोन्नति के लिए पदों का निर्धारण किया जा रहा है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था से आरक्षित वर्ग को दोहरा लाभ मिलेगा और अनारक्षित वर्ग के हिस्से के पद प्रभावित हो सकते हैं।

सोमवार को मंत्रालय में पदोन्नति नियमों की समीक्षा के लिए अपर सचिव अजय कटेसरिया ने विभिन्न विभागों के स्थापना अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में अधिकारियों को नए पदोन्नति नियमों के अनुसार तैयारियां पूरी करने और वरिष्ठता सूची अद्यतन रखने के निर्देश दिए गए।

36 प्रतिशत पद रहेंगे आरक्षित

बैठक में बताया गया कि पदोन्नति नियम-2025 के तहत अनुसूचित जाति के लिए 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के लिए 20 प्रतिशत, यानी कुल 36 प्रतिशत पद आरक्षित रहेंगे। इन चिन्हित पदों पर केवल संबंधित आरक्षित वर्ग के पात्र अधिकारी या कर्मचारी की ही पदोन्नति होगी। यदि किसी संवर्ग में पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होता है तो संबंधित पद रिक्त रहेगा और उसे किसी अन्य वर्ग से नहीं भरा जाएगा।

अनारक्षित श्रेणी में भी सभी वर्गों को अवसर

नियमों के अनुसार अनारक्षित श्रेणी के पद सभी वर्गों के लिए खुले रहेंगे। ऐसे पदों पर चयन वरिष्ठता, गोपनीय चरित्रावली (CR) और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर होगा। यदि किसी आरक्षित वर्ग के अधिकारी की मेरिट अधिक होती है तो वह अनारक्षित पद पर भी चयनित हो सकता है। इसी व्यवस्था को लेकर सामान्य वर्ग के कर्मचारी विरोध जता रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे अनारक्षित वर्ग के हिस्से के पदों की संख्या व्यवहारिक रूप से कम हो सकती है।

मुख्य सचिव के निर्देश के बाद बढ़ी प्रक्रिया

मुख्य सचिव अनुराग जैन पहले ही सभी विभागों को पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार इसका आधार यह है कि पदोन्नति नियम-2025 पर अदालत की ओर से कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है। हालांकि, मामले में अंतिम फैसला अभी सुरक्षित है और आगे विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायालय निर्णय सुनाएगा।

दो वर्षों के रिक्त पदों को ध्यान में रखकर होगी पदोन्नति

विभागीय अधिकारियों के अनुसार पदोन्नति प्रक्रिया दो वर्षों की रिक्तियों के आधार पर की जाएगी। एक बार पदों का निर्धारण होने के बाद उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी। जिन संवर्गों में पद पहले से पदोन्नति के माध्यम से भरे जा चुके हैं, वहां नई पदोन्नति नहीं की जाएगी।

दो लाख से अधिक कर्मचारियों को मिल सकता है लाभ

करीब एक दशक बाद शुरू हो रही इस पदोन्नति प्रक्रिया से राज्य के दो लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारी लाभान्वित हो सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक प्रतिनियुक्ति वाले पद भी पदोन्नति की गणना में शामिल किए जाएंगे और पदोन्नति नियम-2025 लागू होने की तिथि से नई व्यवस्था प्रभावी मानी जाएगी।

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