Friday, 26 June

मध्य प्रदेश में करीब एक दशक से अटकी पदोन्नतियों को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा विभागों को पदोन्नति नियम-2025 के आधार पर तैयारी शुरू करने के संकेत दिए जाने के बाद मंत्रालय और विभिन्न विभागों में पुरानी फाइलें फिर से खंगाली जाने लगी हैं। अधिकारियों ने संभावित विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) बैठकों की तैयारी भी शुरू कर दी है। इसी क्रम में सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 29 जून को सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई है, जिसमें पदोन्नति के लिए पद निर्धारण और प्रक्रिया को अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी।

हाई कोर्ट में फैसला सुरक्षित, सरकार ने बढ़ाई तैयारी

पदोन्नति नियम-2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जबलपुर हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है। पुरानी बेंच में शामिल जजों का तबदला हो गया है अब नई बेंच गठित होगी फिर से नई बेंच अंतिम सुनवाई करेगी और वो ही फैसला सुनाएगी इसमें समय लग सकता है। सरकार का तर्क है कि नए नियम लागू किए जा चुके हैं और इन पर कोई अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक प्रशासनिक तैयारी जारी रखी जा सकती है। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने नियमों के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति दर्ज कराई है।

मध्य प्रदेश में पदोन्नति का मुद्दा 2016 से लगातार विवादों में रहा है। उस समय हाई कोर्ट ने वर्ष 2002 के पदोन्नति नियमों को निरस्त कर दिया था, जिसके बाद लाखों अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित हुई। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और लंबे समय तक कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।

नए नियमों में क्या बदलाव किए गए?

सरकार ने 2025 में नए पदोन्नति नियम लागू किए हैं। इन नियमों में आरक्षण और प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रावधानों को नए तरीके से शामिल किया गया है। व्यवस्था यह रखी गई है कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का अधिकारी मेरिट के आधार पर अनारक्षित श्रेणी के पद पर पदोन्नति प्राप्त करता है, तब भी उसकी गणना आरक्षित वर्ग में ही की जाएगी। इससे भविष्य में संबंधित श्रेणी के आरक्षित पदों की संख्या समायोजित की जा सकेगी।

इसके अलावा प्रत्येक संवर्ग में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रतिनिधित्व का आकलन प्रशासनिक दक्षता और उपलब्ध पदों के आधार पर किया जाएगा। यदि किसी संवर्ग में आरक्षण प्रतिशत में बदलाव की आवश्यकता महसूस होती है, तो इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति की मंजूरी अनिवार्य होगी। एक बार निर्धारित आरक्षण व्यवस्था पांच वर्ष तक प्रभावी रहेगी।

DPC से पहले होगी पदों की गणना

सूत्रों के अनुसार विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक से पहले प्रत्येक विभाग को अपने संवर्गवार पदों की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। आरक्षित और अनारक्षित पदों की गणना के बाद ही पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसी उद्देश्य से सामान्य प्रशासन विभाग ने 29 जून को अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों और सचिवों की बैठक बुलाई है, ताकि सभी विभागों में एक समान प्रक्रिया लागू की जा सके।

सरकार क्यों नहीं करना चाहती देरी?

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सरकार इस बार न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद किसी तरह की तकनीकी या प्रक्रियात्मक देरी नहीं चाहती। इसलिए विभागों को पहले से तैयारी पूरी रखने के निर्देश दिए जा रहे हैं। यदि अदालत से स्थिति स्पष्ट होती है, तो लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेजी से शुरू की जा सकेगी।

कर्मचारियों की नजर अब कोर्ट के फैसले पर

राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों अधिकारी और कर्मचारी अब हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। पदोन्नति नियम-2025 पर आने वाला फैसला न केवल पदोन्नति प्रक्रिया की दिशा तय करेगा, बल्कि आरक्षण और प्रतिनिधित्व से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर भी महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।

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