Friday, 10 July

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि कानून की व्याख्या केवल तकनीकी पहलुओं तक सीमित नहीं रह सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला लंबे समय तक किसी पुरुष के साथ पत्नी की तरह रह चुकी है और उनके संबंध से संतान भी जन्मी है, तो केवल विवाह की वैधानिकता पर सवाल उठाकर उसके भरण-पोषण के अधिकार को नकारना उचित नहीं होगा।

फैमिली कोर्ट के आदेश पर हाई कोर्ट ने जताई आपत्ति

यह मामला रामकली कुशवाहा द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा है। याचिका में 25 जून 2019 को पारित फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें रामकली को विधिक पत्नी मानने से इनकार करते हुए उनका भरण-पोषण का दावा खारिज कर दिया गया था। हालांकि, फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों की नाबालिग पुत्री कु. शिवानी कुशवाहा के लिए प्रतिमाह 2,000 रुपये भरण-पोषण देने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया गया हवाला

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुशील कुमार तिवारी के साथ शांतनु तिवारी और अंजलि मेहरा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के एन. उषा रानी बनाम मूडुदुला श्रीनिवास (2025) मामले में दिए गए निर्णय के अनुसार भरण-पोषण से जुड़े मामलों की व्याख्या सामाजिक न्याय के उद्देश्य को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए। इसलिए महिला के दावे पर केवल विवाह की वैधानिक स्थिति के आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सकता।

धारा 125 सीआरपीसी का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा

हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिला और प्रतिवादी मनोज कुशवाहा लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे तथा उनके संबंध से एक पुत्री का जन्म हुआ। अदालत ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 का मूल उद्देश्य परित्यक्त महिलाओं और बच्चों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। ऐसे मामलों में केवल तकनीकी आधार नहीं, बल्कि संबंधों की वास्तविकता, साथ रहने की अवधि और उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

नए सिरे से होगी सुनवाई

हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के समक्ष लंबित आवेदन को मूल क्रमांक पर बहाल करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि दोनों पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर देकर मामले का नए सिरे से निर्णय किया जाए। अदालत ने दोनों पक्षों को 3 अगस्त 2026 को फैमिली कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश भी दिए हैं।

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