Friday, 10 July

मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल शहडोल जिले में सरकारी स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुढार विकासखंड के शासकीय माध्यमिक विद्यालय अतरिया में भवन अनुपयोगी होने के कारण कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई नियमित स्कूल परिसर में नहीं हो पा रही है। फिलहाल बच्चों की कक्षाएं सामुदायिक भवन और खुले सांस्कृतिक मंच पर संचालित की जा रही हैं।

स्थिति की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि जिस कमरे में विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं, उसी स्थान पर गैस सिलेंडर रखकर मध्याह्न भोजन भी तैयार किया जाता है। सीमित जगह के कारण सभी बच्चों को एक साथ बैठाना संभव नहीं होने पर कई कक्षाओं को खुले मंच पर लगाना पड़ता है।

बारिश के मौसम ने इस वैकल्पिक व्यवस्था की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। खुले मंच पर पढ़ाई के दौरान बारिश शुरू होने पर पढ़ाई बाधित हो जाती है। विद्यार्थियों की किताबें और कॉपियां भीग जाती हैं, जबकि फिसलन के कारण दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।

स्कूल परिसर के बाहर जहां कक्षाएं लगाई जाती हैं, उसके समीप एक खुला और गहरा कुआं भी मौजूद है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए यह लगातार सुरक्षा जोखिम पैदा करता है। छात्राओं गंगा राव और अमृता शर्मा के अनुसार सुरक्षित वातावरण नहीं मिलने से पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है।

इस मामले में जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) अमरनाथ के अनुसार शहडोल जिले में कुल 83 स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर श्रेणी में हैं, जबकि 646 भवनों को मरम्मत की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 10 विद्यालय निजी भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। विभाग के अनुसार 41 विद्यालयों में सुधार कार्य प्रस्तावित है, जबकि 20 नए स्कूल भवनों के निर्माण के लिए जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) मद के तहत प्रस्ताव भेजा गया है।

Share.
Exit mobile version