E20 Petrol News: देशभर में लागू किए जा रहे 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि कुछ वाहनों में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से ईंधन दक्षता (माइलेज) लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकती है, लेकिन उसका कहना है कि इसके बदले मिलने वाले तकनीकी, पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
मंत्रालय ने गिनाए E20 के प्रमुख फायदे
सरकार के अनुसार E20 केवल एथेनॉल मिश्रित ईंधन नहीं, बल्कि बेहतर गुणवत्ता वाला पेट्रोल है। मंत्रालय का कहना है कि इसमें ऑक्टेन रेटिंग अधिक होती है, जिससे इंजन में नॉकिंग कम होती है। इसके अलावा दहन प्रक्रिया अधिक प्रभावी होती है, वाहन की पिकअप और एक्सेलरेशन बेहतर हो सकते हैं, इंजन अपेक्षाकृत साफ रहता है और जीवनचक्र के दौरान कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आती है।
जल्दबाजी में लागू नहीं हुई योजना
मंत्रालय ने उन दावों को भी खारिज किया कि E20 कार्यक्रम बिना पर्याप्त तैयारी के लागू कर दिया गया। सरकार के अनुसार भारत में एथेनॉल मिश्रण की शुरुआत वर्ष 2001 के पायलट प्रोजेक्ट से हुई थी और 2006 में कुछ क्षेत्रों में 5 प्रतिशत मिश्रण लागू किया गया। 2018 की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के बाद एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाई गई और गन्ने के अलावा अन्य फीडस्टॉक को भी शामिल किया गया। इसके बाद 2022 में 10 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य समय से पहले हासिल किया गया और 2025-26 एथेनॉल आपूर्ति वर्ष में 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य पूरा किया गया।
पुराने वाहनों पर क्या होगा असर?
पुराने वाहनों को लेकर भी मंत्रालय ने सफाई दी है। उसके अनुसार E20 को देशभर में लागू करने से पहले इंजन की टिकाऊ क्षमता, फ्यूल सिस्टम, मटेरियल कम्पैटिबिलिटी, जंग लगने की संभावना, ड्राइविंग प्रदर्शन और उत्सर्जन जैसे कई पहलुओं पर व्यापक परीक्षण किए गए।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि वाहन निर्माता कंपनियों की ओर से वास्तविक उपयोग के दौरान E20 के कारण इंजन या उसके पुर्जों में असामान्य घिसावट अथवा जंग जैसी कोई व्यापक समस्या दर्ज नहीं कराई गई है।
हर पेट्रोल पंप पर अलग-अलग ईंधन क्यों नहीं?
कई उपभोक्ता शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 तीनों विकल्प उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। इस पर मंत्रालय का कहना है कि देशभर के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों पर समानांतर आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखना बेहद महंगा और जटिल होगा। इससे परिवहन लागत बढ़ेगी और ईंधन वितरण प्रणाली प्रभावित हो सकती है।
क्या E20 पेट्रोल सस्ता होगा?
सरकार ने स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल का उद्देश्य पेट्रोल की कीमत कम करना नहीं है। एथेनॉल की खरीद किसानों को लाभकारी मूल्य देने के लिए तय दरों पर की जाती है और कई परिस्थितियों में इसकी लागत सामान्य पेट्रोल से अधिक भी हो सकती है। इसलिए पंप पर E20 हमेशा सस्ता मिले, यह जरूरी नहीं है।
मंत्रालय के अनुसार इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव के असर को कम करना है।
सरकार ने बताए कार्यक्रम के बड़े आर्थिक लाभ
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार 2014-15 से शुरू हुए एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के जरिए अब तक:
- विदेशी मुद्रा में 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई।
- लगभग 316 लाख टन कच्चे तेल के आयात की आवश्यकता कम हुई।
- करीब 952 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई।
- किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान हुआ।
उपभोक्ताओं से की अपील
मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे E20 को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट जानकारियों से प्रभावित न हों। सरकार का कहना है कि इस ईंधन को वाहन निर्माता कंपनियों, परीक्षण एजेंसियों, तेल विपणन कंपनियों और नियामक संस्थाओं की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही देशभर में लागू किया गया है।
