Wednesday, 8 July

ग्वालियर के सिंधिया राजघराने से जुड़ा करीब चार दशक पुराना संपत्ति विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia और उनकी तीनों बुआ Vasundhara Raje, Yashodhara Raje Scindia तथा Usha Raje Scindia के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर हुए समझौते की औपचारिक प्रक्रिया बुधवार को ग्वालियर जिला न्यायालय में पूरी की जाएगी। दोनों पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष अपनी सहमति दर्ज कराएंगे।

कोर्ट के निर्देश के बाद बनी सहमति

मामले की पिछली सुनवाई में अदालत ने पक्षकारों को आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने का अवसर देते हुए राजीनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद समझौते का आवेदन जिला न्यायालय में दाखिल किया गया। अदालत ने 90 दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी कर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि निर्धारित अवधि में समझौते की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो संबंधित याचिका दोबारा बहाल की जा सकती है।

1988-89 में शुरू हुआ था विवाद

संपत्ति विवाद की शुरुआत वर्ष 1988-89 में हुई थी। उस समय दिवंगत Madhavrao Scindia और उनकी तीनों बहनों के बीच पैतृक संपत्ति के अधिकार को लेकर मतभेद सामने आए थे। वर्ष 2001 में विमान दुर्घटना में माधवराव सिंधिया के निधन के बाद यह कानूनी विवाद उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच जारी रहा। बाद में वर्ष 2010 में इस मामले को न्यायालय में नया वाद क्रमांक आवंटित किया गया।

बेटियों ने पैतृक संपत्ति में बराबरी के अधिकार का किया दावा

दिवंगत Vijayaraje Scindia की बेटियों वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे ने जिला न्यायालय में दायर वाद में कहा था कि पिता की पैतृक संपत्ति में बेटियों का भी समान वैधानिक अधिकार है और उन्हें उनका हिस्सा मिलना चाहिए। इसके जवाब में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी संपत्ति में अपने अधिकार को लेकर अलग दावा प्रस्तुत किया था।

लंबे समय से चर्चा में रहा मामला

सिंधिया राजघराने की संपत्तियों से जुड़ा यह विवाद मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित पारिवारिक कानूनी मामलों में शामिल रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विवादित संपत्तियों का अनुमानित मूल्य लगभग 40 हजार करोड़ रुपये बताया जाता है। हालांकि, इस मूल्यांकन की कोई हालिया आधिकारिक न्यायिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। यदि अदालत में समझौते की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो चार दशक से अधिक समय से चल रहा यह पारिवारिक विवाद समाप्त होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।

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