Wednesday, 8 July

भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (UTD) में बीटेक चौथे सेमेस्टर (AIML) के नौ सीलबंद प्रश्नपत्रों के लापता होने के मामले की प्रारंभिक जांच में परीक्षा प्रणाली से जुड़ी गंभीर प्रशासनिक खामियां सामने आई हैं। जांच समिति के अनुसार, अत्यंत गोपनीय परीक्षा सामग्री को ऐसे कक्ष में रखा गया था, जहां विद्यार्थियों और अन्य लोगों की नियमित आवाजाही होती थी। इससे प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

परीक्षा नियंत्रक से अतिरिक्त जिम्मेदारियां वापस

मामले की शुरुआती जांच के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा नियंत्रक डॉ. अर्चना तिवारी से उनकी सभी अतिरिक्त जिम्मेदारियां तत्काल प्रभाव से वापस ले ली हैं। सूत्रों के अनुसार, डॉ. तिवारी ने अपना पक्ष विस्तार से रखने के लिए तीन दिन का अतिरिक्त समय मांगा है। जांच समिति अब अपनी विस्तृत रिपोर्ट कुलपति प्रो. आलोक शर्मा को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

विभागीय जांच का दायरा बढ़ेगा

विश्वविद्यालय प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े संविदा संकाय सदस्यों और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी विभागीय जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सार्वजनिक उपयोग वाले कमरे में रखे गए थे गोपनीय प्रश्नपत्र

जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. अर्चना तिवारी के पास स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक के साथ-साथ यूटीडी परीक्षा नियंत्रक का भी अतिरिक्त प्रभार था। इसी कारण प्रश्नपत्रों का बंडल उनके विभाग के एक कमरे में रखा गया। हालांकि प्रश्नपत्र जिस अलमारी में रखे गए थे, उस पर परीक्षा शाखा का उल्लेख था, लेकिन संबंधित कक्ष केवल परीक्षा कार्य तक सीमित नहीं था।

उसी कमरे में केंद्रीय पुस्तकालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे एक फैकल्टी सदस्य भी बैठते थे। लाइब्रेरी से जुड़े कार्य, नो-ड्यूज और अन्य औपचारिकताओं के लिए छात्रों का वहां लगातार आना-जाना रहता था, जिससे गोपनीय परीक्षा सामग्री की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई।

चाबी की सुरक्षा व्यवस्था भी मिली कमजोर

समिति ने यह भी पाया कि जिस दराज में अलमारी की मुख्य चाबी रखी जाती थी, वह सुरक्षित लॉकिंग सिस्टम से लैस नहीं थी। न तो उस पर ताला लगा था और न ही कोई अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी। परीक्षा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि प्रश्नपत्रों जैसी संवेदनशील सामग्री को सीसीटीवी निगरानी वाले स्ट्रांग रूम में रखा जाना चाहिए, जहां केवल अधिकृत परीक्षा कर्मियों को ही प्रवेश की अनुमति हो।

एबीवीपी ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की

प्रश्नपत्र चोरी के मामले को लेकर मंगलवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने विश्वविद्यालय परिसर में कई घंटे तक प्रदर्शन किया। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने के साथ दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

परिषद का कहना है कि केवल अतिरिक्त दायित्व हटाना पर्याप्त कदम नहीं है। जिन अधिकारियों की प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आई है, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए, ताकि पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच पूरी कर सकें।

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