Thursday, 9 July

घरेलू एलपीजी गैस के नए कनेक्शन जारी नहीं किए जाने का विवाद अब हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। इस संबंध में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि नए गैस कनेक्शन रोकने के लिए न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना, आदेश या परिपत्र जारी किया गया है। इसके बावजूद भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और उसके अधिकृत वितरकों द्वारा नए उपभोक्ताओं को कनेक्शन देने से इनकार किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और एलपीजी (सप्लाई एवं वितरण विनियमन) आदेश, 2000 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।

बीपीसीएल को जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय

मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने बीपीसीएल को अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए 15 दिनों का समय दिया है। याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी अनुकृति दीक्षित की ओर से अधिवक्ता राहुल राजपूत ने पैरवी की, जबकि बीपीसीएल का पक्ष अधिवक्ता कपिल जैन ने रखा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है।

याचिका में क्या कहा गया?

याचिका के अनुसार, एलपीजी (रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन) ऑर्डर, 2000 के तहत नए गैस कनेक्शन के पंजीकरण या वितरण से इनकार करना नियमों के विपरीत है। याचिकाकर्ता का दावा है कि बिना किसी वैधानिक आदेश के नए कनेक्शन रोकना उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन है।

बीपीसीएल ने क्या दिया तर्क?

बीपीसीएल की ओर से अदालत में कहा गया कि मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और एलपीजी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए नए कनेक्शन जारी करने पर अस्थायी रोक लगाई गई है। कंपनी का कहना है कि वर्तमान में उसकी प्राथमिकता मौजूदा उपभोक्ताओं को बिना किसी बाधा के एलपीजी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

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