Thursday, 9 July

मध्य प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को एक अहम घटनाक्रम सामने आया। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब यादव पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस नेतृत्व पर लगातार सार्वजनिक रूप से सवाल उठा रहे थे।

कांग्रेस से टकराव के बाद भाजपा में एंट्री

राकेश सिंह यादव का भाजपा में शामिल होना उस राजनीतिक विवाद के कुछ ही दिनों बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि संगठन में निर्णय लेने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और वरिष्ठ नेताओं की बातों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। साथ ही उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे।

कांग्रेस ने किया था निष्कासन का दावा

राकेश सिंह यादव ने कांग्रेस छोड़ने की घोषणा की थी, लेकिन पार्टी ने उनके दावों को स्वीकार नहीं किया। कांग्रेस का कहना था कि यादव ने स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि अनुशासनहीनता के कारण उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया गया। इस संबंध में पार्टी ने आधिकारिक निष्कासन आदेश भी जारी किया था।

संगठनात्मक फैसलों और आरोपों पर जताई थी आपत्ति

कांग्रेस से अलग होने से पहले यादव ने आरोप लगाया था कि पार्टी नेतृत्व ने कुछ मामलों में बिना पर्याप्त दस्तावेज और तथ्यों के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उनका कहना था कि जब उन्होंने इन आरोपों के समर्थन में प्रमाण मांगे तो जवाब देने के बजाय उन्हें नोटिस जारी कर दिया गया। उन्होंने इसे संगठन के भीतर असहमति के प्रति असहिष्णु रवैया बताया था।

राहुल गांधी की कार्यशैली पर भी उठाए थे सवाल

यादव ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व पर भी निशाना साधते हुए संगठनात्मक नियुक्तियों और सदस्यता अभियान में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया था। उनका दावा था कि प्रदेश में कांग्रेस का संगठन लगातार कमजोर हो रहा है और यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए तो आने वाले नगरीय निकाय चुनावों में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

भाजपा के लिए राजनीतिक संदेश, कांग्रेस के लिए चुनौती

भाजपा में राकेश सिंह यादव की एंट्री को मध्य प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हाल के दिनों में कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ उनके तीखे बयानों और उसके बाद भाजपा का दामन थामने से इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि कांग्रेस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि यादव को अनुशासनहीनता के कारण पार्टी से बाहर किया जा चुका था, जबकि भाजपा ने उन्हें औपचारिक रूप से अपने संगठन में शामिल कर लिया है।

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