मंगलवार, 30 जून

हिंदू धर्म में सोमवती और मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है. दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करना शुभ फलदायी माना जाता है. वहीं इस बार महाकुंभ का दूसर अमृत स्नान मौनी अमावस्या के दिन किया जाएगा. कहते हैं इस दिन शुभ मुहूर्त में स्नान-दान के साथ पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान, श्राद्ध आदि भी किया जाता है. जिससे पितृदोष से मुक्ति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है. वहीं मान्यता है इस दिन शुभ मुहूर्त में यह सभी कार्य करने से व्यक्ति को दोगुने फल की प्राप्ति होती है.

कब है मौनी अमावस्या?
हिंदू वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह में की अमावस्या तिथि की शुरुआत मंगलवार, 28 जनवरी को शाम 7 बजकर 37 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन बुधवार 29 जनवरी को होगा. उदयाति​थि के आधार पर मौनी अमावस्या या माघी अमावस्या का पर्व 29 जनवरी को मनाया जाएगा.

मौनी अमावस्या स्नान दान शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, मौनी अमावस्या यानी 29 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 25 मिनट पर शुरू हो रहा है. ये ब्रह्म मुहूर्त 6 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगा. ऐसे में इसी मुहूर्त में स्नान और दान करना शुभ रहेगा. अगर कोई ब्रह्म मुहूर्त में स्नान या दान नहीं कर पाता तो सूर्योदय से सूर्यास्त तक कभी भी स्नान और दान कर सकता है.

मौनी अमावस्या स्नान का महत्व
मौनी अमावस्या के दिन स्नान करने के साथ लोग पितरों का तर्पण तथा पिंडदान भी करते हैं. कहते हैं कि इस दिन पितर धरती पर आते हैं, इसलिए इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान पुण्य करना शुभ माना जाता है. इसके अलावा मौनी अमावस्या के दिन महाकुंभ में अमृत स्नान करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश हो जाता है.

महाकुंभ 2025 अमृत स्नान तिथियां
    मौनी अमावस्या 29 जनवरी 2025 के दिन तीसरा अमृत स्नान होगा.
    बसंत पंचमी 3 फरवरी 2025 के दिन चौथा अमृत स्नान होगा.
    माघ पूर्णिमा 12 फरवरी 2025 के दिन पांचवा अमृत स्नान होगा.
    महाशिवरात्रि 26 फरवरी 2025 के दिन आखिरी अमृत स्नान होगा.

 


Source : Agency

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