अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड करीब 68 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक फिसल गया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही दोबारा शुरू होने की उम्मीद ने सप्लाई संबंधी चिंताओं को कम किया है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
रणनीतिक तेल भंडार कीमतों को दे सकते हैं सहारा
कमोडिटी विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल में गिरावट अनिश्चितकाल तक जारी रहने की संभावना कम है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि कई देशों के रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Oil Reserves) पिछले वर्षों में काफी कम हुए हैं। ऐसे में यदि देश अपने भंडार को फिर से भरने की दिशा में कदम बढ़ाते हैं, तो वैश्विक मांग बढ़ सकती है और इससे कीमतों को समर्थन मिल सकता है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) भी संकेत दे चुका है कि वैश्विक इन्वेंट्री ऐतिहासिक रूप से निचले स्तरों के करीब बनी हुई है।
तकनीकी संकेत अभी भी स्पष्ट नहीं
चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च (कमोडिटी एवं करेंसी) विश्लेषक आमिर माकदा के अनुसार, मौजूदा चार्ट पैटर्न यह नहीं दर्शाते कि बाजार ने अभी कच्चे तेल का निचला स्तर (Bottom) बना लिया है। उनके मुताबिक फिलहाल पॉजिटिव रिवर्सल या मजबूत शॉर्ट कवरिंग जैसे संकेत नहीं दिख रहे हैं, इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि गिरावट पूरी तरह थम चुकी है।
65 डॉलर का स्तर रहेगा अहम
विश्लेषकों के अनुसार WTI क्रूड के लिए 65 डॉलर प्रति बैरल का स्तर महत्वपूर्ण तकनीकी सपोर्ट माना जा रहा है। यदि कीमतें इसके नीचे टिकती हैं, तो बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और सप्लाई की स्थिति आगे की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
युद्ध से पहले के स्तर पर लौटी कीमतें
ट्रेडबुल्स सिक्योरिटीज के भाविक पटेल का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें अब लगभग उस स्तर पर लौट आई हैं, जहां वे अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से पहले थीं। हालांकि, उनका मानना है कि बाजार फिलहाल सप्लाई सामान्य होने को लेकर काफी आशावादी है और आने वाले दिनों में किसी भी नए भू-राजनीतिक घटनाक्रम से कीमतों में उतार-चढ़ाव फिर बढ़ सकता है।
कम इन्वेंट्री बनी हुई है चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तेल भंडार अभी भी दबाव में हैं। OECD देशों की कमर्शियल इन्वेंट्री कई वर्षों के निचले स्तर के आसपास बनी हुई है, जबकि अमेरिकी स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) भी ऐतिहासिक रूप से कम स्तरों पर है। ऐसे में यदि मांग बढ़ती है या सप्लाई फिर बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है।
