Inflation in India: भारत में खुदरा महंगाई जून 2026 में फिर तेज हो सकती है। अर्थशास्त्रियों के एक सर्वे के अनुसार, जून में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर निकल सकती है। यदि अनुमान सही साबित होता है, तो यह पिछले 16 महीनों में पहली बार होगा जब खुदरा महंगाई केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से अधिक दर्ज होगी।
4.3% रहने का अनुमान, 13 जुलाई को आएंगे आधिकारिक आंकड़े
3 से 9 जुलाई के बीच किए गए Reuters के सर्वे में शामिल 37 अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि जून में CPI महंगाई बढ़कर 4.3% रह सकती है। मई में यह दर 3.93% थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) 13 जुलाई को जून के आधिकारिक महंगाई आंकड़े जारी करेगा। सर्वे में अनुमान 3.65% से 5.50% के बीच रहे हैं।
किन वजहों से बढ़ रहा है महंगाई का दबाव?
विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई में संभावित बढ़ोतरी व्यापक स्तर पर मांग बढ़ने की वजह से नहीं, बल्कि खाद्य पदार्थों, ईंधन और कुछ सेवा क्षेत्रों में कीमतें धीरे-धीरे बढ़ने का परिणाम है। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी और ऊर्जा बाजार में तेजी का असर भी धीरे-धीरे खुदरा कीमतों तक पहुंच रहा है, हालांकि इसका पूरा प्रभाव अभी दिखाई नहीं दे रहा है।
कमजोर मानसून और एल नीनो बढ़ा सकते हैं चिंता
आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि एल नीनो की स्थिति मानसून को प्रभावित करती है, तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों में और तेजी आने की आशंका है। कमजोर मानसून पहले से ही महंगाई के लिए एक प्रमुख जोखिम माना जा रहा है।
ईंधन महंगा, परिवहन लागत पर असर
मई के दौरान सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी की थी। इसका असर परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत पर पड़ा है, जिससे विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
पश्चिम एशिया तनाव भी बढ़ा रहा जोखिम
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका-ईरान तनाव दोबारा बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का खतरा बना हुआ है। यदि ऐसा होता है, तो भारत में आयातित महंगाई और बढ़ सकती है तथा आने वाले महीनों में CPI पर इसका असर दिखाई दे सकता है।
RBI ने फिलहाल ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव
महंगाई संबंधी जोखिमों के बावजूद RBI ने पिछले महीने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर 5.25% पर स्थिर रखी थी। हालांकि इससे पहले हुए सर्वे में कई अर्थशास्त्रियों ने वर्ष के अंत तक कम से कम एक बार दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई थी।
थोक महंगाई भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई
Reuters के सर्वे के अनुसार, जून में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई मामूली घटकर 9.15% रहने का अनुमान है, जबकि मई में यह 9.68% थी। ईंधन का अधिक भार होने के कारण WPI पर ऊर्जा कीमतों का असर CPI की तुलना में ज्यादा दिखाई देता है। वहीं खाद्य और ईंधन को छोड़कर कोर महंगाई जून में करीब 3.95% रहने का अनुमान लगाया गया है। भारत आधिकारिक तौर पर कोर महंगाई के आंकड़े जारी नहीं करता।