अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार पर देखने को मिला। बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में 5% से अधिक की तेज बढ़त दर्ज की गई, जिससे दोनों प्रमुख वैश्विक बेंचमार्क करीब दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गए। बाजार में यह तेजी उस समय आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई आगे भी जारी रह सकती है।
ब्रेंट क्रूड का भाव 5% से अधिक बढ़कर लगभग 77.8 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड करीब 73.8 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखा। दोनों बेंचमार्क इससे पहले जून के अंतिम सप्ताह के बाद पहली बार इतने ऊंचे स्तर पर पहुंचे।
ट्रंप के बयान से बढ़ी सप्लाई को लेकर चिंता
बाजार में तेजी की बड़ी वजह राष्ट्रपति ट्रंप का वह बयान रहा जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के साथ संघर्ष खत्म करने के लिए हुआ अंतरिम समझौता अब प्रभावी नहीं रहा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका आगे और सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इस बयान के बाद निवेशकों में मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई।
ईरानी तेल पर अमेरिकी सख्ती का भी असर
तेल बाजार पर दबाव पहले से ही बना हुआ था क्योंकि अमेरिका ने ईरानी कच्चे तेल की बिक्री की अनुमति देने वाला सामान्य लाइसेंस वापस ले लिया है। इस फैसले के बाद मंगलवार को भी तेल की कीमतों में लगभग 3% की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी, जबकि बुधवार को तनाव बढ़ने के साथ तेजी और तेज हो गई।
विश्लेषकों की राय
कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि हाल के घटनाक्रम ने निवेशकों की उस उम्मीद को झटका दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द कम होगा। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि मध्य पूर्व में हालात किस दिशा में बढ़ते हैं और क्या तेल आपूर्ति पर वास्तविक असर पड़ता है।
सोने की कीमतों में क्यों आई गिरावट?
जहां कच्चे तेल में तेजी रही, वहीं सोने की कीमतों में दबाव देखने को मिला। स्पॉट गोल्ड लगभग 0.8% फिसलकर 4,072 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया। भारत में भी बुधवार को सोने की कीमतों में करीब ₹800 प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई और दिल्ली में इसका भाव करीब ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम रहा। वहीं चांदी की कीमत लगभग ₹2,39,800 प्रति किलोग्राम पर लगभग स्थिर रही।
आगे किस पर रहेगी बाजार की नजर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है या मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वहीं निवेशक अमेरिकी नीतिगत फैसलों, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक मांग के संकेतों पर भी नजर बनाए हुए हैं।