ITR Deadline 2026: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर अब तक 1.30 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके हैं। इनमें से करीब 1.24 करोड़ रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन भी पूरा हो चुका है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि बड़ी संख्या में करदाता समय रहते अपनी टैक्स संबंधी औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम समय तक इंतजार करने के बजाय निर्धारित समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करना बेहतर रहता है। इससे पोर्टल पर बढ़ने वाले दबाव, तकनीकी दिक्कतों और संभावित अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सकता है।
केवल ITR फाइल करना पर्याप्त नहीं, ई-वेरिफिकेशन भी जरूरी
आयकर रिटर्न जमा करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। यदि निर्धारित समय में रिटर्न सत्यापित नहीं किया जाता, तो उसे वैध रूप से दाखिल नहीं माना जाता। करदाता आधार OTP, नेट बैंकिंग, बैंक अकाउंट EVC या अन्य उपलब्ध माध्यमों से अपना रिटर्न सत्यापित कर सकते हैं।
समय सीमा चूकने पर क्या हो सकते हैं नुकसान?
यदि कोई करदाता नियत तिथि के बाद ITR दाखिल करता है, तो उसे कई तरह के वित्तीय नुकसान उठाने पड़ सकते हैं, जिनमें शामिल हैं—
- लेट फीस: आयकर कानून के तहत अधिकतम ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है। हालांकि, जिनकी कुल आय ₹5 लाख तक है, उनके लिए अधिकतम शुल्क ₹1,000 है।
- ब्याज का भुगतान: यदि कोई टैक्स बकाया है तो उस पर देरी की अवधि के लिए प्रति माह 1% की दर से ब्याज देना पड़ सकता है।
- हानियों का कैरी फॉरवर्ड प्रभावित: समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करने पर व्यवसायिक या पूंजीगत हानियों (जहां लागू हो) को अगले वर्षों में समायोजित करने का लाभ नहीं मिल सकता।
चार्टर्ड अकाउंटेंट की सलाह
चार्टर्ड अकाउंटेंट गौरव गुप्ता के अनुसार, इस वर्ष अलग-अलग श्रेणी के करदाताओं के लिए अलग-अलग अंतिम तिथियां निर्धारित की गई हैं। ऐसे में संबंधित समय सीमा के भीतर ITR दाखिल करना चाहिए। अंतिम दिनों में फाइलिंग करने पर तकनीकी समस्याओं की संभावना बढ़ जाती है, जिससे देरी होने पर लेट फीस, ब्याज और अन्य कर संबंधी लाभ प्रभावित हो सकते हैं।
किसके लिए क्या है अंतिम तिथि?
| करदाता की श्रेणी | आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि |
|---|---|
| नौकरीपेशा, पेंशनभोगी और अन्य व्यक्तिगत करदाता (जिनका टैक्स ऑडिट लागू नहीं है) | 31 जुलाई 2026 |
| व्यवसायी और प्रोफेशनल्स (जिन पर टैक्स ऑडिट लागू नहीं है) | 31 अगस्त 2026 |
| टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले व्यवसाय/फर्म | 31 अक्टूबर 2026 |
| ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े विशेष मामले | 30 नवंबर 2026 |
ध्यान दें: रिटर्न दाखिल करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन करना न भूलें। समय पर फाइलिंग और सत्यापन से रिफंड की प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत तेज हो सकती है और अनावश्यक नोटिस या देरी की संभावना कम रहती है।