Sunday, 14 June

Solar Panel Rules Changed: गर्मियों में बढ़ते बिजली बिलों से राहत पाने के लिए देशभर में लोग तेजी से रूफटॉप सोलर सिस्टम की ओर रुख कर रहे हैं। केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना भी इस बदलाव को बढ़ावा दे रही है। इसी बीच सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो सोलर पैनल लगवाने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा आसान और लचीला बना सकता है।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने स्पष्ट किया है कि पीएम सूर्य घर योजना के तहत जो उपभोक्ता केंद्र सरकार की सब्सिडी नहीं लेना चाहते, वे अब ‘गिव इट अप’ (Give It Up) विकल्प चुन सकते हैं। इस विकल्प का चयन करने के बाद उपभोक्ताओं को केवल डीसीआर (DCR) पैनल लगाने की अनिवार्यता से छूट मिल जाएगी और वे अपनी जरूरत, पसंद तथा बजट के अनुसार अन्य उपलब्ध सोलर पैनल भी चुन सकेंगे।

क्या है नया बदलाव?

अब तक पीएम सूर्य घर योजना के तहत सब्सिडी का लाभ लेने के लिए भारत में निर्मित डीसीआर (Domestic Content Requirement) सोलर मॉड्यूल और स्वीकृत सूची (ALMM) में शामिल उपकरणों का उपयोग करना जरूरी था। इस व्यवस्था का उद्देश्य घरेलू सोलर विनिर्माण को बढ़ावा देना था।

नए प्रावधान के तहत जो उपभोक्ता सरकारी सब्सिडी छोड़ने को तैयार हैं, उन्हें इन शर्तों से राहत मिलेगी। वे गैर-डीसीआर (Non-DCR) सोलर पैनल भी अपने घर की छत पर लगवा सकेंगे। यह सुविधा 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी।

किन लोगों को मिलेगा फायदा?

यह बदलाव विशेष रूप से उन उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी माना जा रहा है जो सब्सिडी की बजाय कम शुरुआती लागत और अधिक विकल्पों को प्राथमिकता देते हैं।

ज्यादा विकल्प, बजट के अनुसार चयन

देश में डीसीआर सोलर पैनलों की मांग लगातार बढ़ रही है। कई क्षेत्रों में उपलब्धता सीमित होने के कारण कीमतें भी प्रभावित होती हैं। ऐसे में गैर-डीसीआर पैनलों के विकल्प खुलने से उपभोक्ताओं को बाजार में उपलब्ध विभिन्न ब्रांड और कीमतों में चयन का मौका मिलेगा।

इंस्टॉलेशन में कम होगी देरी

कई बार स्वीकृत पैनलों की सीमित उपलब्धता के कारण सोलर प्रोजेक्ट्स में देरी होती है। नए नियम के बाद उपभोक्ता अपनी पसंद के पैनल चुनकर इंस्टॉलेशन प्रक्रिया को तेजी से पूरा कर सकेंगे।

नेट मीटरिंग की सुविधा रहेगी जारी

‘गिव इट अप’ विकल्प चुनने का मतलब केवल केंद्र सरकार की सब्सिडी छोड़ना है। इसके बावजूद उपभोक्ता नेट मीटरिंग की सुविधा का लाभ लेते रहेंगे। यानी अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर उसका लाभ प्राप्त किया जा सकेगा।

इस विकल्प को चुनने के लिए अलग से किसी कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। यह सुविधा पीएम सूर्य घर योजना के राष्ट्रीय पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है।

सब्सिडी लें या छोड़ें?

सामान्य तौर पर 3 किलोवाट क्षमता का घरेलू सोलर सिस्टम लगाने में लगभग 1.8 लाख रुपये से 2.3 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है।

यदि सब्सिडी लेते हैं

केंद्र सरकार की ओर से 78,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता मिल सकती है। हालांकि इसके लिए योजना में निर्धारित डीसीआर और अन्य मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।

यदि सब्सिडी छोड़ते हैं

उपभोक्ता को सरकारी सब्सिडी नहीं मिलेगी, लेकिन वह अपनी जरूरत और बजट के अनुसार उपलब्ध सोलर पैनलों का चयन कर सकेगा। कुछ मामलों में शुरुआती लागत को नियंत्रित करने के लिए यह विकल्प उपयोगी साबित हो सकता है।

फैसला लेने से पहले इन बातों पर करें विचार

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह कदम बाजार में उपलब्धता की चुनौती को देखते हुए व्यावहारिक है। हालांकि उपभोक्ताओं को सब्सिडी छोड़ने का निर्णय लेने से पहले अपने राज्य की नीतियों की भी जांच करनी चाहिए।

कई राज्यों में केंद्र सरकार की सहायता के अलावा राज्य सरकारें भी अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान करती हैं। ऐसे में कुल वित्तीय लाभ काफी बढ़ सकता है। इसलिए सोलर सिस्टम लगवाने से पहले लागत, उपलब्ध सब्सिडी, पैनल की गुणवत्ता और दीर्घकालिक बचत का तुलनात्मक मूल्यांकन करना जरूरी है।

सरकार के नए ‘गिव इट अप’ विकल्प ने रूफटॉप सोलर उपभोक्ताओं को अधिक स्वतंत्रता दी है। अब लोग अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार सब्सिडी और पैनल चयन के बीच फैसला कर सकते हैं। हालांकि अंतिम निर्णय लेते समय केवल शुरुआती लागत ही नहीं, बल्कि उपलब्ध सरकारी सहायता और लंबे समय में मिलने वाली बचत को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा।

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