Saturday, 27 June

मध्य प्रदेश के सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में भर्ती एक मरीज की मौत के मामले में प्रारंभिक जांच में गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही के संकेत मिले हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान उपयोग के लिए सुरक्षित रखा गया हाई-रिस्क एनेस्थीसिया इंजेक्शन निर्धारित समय से एक दिन पहले ही मरीज को आईवी (इंट्रावेनस) के माध्यम से लगा दिया गया। इसके बाद मरीज की तबीयत तेजी से बिगड़ गई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

गले की गांठ की जांच के लिए कराया गया था भर्ती

मृतक की पहचान देवेंद्र पाठक के रूप में हुई है। उन्हें गले में गांठ की जांच और उपचार के लिए बीएमसी के ईएनटी विभाग में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, 13 जून को उनकी बायोप्सी प्रस्तावित थी। ऑपरेशन के दौरान उपयोग के लिए परिजनों से एट्राक्यूरियम बेसीलेट (Atracurium Besylate) इंजेक्शन मंगवाया गया था, जो सामान्यतः ऑपरेशन थिएटर में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की निगरानी में दिया जाता है।

शुरुआती जांच में लापरवाही सामने आई

प्रारंभिक जांच में आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात नर्स ने 12 जून को ही यह इंजेक्शन मरीज को आईवी के जरिए लगा दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, इंजेक्शन लगने के कुछ ही मिनटों बाद मरीज को सांस लेने में गंभीर दिक्कत हुई और उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई। चिकित्सकों ने तत्काल आपातकालीन उपचार और सीपीआर (CPR) दिया तथा मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया, लेकिन कई दिनों तक इलाज चलने के बाद 23 जून को उनकी मौत हो गई।

एट्राक्यूरियम बेसीलेट क्या है?

एट्राक्यूरियम बेसीलेट एक मसल रिलैक्सेंट दवा है, जिसका उपयोग सामान्य एनेस्थीसिया के दौरान मरीज की मांसपेशियों को शिथिल करने और ऑपरेशन के लिए आवश्यक परिस्थितियां बनाने में किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दवा नियंत्रित वातावरण और प्रशिक्षित एनेस्थीसिया टीम की निगरानी में ही दी जाती है। बिना आवश्यक तैयारी या निगरानी के इसके उपयोग से गंभीर श्वसन संबंधी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।

परिजनों ने की कार्रवाई की मांग

मृतक के परिजनों ने पूरे मामले को चिकित्सकीय लापरवाही बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मामले की शिकायत पुलिस को भी दी गई है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अपने-अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं। फिलहाल अंतिम जांच रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

स्वास्थ्य विभाग ने दिए जांच के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक जांच के आधार पर संबंधित नर्स को निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

आधिकारिक जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल उपलब्ध जानकारी प्रारंभिक जांच और संबंधित अधिकारियों के शुरुआती निष्कर्षों पर आधारित है। विस्तृत विभागीय जांच और अन्य आधिकारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मरीज की मौत के लिए किस स्तर तक जिम्मेदारी तय होती है।

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