Tuesday, 14 July

मध्य प्रदेश में पदोन्नति (प्रमोशन) में आरक्षण से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले की सुनवाई मंगलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की विशेष पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत में अपना जवाब दाखिल करते हुए कहा कि पदोन्नति में आरक्षण का निर्णय पिछड़ेपन और शासकीय सेवाओं में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व से संबंधित उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लिया जा रहा है।

सुनवाई के बाद विशेष पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अपने दावों के समर्थन में संबंधित कर्मचारियों का आवश्यक डेटा याचिकाकर्ताओं के साथ साझा करे। साथ ही याचिकाकर्ताओं को जवाबी बहस की तैयारी के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई 21 जुलाई तय की गई।

विशेष पीठ ने शुरू की मामले की सुनवाई

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया के स्वयं को इस मामले की सुनवाई से अलग करने के बाद गठित विशेष पीठ ने सुनवाई शुरू की। इस पीठ में न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति विनय सराफ शामिल हैं। राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष अपना विस्तृत पक्ष रखते हुए पदोन्नति में आरक्षण की प्रक्रिया को उपलब्ध आंकड़ों के अनुरूप बताया।

कोर्ट ने सरकार से मांगा संबंधित कर्मचारियों का डेटा

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार जिन तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर अपना पक्ष रख रही है, उनसे संबंधित डेटा याचिकाकर्ताओं को भी उपलब्ध कराया जाए। अदालत का मानना है कि इससे सभी पक्षों को तथ्यों के आधार पर अपनी दलीलें रखने का समान अवसर मिलेगा।

21 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

विशेष पीठ ने याचिकाकर्ताओं को दस्तावेजों का अध्ययन करने और जवाबी बहस की तैयारी के लिए समय दिया है। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी, जिसमें दोनों पक्ष आगे की दलीलें पेश करेंगे।

लाखों कर्मचारियों पर पड़ सकता है असर

पदोन्नति में आरक्षण से जुड़ा यह मामला मध्य प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारियों के लिए अहम माना जा रहा है। इस मामले के अंतिम निर्णय का प्रभाव राज्य में पदोन्नति, वरिष्ठता और सेवा संबंधी व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।

प्रमुख बातें

  • राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया।
  • सरकार ने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण पिछड़ेपन और अपर्याप्त प्रतिनिधित्व के आंकड़ों के आधार पर दिया जा रहा है।
  • हाई कोर्ट ने संबंधित कर्मचारियों का डेटा याचिकाकर्ताओं के साथ साझा करने के निर्देश दिए।
  • विशेष पीठ ने अगली सुनवाई 21 जुलाई निर्धारित की।
  • फैसले का प्रभाव प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारियों की पदोन्नति और वरिष्ठता पर पड़ सकता है।
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