मध्यप्रदेश में गुमशुदगी के मामलों को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव किया गया है। अब किसी महिला, पुरुष या नाबालिग बालक-बालिका के लापता होने की सूचना मिलने पर पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करनी होगी। शिकायतकर्ता को पहले खुद तलाश करने या बाद में आने जैसी सलाह देकर मामला टालना अब संभव नहीं होगा।
पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने राज्य की सभी पुलिस इकाइयों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि गुमशुदगी की सूचना मिलते ही विधिसम्मत कार्रवाई शुरू की जाए। इस आदेश का उद्देश्य लापता व्यक्तियों की जल्द से जल्द तलाश सुनिश्चित करना और उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देना है।
सभी पुलिस अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश
पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के सभी पुलिस आयुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों (IG), उप पुलिस महानिरीक्षकों (DIG) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को निर्देश दिए हैं कि गुमशुदगी के प्रत्येक मामले में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सभी थानों में इस व्यवस्था का सख्ती से पालन हो।
निर्देशों के अनुसार, एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद जांच शुरू की जाएगी और लापता व्यक्ति की तलाश के लिए उपलब्ध सभी कानूनी और तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बाद लागू हुई व्यवस्था
गुमशुदगी के मामलों में यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है। वर्ष 2012 में ‘बचपन बचाओ आंदोलन बनाम भारत सरकार’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी गुमशुदा नाबालिग बच्चों के मामलों में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।
हाल ही में ‘जी. गणेश बनाम तमिलनाडु राज्य एवं अन्य’ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाते हुए स्पष्ट किया कि केवल नाबालिग ही नहीं, बल्कि हर गुमशुदा व्यक्ति चाहे वह महिला हो या पुरुष के मामले में भी एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होगा।
गुमशुदगी की सूचना मिलते ही शुरू होगी जांच
पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति की गुमशुदगी की सूचना मिलते ही संबंधित थाने को तुरंत एफआईआर दर्ज करनी होगी। इसके बाद बिना विलंब जांच शुरू की जाएगी और लापता व्यक्ति का पता लगाने के लिए सभी आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाओं और तकनीकी माध्यमों का उपयोग किया जाएगा।