MP Pramotion News: मध्य प्रदेश सरकार ने पदोन्नति नियम-2025 के तहत 1 जुलाई 2026 से अधिकारी-कर्मचारियों की नियमित पदोन्नति प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही सभी विभागों में पात्रता का नए सिरे से परीक्षण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (ACR), विभागीय जांच, आपराधिक प्रकरण, न्यायालयीन मामलों और लोकायुक्त से जुड़े लंबित मामलों को प्रमुख आधार बनाया गया है।
किन कर्मचारियों को नहीं मिलेगी पदोन्नति?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारी-कर्मचारियों की एसीआर में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज है या जो विभागीय जांच, आपराधिक प्रकरण, न्यायालयीन विवाद अथवा लोकायुक्त जांच का सामना कर रहे हैं, उन्हें नियमित पदोन्नति का लाभ नहीं दिया जाएगा। ऐसे मामलों में यदि संबंधित अधिकारी या कर्मचारी वर्तमान में किसी उच्च पद का कार्यवाहक प्रभार संभाल रहे हैं, तो वह प्रभार भी वापस लिया जाएगा।
कार्यवाहक प्रभार पर भी होगा असर
पदोन्नति प्रक्रिया के दौरान केवल नियमित प्रमोशन ही नहीं, बल्कि पहले से दिए गए कार्यवाहक प्रभार की भी समीक्षा की जा रही है। यदि जांच के दौरान कोई अधिकारी या कर्मचारी निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो उसका अतिरिक्त प्रभार भी समाप्त किया जा सकता है।
क्यों देना पड़ा था कार्यवाहक प्रभार?
प्रदेश में नियमित पदोन्नतियां उस समय रुक गई थीं, जब हाई कोर्ट ने पदोन्नति नियम-2002 को निरस्त कर दिया था। इसके बाद प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसलिए वर्ष 2021 में राज्य सरकार ने अंतरिम व्यवस्था के तहत पात्र अधिकारी-कर्मचारियों को उच्च पद का कार्यवाहक प्रभार देने का निर्णय लिया था।
उस समय भी एसीआर और सेवा अभिलेखों की जांच के बाद ही यह प्रभार दिया गया था। साथ ही आदेश में यह स्पष्ट किया गया था कि यह व्यवस्था केवल नियमित पदोन्नति होने तक ही प्रभावी रहेगी।
कई विभागों में चल रही पात्रता की दोबारा समीक्षा
नियमित पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब विभिन्न विभागों में पात्रता का दोबारा परीक्षण किया जा रहा है। पुलिस, राजस्व, सहकारिता, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा सहित कई विभागों में बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी कार्यवाहक प्रभार पर कार्यरत हैं।
पुलिस विभाग में ही आरक्षक से लेकर निरीक्षक स्तर तक करीब 15 हजार कर्मचारियों को उच्च पद का कार्यवाहक प्रभार मिला हुआ है। इन सभी मामलों में अब एसीआर, विभागीय रिकॉर्ड और लंबित प्रकरणों की समीक्षा के आधार पर पदोन्नति के लिए अंतिम पात्रता तय की जा रही है।

