छतरपुर। देश की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना के पहले चरण में लगभग 3,400 करोड़ रुपये की लागत से ढोड़न बांध का निर्माण किया जा रहा है। इसके बाद दूसरे चरण में बांध से उत्तर प्रदेश के बरुआसागर तक 218 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर बनाई जाएगी। इस नहर से कई माइनर और सब-माइनर नहरें निकाली जाएंगी, जिनके जरिए बुंदेलखंड के बड़े हिस्से को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
परियोजना के लिए नहरों का सर्वे और रूट प्लान तैयार किया जा चुका है। छतरपुर जिले के 54 गांवों से होकर नहरें गुजरेंगी। जिन किसानों की जमीन नहर निर्माण के लिए अधिग्रहित होगी, उन्हें सरकार अब कलेक्टर गाइडलाइन मूल्य का चार गुना मुआवजा देगी।
54 गांवों में होगा भूमि अधिग्रहण
परियोजना के तहत जिन गांवों से नहर निकलेगी, वहां भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब पात्र किसानों को मुआवजा राशि का भुगतान किया जाना है। अधिकारियों के अनुसार नई मुआवजा नीति लागू होने के बाद किसानों को पहले की तुलना में अधिक आर्थिक लाभ मिलेगा।
नई व्यवस्था के अनुसार यदि किसी जमीन का सरकारी मूल्य एक लाख रुपये है, तो अधिग्रहण की स्थिति में किसान को चार लाख रुपये तक मुआवजा दिया जाएगा।
पहले चरण में 14 गांव हुए थे प्रभावित
ढोड़न बांध के निर्माण से पहले चरण में 14 गांव डूब क्षेत्र में आए थे। इन गांवों के प्रभावित परिवारों का पुनर्वास कर उन्हें अन्य स्थानों पर बसाया गया है। सरकार ने पुनर्वास कॉलोनियां विकसित की हैं और प्रभावितों को निर्धारित नीति के अनुसार मुआवजा भी दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार डूब क्षेत्र से प्रभावित करीब 5,000 परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी की गई।
नौगांव क्षेत्र के सबसे अधिक गांव परियोजना में शामिल
मुख्य नहर और उससे जुड़ने वाली शाखा नहरों का सबसे अधिक प्रभाव नौगांव क्षेत्र में दिखाई देगा। जिले के लगभग 21 गांव इसी क्षेत्र के हैं, जहां से नहर का मार्ग प्रस्तावित है। इससे भविष्य में बड़ी संख्या में किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।
बुंदेलखंड में सिंचाई बढ़ाने पर फोकस
केन-बेतवा लिंक परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई का दायरा बढ़ाना और जल उपलब्धता में सुधार करना है। मुख्य नहर से जुड़ने वाली माइनर नहरों के माध्यम से कृषि भूमि तक पानी पहुंचाया जाएगा, जिससे वर्षा पर निर्भर खेती करने वाले किसानों को राहत मिलने की संभावना है।
अधिकारी ने क्या कहा?
परियोजना की कार्यपालन यंत्री उमा गुप्ता ने बताया कि सरकार ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा प्रावधानों में संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत किसानों को उनकी जमीन का सरकारी मूल्य का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब चिन्हित किसानों को भुगतान किया जाएगा। साथ ही ढोड़न बांध से बरुआसागर तक मुख्य नहर तथा उससे जुड़ने वाली माइनर नहरों का निर्माण अगले चरण में किया जाएगा।
