Monday, 22 June

मध्य प्रदेश के दतिया जिले में वर्ष 2018 में राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर हुए चक्का जाम, पुलिस पर पथराव, मारपीट और वाहनों में तोड़फोड़ के बहुचर्चित मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी स्वप्निल वर्मा की अदालत ने मामले में 27 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को छह-छह माह के सश्रम कारावास और 500-500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

सड़क हादसे के बाद हुआ था चक्का जाम

अभियोजन के अनुसार, 4 जनवरी 2018 को जिगना थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि कटीली तिराहा स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत के बाद परिजन और स्थानीय लोगों ने चक्का जाम कर दिया है। घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़क पर बैठ गए, जिससे हाईवे पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया।

समझाइश के दौरान भड़की भीड़

सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा प्रदर्शनकारियों को समझाकर रास्ता खाली कराने का प्रयास किया। अभियोजन के मुताबिक, इसी दौरान भीड़ उग्र हो गई और पुलिस दल पर पथराव शुरू कर दिया। पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि घटनास्थल पर मौजूद कुछ वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई।

स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए भीड़ को तितर-बितर किया और राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात दोबारा शुरू कराया।

साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सुनाया फैसला

मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने 27 आरोपियों को दोषी माना।

दोषियों में अनिल राजपूत, प्रेमनारायण अहिरवार, राजू अहिरवार, सुरेश अहिरवार, किशनलाल अहिरवार, मुकेश अहिरवार, विशाल अहिरवार, सुनीता अहिरवार, बती अहिरवार और नीलमणी परमार सहित कुल 27 आरोपी शामिल हैं।

इन धाराओं के तहत हुई सजा

मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला अभियोजन अधिकारी सुषील शर्मा ने पैरवी की। अदालत ने सभी दोषियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 353 (लोक सेवक पर हमला या बल प्रयोग), 427 (संपत्ति को नुकसान), 323 (मारपीट), 147 (दंगा) और 149 (गैरकानूनी जमाव के समान उद्देश्य) के तहत दोषी ठहराते हुए छह-छह माह के सश्रम कारावास और 500-500 रुपये के जुर्माने से दंडित किया।

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