मध्य प्रदेश सरकार के हालिया तबादला और पदस्थापना आदेशों के बाद राज्य वित्त सेवा के अधिकारियों की तैनाती को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, 15 जून को जारी तबादला आदेशों में बड़ी संख्या में अधिकारियों की नई पदस्थापना की गई थी।
बताया जा रहा है कि 18 से अधिक अधिकारियों को उनके मूल कैडर से एक या दो स्तर ऊपर अथवा नीचे के पदों का प्रभार सौंपा गया है। इनमें उप संचालक (डीडी) स्तर के अधिकारियों को संयुक्त संचालक (जेडी) और कुछ संयुक्त संचालकों को अपर संचालक स्तर की जिम्मेदारियां दी गई हैं। वहीं कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से उनके मूल पद से नीचे के पदों पर कार्य लिया जा रहा है। इस व्यवस्था को लेकर विभाग के भीतर सवाल उठने लगे हैं।
नगरीय विकास संचालनालय और नगर निगम में भी अलग व्यवस्था
सूत्रों के अनुसार, नगरीय विकास संचालनालय की वित्त शाखा में संयुक्त संचालक स्तर के स्वीकृत पद पर राज्य वित्त सेवा के अधिकारी सौरभ तिवारी की पदस्थापना की गई है, जबकि उनका मूल कैडर उप संचालक का बताया जाता है। इसी तरह तरुण बडेरिया, जिनका मूल पद भी उप संचालक है, उन्हें नगर निगम भोपाल में अपर आयुक्त (वित्त) की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे संयुक्त संचालक स्तर का पद माना जाता है।
एमपीआरडीसी में भी कैडर से ऊंचे पद का प्रभार
मध्य प्रदेश सड़क विकास प्राधिकरण (एमपीआरडीसी) में राजेश सिंह पवैया को मुख्य महाप्रबंधक (वित्त) का दायित्व दिया गया है। उनका मूल पद उप संचालक बताया जाता है, जबकि मुख्य महाप्रबंधक का पद अपर संचालक स्तर का माना जाता है। इसी तरह विक्रम झिरोलिया, जिनका मूल पद उप संचालक है, वे पिछले करीब डेढ़ वर्ष से परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) में संयुक्त संचालक स्तर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
मंडी बोर्ड और पीडब्ल्यूडी में भी पदस्थापनाओं पर सवाल
राज्य वित्त सेवा के अमन पस्तोर को मंडी बोर्ड में वित्तीय सलाहकार बनाया गया है। बताया जाता है कि उनका मूल कैडर संयुक्त संचालक का है, जबकि वित्तीय सलाहकार का पद अपर संचालक स्तर का माना जाता है। दूसरी ओर रजनी शुक्ला को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में संयुक्त संचालक के रूप में पदस्थ किया गया है।
कुछ अधिकारियों से मूल पद से नीचे का काम
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मध्य प्रदेश इकाई में मुमुल सिंह, जिनका मूल पद उप संचालक है, उनसे सहायक संचालक स्तर पर लेखाधिकारी का कार्य कराया जा रहा है। इसी प्रकार अमित वर्मा को मंत्रालय से स्थानांतरित कर स्वास्थ्य विभाग में लेखाधिकारी बनाया गया है, जिसे उनके मूल पद से एक स्तर नीचे माना जा रहा है।
विशेषज्ञों ने पारदर्शिता और सेवा नियमों पर जताई चिंता
प्रशासनिक मामलों के जानकारों का कहना है कि सरकारी सेवाओं में पदस्थापना के लिए निर्धारित सेवा नियम और कैडर व्यवस्था का पालन प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यकुशलता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। उनका मत है कि यदि बड़े पैमाने पर कैडर से अलग पदस्थापनाएं की जाती हैं तो इससे सेवा संरचना, वरिष्ठता और अधिकारियों के मनोबल पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि ऐसी व्यवस्थाओं की समय रहते समीक्षा नहीं हुई तो भविष्य में प्रशासनिक विवाद और बढ़ सकते हैं।
हालांकि, इस संबंध में सरकार या वित्त विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
