हरदा जिले में हाल की भारी बारिश और बाढ़ का असर कम जरूर हुआ है, लेकिन कई ग्रामीण मार्ग अब भी सुरक्षित नहीं माने जा सकते। बाढ़ का पानी उतरने के बाद पुल-पुलियों, रपटों और संपर्क मार्गों पर बड़ी मात्रा में गाद, चिकनी मिट्टी, पत्थर और अन्य मलबा जमा रह गया है। इससे इन रास्तों पर फिसलन बढ़ गई है और वाहन चालकों के लिए सफर चुनौतीपूर्ण हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर पुल-पुलियों की सतह पर मिट्टी की इतनी मोटी परत जमी है कि दोपहिया वाहनों का संतुलन बिगड़ने का खतरा बना रहता है। हल्की बारिश या सड़क पर नमी आने के बाद यह गाद और अधिक फिसलन पैदा कर देती है। ऐसे हालात में चारपहिया वाहनों के भी नियंत्रण खोने की आशंका बनी रहती है।
सबसे अधिक चिंता उन पुल-पुलियों को लेकर जताई जा रही है, जिनके दोनों ओर गहरे नाले या नदी बहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई वाहन फिसलकर अनियंत्रित हो जाए तो गंभीर दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी कई स्थानों पर अब तक सफाई कार्य शुरू नहीं हुआ है।
ग्रामीण क्षेत्रों के कई मार्गों पर पेड़ों की टूटी टहनियां, प्लास्टिक कचरा, पत्थर और मिट्टी अब भी पड़ी हुई है। इससे आवागमन प्रभावित हो रहा है। स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों, किसानों और रोजाना इन रास्तों से गुजरने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा और संबंधित ग्राम पंचायतें संयुक्त रूप से अभियान चलाकर सभी पुल-पुलियों, रपटों और ग्रामीण सड़कों से गाद व मलबा तत्काल हटाएं, ताकि बरसात के शेष मौसम में लोगों को सुरक्षित आवागमन मिल सके।
जानकारों का कहना है कि बाढ़ के बाद सड़क और पुल-पुलियों पर जमी चिकनी गाद वाहनों के टायरों की पकड़ कम कर देती है। ऐसे में चालक को संभलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
बरसात का मौसम अभी जारी है। ऐसे में यदि प्रभावित मार्गों की समय पर सफाई नहीं हुई, तो लगातार आवागमन करने वाले लोगों के लिए जोखिम और बढ़ सकता है। स्थानीय लोग प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।