Friday, 29 May

नई दिल्ली/भोपाल/जयपुर। मई खत्म होने को है, लेकिन देश के बड़े हिस्से में गर्मी का कहर और तेज हो गया है। शुक्रवार को उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी राज्यों के कई शहरों में तापमान 45 से 46 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में दिन के समय सड़कें लगभग खाली दिखाई दीं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले 72 घंटों के लिए गंभीर हीटवेव अलर्ट जारी किया है। बढ़ती गर्मी के बीच बिजली की रिकॉर्ड मांग, अस्पतालों में हीट स्ट्रोक मरीजों की संख्या और पानी की किल्लत ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

देश इस समय सिर्फ एक मौसमीय संकट नहीं, बल्कि जीवनशैली और बुनियादी ढांचे की परीक्षा से गुजर रहा है।

कई शहर बने ‘हॉटस्पॉट’

शुक्रवार दोपहर राजस्थान के श्रीगंगानगर, दिल्ली के बाहरी इलाके, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में तापमान 45°C से ऊपर रिकॉर्ड किया गया। कई जगहों पर जमीन का सतही तापमान इससे भी ज्यादा महसूस किया गया। तेज गर्म हवाओं ने हालात और कठिन बना दिए।

भोपाल, ग्वालियर, नागपुर और लखनऊ जैसे शहरों में दोपहर के समय सड़क यातायात सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम देखा गया। स्कूलों ने आउटडोर गतिविधियां रोक दी हैं और कई राज्यों में प्रशासन ने दोपहर के समय निर्माण कार्य सीमित करने की सलाह दी है।

बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव

गर्मी बढ़ने के साथ एयर कंडीशनर, कूलर और पंपों के इस्तेमाल ने बिजली खपत को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। कई राज्यों में स्थानीय स्तर पर बिजली कटौती की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीण इलाकों में स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है, जहां लंबे कट लगने से पानी सप्लाई भी प्रभावित हो रही है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते तापमान के कारण भारत की बिजली मांग हर साल नए रिकॉर्ड बना रही है। समस्या सिर्फ उत्पादन की नहीं, वितरण व्यवस्था की भी है।

अस्पतालों में बढ़ रहे हीट स्ट्रोक के मामले

सरकारी अस्पतालों और जिला स्वास्थ्य केंद्रों में डिहाइड्रेशन, चक्कर, उल्टी और हीट एक्सॉशन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डॉक्टरों ने बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले मजदूरों को सबसे ज्यादा जोखिम वाला वर्ग बताया है।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक घर से बाहर न निकलने, लगातार पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी है। कई शहरों में ORS और पानी वितरण केंद्र भी शुरू किए गए हैं।

क्यों लगातार खतरनाक होती जा रही हैं हीटवेव?

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में हीटवेव अब सिर्फ मौसमी घटना नहीं रह गई है। पिछले कुछ वर्षों में अप्रैल और मई के तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शहरीकरण, कंक्रीट का बढ़ता फैलाव, पेड़ों की कमी और जलवायु परिवर्तन ने गर्मी को ज्यादा आक्रामक बना दिया है।

दिल्ली, अहमदाबाद और नागपुर जैसे शहरों में ‘अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट’ तेजी से बढ़ रहा है, जहां शहर का तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों से कई डिग्री ज्यादा महसूस होता है।

मानसून का इंतजार और बढ़ती बेचैनी

गर्मी से राहत की सबसे बड़ी उम्मीद अब प्री-मानसून बारिश और दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति पर टिकी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार कुछ राज्यों में अगले कुछ दिनों में आंधी और हल्की बारिश की संभावना बन सकती है, लेकिन व्यापक राहत अभी दूर दिखाई दे रही है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जून के शुरुआती हफ्तों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो इसका असर खरीफ फसलों की तैयारी पर भी पड़ सकता है।

पहले भी दिख चुका है ऐसा खतरा

भारत ने 2015 और 2022 में भी गंभीर हीटवेव का सामना किया था, जब हजारों लोग प्रभावित हुए थे और कई राज्यों में जनजीवन ठप पड़ गया था। लेकिन इस बार चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि तापमान लंबे समय तक ऊंचा बना हुआ है और बड़े शहरों की आबादी पहले से ज्यादा दबाव में है।

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